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डायरेक्टर शिक्षा विभाग (सेकेंडरी) के कार्यालय के बाहर अध्यापकों का प्रदर्शन
लंबे समय से लंबित पड़ी विभागीय पदोन्नतियों और तबादलों को पारदर्शी तरीके से लागू करवाने की मांग को लेकर डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) के नेतृत्व में अध्यापकों ने डायरेक्टर शिक्षा विभाग (सेकेंडरी) के कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए डीटीएफ के राज्य प्रधान दिग्विजयपाल शर्मा और राज्य सचिव रेशम सिंह खेमुआणा ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा किए जा रहे शिक्षा क्रांति के दावे पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में प्रिंसिपलों की लगभग 1900 स्वीकृत पदों में से करीब 1200 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह मुख्य अध्यापकों और ब्लॉक प्राइमरी शिक्षा अधिकारियों के भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। आगुओं ने आरोप लगाया कि हाल ही में हुए तबादलों में विशेष आवश्यकता वाले अध्यापकों के फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर धांधली की गई है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विभाग में ईटीटी से मास्टर कैडर की पदोन्नतियां हर बार विभाग की लापरवाही के कारण कोर्ट केसों में फंस जाती हैं, जबकि वर्ष 2015 और 2018 के लंबित मामलों को अभी तक पदोन्नति नहीं मिली है। डीटीएफ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जो थोड़ी-बहुत पदोन्नतियां की गईं, उनमें गैर सांविधानिक नीति अपनाकर अध्यापकों को उनके मूल स्कूलों से दूर-दराज के जिलों में भेज दिया गया, जिसके चलते कई अध्यापकों ने पदोन्नति लेने से ही इंकार कर दिया। अध्यापक नेताओं कुलविंदर सिंह, हरविंदर सिंह और बिनाक्सी सोढ़ी ने कहा कि इस बार जिन अध्यापकों के तबादले हुए हैं, उन्हें एसआईआर ड्यूटी के कारण स्कूलों से रिलीव नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा 50 प्रतिशत से कम स्टाफ की शर्त लगाकर भी अध्यापकों को परेशान किया जा रहा है। जब डीएसई के साथ बैठक नहीं करवाई गई तो आक्रोशित अध्यापक नारेबाजी करते हुए चौथी मंजिल पर स्थित कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। इस मौके पर डीटीएफ नेताओं ने मांग की कि मालवा क्षेत्र में अंग्रेजी के पद सृजित किए जाएं, तबादलों के दौरान घर से दूरी के अंक जोड़े जाएं, आपसी तबादलों में सभी शर्तें खत्म की जाएं तथा लंबे समय से दूर-दराज क्षेत्रों में कार्यरत अध्यापकों को विशेष मौका दिया जाए। इसके अलावा तबादलों के और दो चरण चलाने, सहायक अध्यापकों को भी ट्रांसफर नीति में शामिल करने तथा लेक्चरर कैडर में पदोन्नति के लिए 50 प्रतिशत अंक की शर्त समाप्त करने की मांग की गई। उन्होंने ईटीटी से हेड टीचर, सेंटर हेड टीचर और ब्लॉक प्राइमरी शिक्षा अधिकारियों की पदोन्नतियां करने तथा प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए हेल्परों की नियुक्ति करने की भी मांग उठाई। प्रदर्शन को जीवन सिंह बधाई, बलजिंदर बठिंडा, हरजीत सुधार सहित अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।
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