बालोतरा जिले की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी पचपदरा रिफाइनरी परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। अब इस सामरिक रूप से महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजना की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) संभालेगा।
इनको सौंपी गई रिफाइनरी की सुरक्षा
बुधवार को रिफाइनरी परिसर में आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान सुरक्षा की कमान आधिकारिक रूप से सीआईएसएफ को सौंप दी गई। इस अवसर पर सीआईएसएफ के जवानों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद ‘प्रोजेक्ट की’ और कमान दंड सौंपकर सुरक्षा व्यवस्था के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
पहले चरण में इतने जवान तैनात
सुरक्षा हस्तांतरण के साथ ही पहले चरण में सीआईएसएफ के 195 प्रशिक्षित जवानों की तैनाती की गई है। ये जवान रिफाइनरी परिसर, संवेदनशील इकाइयों, महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों और कार्यरत कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। सीआईएसएफ की तैनाती से न केवल परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी, बल्कि भविष्य में उत्पादन और संचालन के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा से निपटने में भी मदद मिलेगी।
पहले इनके हाथों में थी रिफाइनरी की सुरक्षा
अब तक रिफाइनरी की सुरक्षा निजी सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से की जा रही थी, लेकिन परियोजना के आकार, निवेश और रणनीतिक महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा सीआईएसएफ की तैनाती का निर्णय लिया गया। यह कदम रिफाइनरी को उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
एचआरआरएल और सीआईएसएफ के बीच समन्वय पर जोर
समारोह के दौरान सीआईएसएफ और एचआरआरएल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच आपसी संवाद भी हुआ। इस बातचीत में सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन प्रबंधन, समन्वय तंत्र और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि परियोजना की सफलता के लिए सुरक्षा और संचालन के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है।
कब होगा रिफाइनरी का उद्घाटन?
सूत्रों के अनुसार पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन इसी माह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा सकता है। उद्घाटन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सीआईएसएफ की तैनाती को भी इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
रिफाइनरी बनाने में खर्च हुए इतने हजार करोड़
- पचपदरा रिफाइनरी परियोजना की कुल लागत अब बढ़कर लगभग 80 हजार करोड़ रुपए हो चुकी है।
- वर्ष 2025 में हुई अंतिम केंद्रीय कैबिनेट बैठक में संशोधित लागत को स्वीकृति दी गई थी।
- साल 2013 में जब इस रिफाइनरी की आधारशिला रखी गई थी, तब इसकी अनुमानित लागत करीब 37 हजार करोड़ रुपए थी।
- समय के साथ परियोजना के विस्तार, तकनीकी बदलावों और अन्य कारणों से लागत में वृद्धि हुई है।
जुलाई 2026 से वाणिज्यिक उत्पादन की उम्मीद
रिफाइनरी में वाणिज्यिक उत्पादन जुलाई 2026 से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इसके शुरू होने से न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे को भी नया आयाम मिलेगा।
कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण अवसर पर एचआरआरएल और सीआईएसएफ के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सीआईएसएफ उत्तर क्षेत्र के महानिरीक्षक नवज्योत गोगोई, एचआरआरएल के मुख्य वित्त अधिकारी इंद्रजीत दास गुप्ता, कार्यकारी अधिकारी कमलाकर आर. विखार, कार्यकारी निदेशक (परिचालन एवं कमीशनिंग) उदित नंदी, कार्यकारी निदेशक (परियोजना) जी. यू. नरसिंहुलु सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा श्रवण केसरकर, किशोर कुमार, एस. नारायण, बी. आर. ढाका, प्रीतम सिंह मीणा, सीआईएसएफ उप महानिरीक्षक सुनील कुमार सिन्हा और वरिष्ठ कमांडेंट वेद प्रकाश मिश्रा भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
परियोजना के लिए मील का पत्थर
कुल मिलाकर, पचपदरा रिफाइनरी की सुरक्षा सीआईएसएफ को सौंपा जाना इस परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह कदम न केवल सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि रिफाइनरी के समयबद्ध और सुरक्षित संचालन की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।