{"_id":"694254ec1e0c2fe64708c84a","slug":"ultratech-plant-accused-of-violating-ngt-orders-medha-patkar-puts-pressure-on-administration-kotputli-behror-news-c-1-1-noi1440-3743502-2025-12-17","type":"video","status":"publish","title_hn":"Kotputli News: सीमेंट प्लांट पर एनजीटी आदेशों की अनदेखी का आरोप, मेधा पाटकर के समर्थन से तेज हुआ आंदोलन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kotputli News: सीमेंट प्लांट पर एनजीटी आदेशों की अनदेखी का आरोप, मेधा पाटकर के समर्थन से तेज हुआ आंदोलन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़ Published by: कोटपुतली ब्यूरो Updated Wed, 17 Dec 2025 06:44 PM IST
Link Copied
जिले के ग्राम मोहनपुरा स्थित एक सीमेंट प्लांट द्वारा एनजीटी के आदेशों की कथित अनदेखी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जोधपुरा संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण लंबे समय से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच प्रसिद्ध पर्यावरणविद् मेधा पाटकर के कोटपूतली पहुंचने से आंदोलन को नई ऊर्जा मिली। पाटकर ने धरना स्थल पर ग्रामीणों से संवाद किया और इसके बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन तथा कंपनी प्रबंधन से सीधी वार्ता की।
कलेक्ट्रेट में कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी और सीमेंट कंपनी प्रबंधन के अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे चली बैठक में मेधा पाटकर ने एनजीटी के 3 नवंबर को पारित आदेशों का हवाला देते हुए सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रदूषण से प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा देने के स्पष्ट निर्देश हैं लेकिन अधिकांश पीड़ितों को अब तक कोई राहत नहीं मिली। पाटकर ने बताया कि प्लांट के कारण आसपास के 627 ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। एनजीटी के आदेशों के अनुसार स्वास्थ्य प्रभावितों को 20 हजार रुपये और जिनके मकानों पर असर पड़ा है, उन्हें 50 हजार रुपये मुआवजा दिया जाना था।
बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि एनजीटी ने प्लांट से 500 मीटर की परिधि में आबादी, स्कूल, मंदिर या अन्य सार्वजनिक संस्थानों के न होने की शर्त रखी है, जबकि कंपनी द्वारा प्रस्तुत नक्शों और विभागीय नक्शों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आ रहा है। ग्रामीणों ने कंपनी के नक्शों को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया। हरित पट्टी विकसित करने के दावे भी जांच में कमजोर नजर आए, जहां अधिकांश पौधे सूखे या नष्ट अवस्था में पाए गए।
धरना संयोजक राधेश्याम शुक्लाबास ने आरोप लगाया कि आंदोलन तेज होते ही कंपनी दिखावटी सफाई, सड़कों पर पानी का छिड़काव और पेड़ों की धुलाई शुरू कर देती है। उन्होंने रात्रिकालीन खनन और ब्लास्टिंग पर रोक के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। धमाकों और भारी मशीनों की आवाज से ग्रामीणों की नींद और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे हैं।
बैठक के बाद कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी ने एनजीटी आदेशों की पूर्ण पालना सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया। बैठक में एसपी देवेंद्र बिश्नोई, एडीएम ओमप्रकाश सहारण, एसडीएम रामावतार मीणा, खनिज विभाग के अधिकारी, फैक्ट्री प्रबंधन के प्रतिनिधि और धरनार्थी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि आदेशों का सख्ती से पालन नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।