मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीए फोर्थ सेमेस्टर प्राइवेट के इतिहास के पेपर में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। 95 फीसदी से ज्यादा सवाल आउट ऑफ सिलेबस थे। वहीं, कई टाइपिंग गलतियां भी देखने को मिलीं। पेपर में ‘मराठा’ की जगह ‘पराठा’ लिखा गया था। मामले के सामने आने के बाद एबीवीपी ने विरोध जताया और इसके बाद परीक्षा नियंत्रक को इस्तीफा देना पड़ा।
दरअसल, सुखाड़िया विश्वविद्यालय में बीते दिनों कुलपति के विवादित बयान का मामला थमा ही था कि बीए फोर्थ सेमेस्टर के प्राइवेट एग्जाम पेपर ने फिर मामले को गरमा दिया। शनिवार को History of India from 1885 to 1964 के पेपर में 1857 की क्रांति तक के सवाल पूछे गए। कई सवाल Indian Council Act से जुड़े थे, जबकि यह विषय पेपर के कोर्स में शामिल नहीं था।
महानगर मंत्री एबीवीपी पुप्पेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि विश्वविद्यालय में पेपर की लापरवाही के कारण एबीवीपी के कार्यकर्ता रजिस्ट्रार से मिलने पहुंचे, लेकिन रजिस्ट्रार के पास इसका कोई जवाब नहीं था। इस दौरान परीक्षा नियंत्रक पी.एस. राजपूत को बुलवाया गया, लेकिन उन्होंने जानकारी होने से इनकार करते हुए केवल जांच कराने की बात कही।
राठौड़ ने कहा कि विवादित बयान के बाद विश्वविद्यालय में विवादित पेपर भी छापे जा रहे हैं। न सिलेबस का ध्यान रखा जा रहा है और न ही जिम्मेदारों के पास कोई जवाब है। ज्यादा सवाल पूछे जाने के बाद पी.एस. राजपूत ने तुरंत परीक्षा नियंत्रक के पद से त्यागपत्र दे दिया।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्टूडेंट्स से दो दिनों का वक्त मांगा है और जांच के बाद निर्णय लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि संभाग भर से स्टूडेंट्स इस परीक्षा में शामिल हुए थे। रजिस्ट्रार वृद्धिचंद गर्ग ने बताया कि राजपूत ने परीक्षा नियंत्रक के पद का लिखित इस्तीफा दिया है। राजपूत के पास अतिरिक्त कार्यभार था। इसे आगे विश्वविद्यालय स्तर पर प्रोसेस किया जाएगा। पेपर की गड़बड़ी पर जल्द जांच कर इसका समाधान किया जाएगा।
उदयपुर संभाग में सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स वाली मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में शनिवार से प्राइवेट स्टूडेंट्स के पेपर शुरू हुए थे। लगभग 60 सेंटर पर परीक्षा हुई, जिसमें 5,000 से अधिक स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। बीए प्राइवेट के कुल चार पेपर अभी बाकी हैं। परीक्षा नियंत्रक के रूप में लाइब्रेरी साइंस के सहायक आचार्य पी.एस. राजपूत के पास इसका चार्ज था। मामले के सामने आने के बाद एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध जताया।