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Tehri: Questions raised over the construction of a modern power plant worth ₹278 crore in Sendul
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टिहरी: सेंदुल में 278 करोड़ के आधुनिक बिजली घर के निर्माण पर उठे सवाल
सेंदुल में 278 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे आधुनिक बिजली घर के निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराने लगा है। परियोजना में अनियमितताओं और ग्रामीणों की अनदेखी के आरोपों के बीच अब मिट्टी के निस्तारण को लेकर भी विरोध शुरू हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना निर्धारित डंपिंग जोन के रौंसाल गांव में मिट्टी डंप की जा रही थी। इसका विरोध करते हुए ग्राम प्रधान कृष्ण गोविन्द कंसवाल और क्षेत्र पंचायत सदस्य राहुल पंवार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मिट्टी से भरे डंपरों को रोककर वापस लौटा दिया।
ग्रामीणों ने प्रशासन, पिटकुल और निर्माण कार्य कर रही अरविंद इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए और बिना निर्धारित व्यवस्था के गांव में मिट्टी डंप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित संस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
डेढ़ साल बाद भी वादे पूरे नहीं होने का आरोप
सेंदुल के ग्राम प्रधान अमित जोशी ने भी परियोजना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली घर के निर्माण से पहले कार्यदायी संस्था और निर्माण करने वाली संस्था ने ग्रामीणों से कई वादे किए थे, लेकिन करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी उन वादों पर अमल नहीं हुआ है। प्रधान के अनुसार, परियोजना के निर्माण से स्थानीय ग्रामीणों को जिन सुविधाओं और लाभों की उम्मीद थी, वे अब तक धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं।
अमित जोशी ने आरोप लगाया कि गांव की एनओसी के बिना ही निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना के लिए ग्रामीणों की कई नाली जमीन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन संबंधित ग्रामीणों को अब तक उसका भुगतान नहीं मिला है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के मामले में भी कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
करोड़ों की परियोजना, लेकिन ग्रामीणों के हाथ खाली?
ग्रामीणों का कहना है कि 278 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इतनी बड़ी परियोजना से क्षेत्र में विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी। इसके बावजूद भूमि के भुगतान, स्थानीय रोजगार और निर्माण कार्यों से जुड़े मुद्दे उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने सवाल किया कि जब परियोजना के लिए स्थानीय लोगों की जमीन और संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है, तो उनके हितों और अधिकारों की अनदेखी क्यों की जा रही है।
ग्रामीणों ने मांग की कि परियोजना के निर्माण में अपनाई जा रही प्रक्रिया, मिट्टी के निस्तारण के लिए निर्धारित स्थान, जमीन के भुगतान और एनओसी से संबंधित मामलों की जांच की जाए। साथ ही, स्थानीय लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए संबंधित संस्थाओं को जवाबदेह बनाया जाए।
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