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यूपी: भाजपा भांप रही है सहयोगियों से भितरघात का खतरा, अनदेखी से सुलग रहे बागियों तेवर; शाह के लिए चुनौती

Sat, 24 Oct 2026 07:54 PM IST
रोहित मिश्र सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 24 Oct 2026 07:54 PM IST
सार

UP Assembly Elections: यूपी विधानसभा चुनाव के ठीक भाजपा अपने सहयोगी दलों की नाराजगी दूर करने की कोशिश करेगी। इसके लिए पार्टी हाईकमान रणनीति बना रहा है। 

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UP: BJP senses the threat of internal strife from allies, neglect fuels rebel sentiment
अमित शाह का यूपी दौरा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के सामने अब विपक्ष से मुकाबले के साथ अपने ही नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साधने की चुनौती खड़ी हो गई है। संगठन में पद और जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद लगाए बैठे कार्यकर्ताओं की अनदेखी तथा दूसरे दलों से आए नेताओं को तरजीह देने की नीति पार्टी के भीतर असंतोष की वजह बन रही है। हालात यह है कि चुनावी तैयारियों के सिलसिले में दौरे पर पहुंच रहे बड़े नेताओं के सामने भी नाराज कार्यकर्ताओं का गुस्सा सामने आने लगा है। ऐसे में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लक्ष्य के बीच भाजपा को भीतरघात का खतरा परेशान कर सकता है।

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भाजपा ने संगठन को चुनावी मोड में लाने के लिए बैठकों, दौरों का सिलसिला तेज कर दिया है। हर बैठकों में बड़े नेता कार्यकर्ताओं को 'देवतुल्य' बताने से नहीं अघा रहे हैं। जबकि वस्तुस्थिति यह है कि संगठन और विभिन्न मोर्चों व प्रकोष्ठों में समायोजन न होने से वर्षों से पार्टी की सेवा में जुटे तमाम कार्यकर्ताओं में असंतोष गहराता जा रहा है। कई बैठकों में 'पीक एंड चूज' और " सेटिंग-गेटिंग" के सिद्धांत पर ही पदाधिकारियों के चयन के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में अब तमाम कार्यकर्ता घर बैठ गए हैं। हालांकि पार्टी के स्तर पर एक बार फिर से उन्हे मनाने और बूथ पर सक्रिय करने को लेकर बड़े नेता पसीना बहा रहे हैं।
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बता दें कि संगठन में समायोजन की उम्मीद लगाए कार्यकर्ताओं की नाराजगी अब केवल संगठनात्मक शिकायत तक सीमित नहीं रह गई है। जिन्हें पद नहीं मिला, वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इनमें ऐसे कार्यकर्ता भी हैं, जो बूथ से लेकर जिला स्तर तक संगठन के लिए सक्रिय रहे हैं। उन्हें आशंका है कि चुनाव के समय उनसे काम तो लिया जाएगा, लेकिन फैसले और जिम्मेदारी के समय फिर किनारे कर दिया जाएगा। यही नाराजगी चुनाव में निष्क्रियता या भीतरघात का कारण बन सकती है।

भाजपा के लिए चुनौती इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि चुनाव में केवल उम्मीदवारों की जीत का गणित नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी निर्णायक होगी। असंतुष्ट कार्यकर्ता यदि प्रचार से दूरी बनाते हैं या पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ माहौल बनाने लगते हैं, तो इसका नुकसान सीधे चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान नाराजगी दूर करने और संगठन में तालमेल बैठाने की कोशिश महत्वपूर्ण होगी। नेतृत्व के सामने संदेश साफ है कि चुनावी रणनीति और बड़े नेताओं के दौरों से ही जीत सुनिश्चित नहीं होगी। पदों की बंदरबांट और उपेक्षा की शिकायतों का समाधान किए बिना पार्टी अपने ही असंतुष्टों को चुनावी चुनौती बनने से नहीं रोक पाएगी।

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