{"_id":"6a674797ac05b1691e056a24","slug":"pakistan-religious-minorities-blasphemy-laws-misuse-minorities-report-2026-2026-07-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तान में ईशनिंदा: निजी दुश्मनी-वसूली का बना हथियार, अल्पसंख्यकों पर झूठे मुकदमों पर आई रिपोर्ट में क्या?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
पाकिस्तान में ईशनिंदा: निजी दुश्मनी-वसूली का बना हथियार, अल्पसंख्यकों पर झूठे मुकदमों पर आई रिपोर्ट में क्या?
Mon, 27 Jul 2026 05:27 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, इस्लामाबाद।
आईएएनएस, इस्लामाबाद।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 27 Jul 2026 05:27 PM IST
सार
पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के जरिए अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। आधिकारिक रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि अधिकांश मामले निजी रंजिश में दर्ज कराए जाते हैं। कानून के इस खुले दुरुपयोग और सख्त कार्रवाई के अभाव ने देश की न्यायिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन
पाकिस्तान में ईशनिंदा
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान से एक चौंकाने वाली आधिकारिक रिपोर्ट सामने आई है। देश के चारों प्रांतों में दर्ज ज्यादातर ईशनिंदा मामले फर्जी पाए गए हैं। कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने खुद यह खुलासा किया है। संसदीय समिति को सौंपी गई रिपोर्ट में कई बातें साफ हुई हैं। इन झूठे मुकदमों का सबसे बड़ा शिकार धार्मिक अल्पसंख्यक बन रहे हैं।
क्या निजी दुश्मनी का जरिया बने कानून?
सिंध, पंजाब, केपीके और बलूचिस्तान के अधिकारियों ने यह रिपोर्ट सीनेट समिति को सौंपी। मानवाधिकारों पर बनी कार्यात्मक समिति को दिए आंकड़े बेहद डरावने हैं। जांच में सामने आया कि ईशनिंदा के आरोप धार्मिक भावनाओं से नहीं जुड़े थे। असल में इनका मकसद निजी दुश्मनी और पारिवारिक विवाद निपटाना था। कई मामलों में तो संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए यह साजिश रची गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच में आरोपों के कोई सबूत नहीं मिले। सबूत न होने के कारण कई मामलों को खारिज कर दिया गया। लेकिन तब तक आरोपी व्यक्ति और उसका परिवार पूरी तरह तबाह हो चुका होता है।
किस प्रांत में दर्ज हुए कितने मामले?
आधिकारिक रिपोर्ट में पिछले पांच वर्षों का पूरा ब्योरा दिया गया है। आंकड़े बताते हैं कि मामलों की संख्या किस तेजी से बढ़ी है:
विज्ञापन
व्यवस्था की नाकामी और अल्पसंख्यकों का दर्द, पांच बड़ी बातें
क्या पाकिस्तान रोक पाएगा निर्दोषों का उत्पीड़न?
मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी न्याय प्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। वॉइस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने सरकार को आड़े हाथों लिया। संस्था ने कहा कि निर्दोषों की रक्षा करने में अदालतें नाकाम रही हैं। फर्जी आरोप लगाने वालों को सजा न मिलना सबसे बड़ी कमी है। जब तक झूठी शिकायत करने वाले बचते रहेंगे, यह सिलसिला नहीं थमेगा।
विज्ञापन
क्या निजी दुश्मनी का जरिया बने कानून?
सिंध, पंजाब, केपीके और बलूचिस्तान के अधिकारियों ने यह रिपोर्ट सीनेट समिति को सौंपी। मानवाधिकारों पर बनी कार्यात्मक समिति को दिए आंकड़े बेहद डरावने हैं। जांच में सामने आया कि ईशनिंदा के आरोप धार्मिक भावनाओं से नहीं जुड़े थे। असल में इनका मकसद निजी दुश्मनी और पारिवारिक विवाद निपटाना था। कई मामलों में तो संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए यह साजिश रची गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच में आरोपों के कोई सबूत नहीं मिले। सबूत न होने के कारण कई मामलों को खारिज कर दिया गया। लेकिन तब तक आरोपी व्यक्ति और उसका परिवार पूरी तरह तबाह हो चुका होता है।
विज्ञापन
किस प्रांत में दर्ज हुए कितने मामले?
आधिकारिक रिपोर्ट में पिछले पांच वर्षों का पूरा ब्योरा दिया गया है। आंकड़े बताते हैं कि मामलों की संख्या किस तेजी से बढ़ी है:
- पंजाब प्रांत: धारा 295-सी के तहत सबसे ज्यादा 116 मामले दर्ज किए गए।
- सिंध प्रांत: धारा 295-बी के तहत 96 और धारा 295-C के तहत 29 केस दर्ज हुए।
- खैबर पख्तूनख्वा: पांच वर्षों में 90 से अधिक मामले दर्ज किए गए।
- बलूचिस्तान: यहां ईशनिंदा के 28 मामले सामने आए।
विज्ञापन
व्यवस्था की नाकामी और अल्पसंख्यकों का दर्द, पांच बड़ी बातें
- झूठे आरोपों की भरमार: 333 मामलों में से अधिकांश में कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
- अल्पसंख्यकों का निशाना: ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
- सजा का खौफ नहीं: झूठी शिकायत करने वालों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।
- भीड़ की हिंसा: अदालती फैसले से पहले ही भीड़ आरोपी को निशाना बना लेती है।
- रिमशा मसीह केस: डाउन सिंड्रोम से पीड़ित ईसाई बच्ची पर फर्जी आरोप लगाकर फंसाया गया था।
क्या पाकिस्तान रोक पाएगा निर्दोषों का उत्पीड़न?
मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी न्याय प्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। वॉइस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने सरकार को आड़े हाथों लिया। संस्था ने कहा कि निर्दोषों की रक्षा करने में अदालतें नाकाम रही हैं। फर्जी आरोप लगाने वालों को सजा न मिलना सबसे बड़ी कमी है। जब तक झूठी शिकायत करने वाले बचते रहेंगे, यह सिलसिला नहीं थमेगा।