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Baba Siddique: फेरीवाले के बेटे ने लगाया फास्ट फूड का ठेला, आगे चलकर बन गया महाराष्ट्र सरकार में मंत्री

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज Published by: आदित्य आनंद Updated Sun, 13 Oct 2024 11:06 AM IST
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सार

बाबा सिद्दीकी ने अपने जीवन के शुरुआती पांच साल गोपालगंज के शेख टोली गांव में बिताया था। 2018 में गोपालगंज आये बाबा सिद्दीकी ने अपने गांव के पुराने मित्र और परिवार के सदस्यों से मुलाकात की थी। यहां एक सरकारी विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा संबंधित सामग्री का वितरण भी किया था।

Baba Siddique: Baba Siddique's Bihar, Gopalganj connection; Fast Food, Mumbai, Maharashtra, MLA, Murder
बाबा सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

महज 10 साल की उम्र में कोलकाता में फेरी लगाता था। चिल्ला-चिल्ला कर कहता था, "ताल चाभी बनवा लो भाई।" यह कौन जानता था कि यह फेरीवाला नहीं, बल्कि एक मशहूर हस्ती का पिता बनेगा। जिसका बचपन तंग गलियों में फेरी लगाते गुजर रहा था। वह आने वाले दिनों में कोहिनूर का खदान साबित होगा। आज से लगभग 60 साल पहले बिहार के लिए कोलकाता ही रोजगार पाने का सुगम शहर था। गोपालगंज जिले के मांझा शेख टोली के उस बालक का मन कोलकाता में भी नहीं लगा और वह साल दो साल बाद ही आर्थिक राजधानी मुंबई की ओर चल पड़ा। हम बात कर रहे हैं अपराधियों की गोलियों के शिकार हुए महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्धिकी के पिता अब्दुल रहीम सिद्दीकी की। मुंबई में अब्दुल रहीम को वहां दूर के रिश्तेदार असरार सिद्दीकी का सहयोग मिला। शांताक्रूज में कमरा लेकर रहने लगे। उसने कुछ दिनों तक फेरी करने के बाद "रेड वाच एण्ड रेडियो रिपेयरिंग हाउस" के नाम से एक दुकान खोल लिया। उम्र बैठा नहीं रहता। शादी हुई। उस रहीम के आंगन में एक कोहिनूर ने जन्म लिया। अपने उस कोहिनूर को अब्दुल रहीम ने बाबा सिद्दीकी नाम दिया।

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चाइनीज फास्ट फूड का ठेला लगाते थे
बाबा सिद्धिकी 2018 में गोपालगंज जिले के अपने गांव मांझा आए थे। मांझा में आने के दौरान गोपालगंज निवासी विजय तिवारी से चर्चा के दौरान बाबा सिद्धिकी ने अपने पुराने दिनों की कुछ बातें बताई। उन्हीं बातों को विजय तिवारी बताते हैं कि जब से बाबा सिद्दीकी का जन्म हुआ, रहीम की दुकान चल पड़ी। बाबा सिद्धिकी जब मुश्किल से चार साल के थे, तब उनके पिता रहीम ने बांद्रा पश्चिम में 550 वर्ग फीट का अपना मकान ले लिया। वही बांद्रा, जहां पूरी की पूरी बॉलीवुड बसती है। सलमान, शाहरूख, आमीर, सहित तमाम हीरो, हीरोईन, प्रोड्यूसर आदि रहते हैं। धीरे-धीरे बाबा सिद्दीकी भी समझदार हुए। पढ़ाई के साथ पिता के धंधे में हाथ बंटाने लगे। बाबा कुछ दिनों तक पिता के धंधे में हाथ बंटाने के पश्चात अपना चाइनीज फास्ट फूड का ठेला भी लगाने लगे। सड़क किनारे चाइनीज फास्ट फूड का ठेला लगाते-लगाते मैट्रिक की परीक्षा भी पास कर ली। लेकिन, बाबा के मन तो कुछ और सपना पल रहा था। वर्ष 1977 में इंटरमीडिएट शुरू हुआ।
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बांद्रा पूर्व से तीन बार विधायक बने
कॉलेज में नामांकन के साथ ही छात्र संगठन एनएसयूआई से जुड़ा और राजनीति की ओर पहला कदम बढ़ा दिया। वर्ष 1980 में अध्यक्ष की रेस में आया। लेकिन, सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने बाबा सिद्दीकी नाम से अपना एक निजी संगठन बनाया । जो छात्रों के हित में पूरे महाराष्ट्र में काम करने लगा। बाबा इस संगठन के माध्यम से महाराष्ट्र के विभिन्न कॉलेजों में छात्र संघ का चुनाव लड़वाते और अपने समर्थक छात्रों को जितवाते । नतीजा यह हुआ कि बाबा का राजनीतिक जड़ महाराष्ट्र में गहरा होने लगा। अपने मेहनत के बल पर बाबा सिद्दीकी मुंबई युवा कांग्रेस का महासचिव बने। फिर फिल्म अभिनेता और कांग्रेस नेता सुनील दत्त के संपर्क में आये। उसके बाद फिर बाबा सिद्दीकी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार मुंबई के बांद्रा पूर्व से तीन बार विधायक बने और इसी दौरान उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया।

बाबा ने लिखा था- गोपालगंज से मेरा बचपन जुड़ा है
बाबा सिद्दीकी ने अपने जीवन के शुरुआती पांच साल गोपालगंज के शेख टोली गांव में बिताया था। 2018 में गोपालगंज आये बाबा सिद्दीकी ने अपने गांव के पुराने मित्र और परिवार के सदस्यों से मुलाकात की थी। यहां एक सरकारी विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा संबंधित सामग्री का वितरण भी किया था। बाबा सिद्दीकी ने अपने फेसबुक पर भी लिखा था कि गोपालगंज से मेरा बचपन जुड़ा है और यहां काफी दिनों बाद आया हूं। बाबा सिद्दीकी के ममेरे भाई मोहम्मद जलालुद्दीन का परिवार आज भी इसी गांव में रहता है। बाबा सिद्दीकी ने 26 जून 2020 में एक फेसबुक पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने अपने और गोपालगंज के मांझा शहर से रिश्ता बताया था। यादें शेयर करते हुए उन्होंने लिखा था कि मेरे पिता का जन्म मांझा में हुआ था और मुझे मेरे बचपन की कई यादें इसी शहर से जोड़ती हैं। बाबा सिद्दीकी ने गोपालगंज में क्रिकेट अकादमी और क्रिकेट के क्षेत्र की विकास के लिए अहम योगदान दिए थे। शिक्षा से जुड़ी हुई बात हुई या फिर क्रिकेट की विकास की बात हो, गोपालगंज के खिलाड़ियों को हमेशा मदद करते थे। आज उनकी हत्या की खबर पाकर शेख टोली गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। 

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