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Bihar News: मां चली गई… बेटे सलाखों में कैद, जेल गेट पर ठहर गई अंतिम विदाई; घंटों बाद मिला अंतिम दर्शन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,भागलपुर
Published by: भागलपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2026 07:56 PM IST
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सार
भागलपुर के कैम्प जेल में एक मार्मिक घटना सामने आई, जहां एनडीपीएस मामले में एक साल से बंद दो सगे भाइयों की मां का निधन हो गया। मां की अंतिम इच्छा थी कि वे अपने बेटों से आखिरी बार मिल सकें।
मौके पर मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साल भर पहले एनडीपीएस मामले में गिरफ्तार दो सगे भाई सलाखों के पीछे बंद हैं। शनिवार दोपहर उन पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब उन्हें पता चला कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं रहीं। मां की अंतिम इच्छा थी कि वे अपने बेटों से आखिरी बार मिल सकें। इसी कारण परिजन मां की अर्थी लेकर जेल गेट तक पहुंच गए।
जेल गेट पर अंतिम दर्शन के लिए परिजनों की गुहार
यह मामला भागलपुर जिला के कैम्प जेल का है। बबरगंज थाना क्षेत्र के शिवलोक कॉलोनी, मोहद्दीनगर निवासी पुरुषोत्तम और रवि कुमार की मां का निधन हो गया। दोनों बेटे पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। मौत के बाद जब बेटों को अंतिम दर्शन की अनुमति के लिए प्रयास किया गया, तो बताया गया कि कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार अगली सुबह तक इंतजार करना होगा। इस बीच परिजनों ने मृतका की अर्थी उठाई और जेल गेट पर रख दी। उन्होंने जेल प्रशासन से मिन्नत की कि बेटों को मां का अंतिम दर्शन करने दिया जाए।
घंटों इंतजार, फिर शुरू हुआ हंगामा
काफी देर तक इंतजार के बाद भी अनुमति नहीं मिली। बार-बार अगली सुबह का हवाला दिया जाता रहा। इससे आक्रोशित परिजनों ने जेल गेट पर हंगामा शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। परिजनों का कहना था कि मां अपने बेटों से अंतिम मुलाकात का इंतजार करती रहीं और अब उनकी अर्थी को भी जेल गेट पर इंतजार करना पड़ रहा है।
आखिरकार मिली अनुमति
काफी आग्रह और विरोध के बाद प्रशासन का रुख बदला। अंत में बेटों को मां के अंतिम दर्शन की अनुमति दी गई और अर्थी को जेल गेट के भीतर ले जाने दिया गया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर मां की अर्थी को बेटों के अंतिम दर्शन के लिए घंटों इंतजार क्यों करना पड़ा। परिजनों ने पूरे मामले पर अपनी पीड़ा जाहिर की और व्यवस्था पर सवाल उठाए।
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जेल गेट पर अंतिम दर्शन के लिए परिजनों की गुहार
यह मामला भागलपुर जिला के कैम्प जेल का है। बबरगंज थाना क्षेत्र के शिवलोक कॉलोनी, मोहद्दीनगर निवासी पुरुषोत्तम और रवि कुमार की मां का निधन हो गया। दोनों बेटे पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। मौत के बाद जब बेटों को अंतिम दर्शन की अनुमति के लिए प्रयास किया गया, तो बताया गया कि कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार अगली सुबह तक इंतजार करना होगा। इस बीच परिजनों ने मृतका की अर्थी उठाई और जेल गेट पर रख दी। उन्होंने जेल प्रशासन से मिन्नत की कि बेटों को मां का अंतिम दर्शन करने दिया जाए।
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घंटों इंतजार, फिर शुरू हुआ हंगामा
काफी देर तक इंतजार के बाद भी अनुमति नहीं मिली। बार-बार अगली सुबह का हवाला दिया जाता रहा। इससे आक्रोशित परिजनों ने जेल गेट पर हंगामा शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। परिजनों का कहना था कि मां अपने बेटों से अंतिम मुलाकात का इंतजार करती रहीं और अब उनकी अर्थी को भी जेल गेट पर इंतजार करना पड़ रहा है।
आखिरकार मिली अनुमति
काफी आग्रह और विरोध के बाद प्रशासन का रुख बदला। अंत में बेटों को मां के अंतिम दर्शन की अनुमति दी गई और अर्थी को जेल गेट के भीतर ले जाने दिया गया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर मां की अर्थी को बेटों के अंतिम दर्शन के लिए घंटों इंतजार क्यों करना पड़ा। परिजनों ने पूरे मामले पर अपनी पीड़ा जाहिर की और व्यवस्था पर सवाल उठाए।