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Bihar: रेल मंडल में घूसकांड पर बड़ी कार्रवाई, 50 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए APO अरुण मंडल सस्पेंड
Mon, 27 Jul 2026 02:24 PM IST
दरभंगा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
Published by: दरभंगा ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 02:24 PM IST
सार
समस्तीपुर रेल मंडल में चर्चित रिश्वतखोरी मामले में रेलवे प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक कार्मिक पदाधिकारी (APO) अरुण मंडल को निलंबित कर दिया है। सीबीआई ने उन्हें एमएसीपी (MACP) का लाभ दिलाने और सेवा अभिलेख में सुधार करने के नाम पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
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सहायक कार्मिक पदाधिकारी अरुण मंडल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
समस्तीपुर रेल मंडल में सामने आए चर्चित रिश्वतकांड में रेलवे प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते सीबीआई के हत्थे चढ़े सहायक कार्मिक पदाधिकारी (APO) अरुण मंडल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। गिरफ्तारी के बाद उनके सरकारी आवास से एक देशी पिस्टल, दो मैगजीन और नौ जिंदा कारतूस बरामद होने से मामला और गंभीर हो गया है। सीबीआई के पुलिस निरीक्षक सुनील कुमार सिंह कुशवाहा के आवेदन पर नगर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत अलग प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी। अब रेलवे ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी है।
MACP का लाभ दिलाने के बदले मांगी थी रिश्वत
समस्तीपुर रेल मंडल के कार्मिक विभाग में तैनात एपीओ अरुण मंडल पर आरोप है कि उन्होंने डील क्लर्क अमृत राज की एमएसीपी (MACP) से संबंधित फाइल का निस्तारण करने, सेवा अभिलेख में आवश्यक सुधार कराने और वित्तीय लाभ दिलाने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। पीड़ित रेलकर्मी ने करीब 45 दिन पहले इसकी शिकायत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से की थी। शिकायत का सत्यापन करने के बाद सीबीआई ने 23 जुलाई को समस्तीपुर रेल मंडल कार्यालय में ट्रैप बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने 50 हजार रुपये की अग्रिम रिश्वत की राशि सौंपी, टीम ने अरुण मंडल को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से पूरे रेल मंडल कार्यालय में हड़कंप मच गया।
कार्यालय से गिरफ्तारी, फिर सरकारी बंगले पर छापा
कार्यालय से गिरफ्तारी के बाद सीबीआई टीम ने अरुण मंडल के सरकारी आवास की तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक देशी पिस्टल, दो मैगजीन और नौ जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके बाद मामला सिर्फ भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अवैध हथियार रखने के आरोप भी जुड़ गए।
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अवैध हथियार मिलने पर सीबीआई ने नगर थाना में दर्ज कराई प्राथमिकी
सीबीआई के पुलिस निरीक्षक सुनील कुमार सिंह कुशवाहा के लिखित आवेदन पर समस्तीपुर नगर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज की गई। बरामद हथियारों के संबंध में भी जांच जारी है।
ये भी पढ़ें - तेज प्रताप यादव ने जेलकर्मियों को कैसे नाच नचाया? तेजस्वी यादव ने रिहाई पर दे रखा है अल्टीमेटम
रेलवे ने तत्काल निलंबित किया
सीबीआई की कार्रवाई के चार दिन बाद पूर्व मध्य रेलवे प्रशासन ने अरुण मंडल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। रेलवे सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद सेवा नियमों के तहत अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सेवानिवृत्ति से पांच महीने पहले लगा बड़ा दाग
रेलवे सूत्रों के अनुसार, अरुण मंडल करीब पांच महीने बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन नौकरी के अंतिम चरण में रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तारी, सरकारी आवास से हथियारों की बरामदगी और निलंबन ने उनके तीन दशक से अधिक लंबे सेवा जीवन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय जांच का असर उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर भी पड़ सकता है।
सीबीआई की जांच जारी, कई बिंदुओं पर फोकस
सीबीआई अब यह भी जांच कर रही है कि रिश्वतखोरी का यह मामला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या नहीं। इसके अलावा बरामद हथियारों के स्रोत, उनकी वैधता और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।
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MACP का लाभ दिलाने के बदले मांगी थी रिश्वत
समस्तीपुर रेल मंडल के कार्मिक विभाग में तैनात एपीओ अरुण मंडल पर आरोप है कि उन्होंने डील क्लर्क अमृत राज की एमएसीपी (MACP) से संबंधित फाइल का निस्तारण करने, सेवा अभिलेख में आवश्यक सुधार कराने और वित्तीय लाभ दिलाने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। पीड़ित रेलकर्मी ने करीब 45 दिन पहले इसकी शिकायत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से की थी। शिकायत का सत्यापन करने के बाद सीबीआई ने 23 जुलाई को समस्तीपुर रेल मंडल कार्यालय में ट्रैप बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने 50 हजार रुपये की अग्रिम रिश्वत की राशि सौंपी, टीम ने अरुण मंडल को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से पूरे रेल मंडल कार्यालय में हड़कंप मच गया।
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कार्यालय से गिरफ्तारी, फिर सरकारी बंगले पर छापा
कार्यालय से गिरफ्तारी के बाद सीबीआई टीम ने अरुण मंडल के सरकारी आवास की तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक देशी पिस्टल, दो मैगजीन और नौ जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके बाद मामला सिर्फ भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अवैध हथियार रखने के आरोप भी जुड़ गए।
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अवैध हथियार मिलने पर सीबीआई ने नगर थाना में दर्ज कराई प्राथमिकी
सीबीआई के पुलिस निरीक्षक सुनील कुमार सिंह कुशवाहा के लिखित आवेदन पर समस्तीपुर नगर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज की गई। बरामद हथियारों के संबंध में भी जांच जारी है।
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रेलवे ने तत्काल निलंबित किया
सीबीआई की कार्रवाई के चार दिन बाद पूर्व मध्य रेलवे प्रशासन ने अरुण मंडल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। रेलवे सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद सेवा नियमों के तहत अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सेवानिवृत्ति से पांच महीने पहले लगा बड़ा दाग
रेलवे सूत्रों के अनुसार, अरुण मंडल करीब पांच महीने बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन नौकरी के अंतिम चरण में रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तारी, सरकारी आवास से हथियारों की बरामदगी और निलंबन ने उनके तीन दशक से अधिक लंबे सेवा जीवन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय जांच का असर उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर भी पड़ सकता है।
सीबीआई की जांच जारी, कई बिंदुओं पर फोकस
सीबीआई अब यह भी जांच कर रही है कि रिश्वतखोरी का यह मामला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या नहीं। इसके अलावा बरामद हथियारों के स्रोत, उनकी वैधता और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।