Bihar News: पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति को 7 साल की सजा, आर्म्स एक्ट केस में बड़ा फैसला
बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री और चेरियाबरियारपुर की पूर्व विधायक मंजू वर्मा तथा उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को वर्ष 2018 के चर्चित आर्म्स एक्ट मामले में बेगूसराय की एमपी/एमएलए कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार की पूर्व समाज कल्याण मंत्री और चेरियाबरियारपुर की पूर्व विधायक मंजू वर्मा तथा उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को वर्ष 2018 के चर्चित आर्म्स एक्ट मामले में बेगूसराय की एमपी/एमएलए कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर जुर्माना भी लगाया है। फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में लेकर मंडल कारा, बेगूसराय भेज दिया गया।
एमपी/एमएलए कोर्ट ने सुनाया फैसला
एडीजे-2 सह एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सिंह ने चेरियाबरियारपुर थाना कांड संख्या 143/2018 से जुड़े इस मामले में फैसला सुनाया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा को आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं में दोषी माना। फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों को अदालत से ही न्यायिक हिरासत में लेकर मंडल कारा भेज दिया गया।
आर्म्स एक्ट की धाराओं में मिली सजा और जुर्माना
अपर लोक अभियोजक राम प्रकाश यादव ने बताया कि अदालत ने दोनों को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-ए) सहपठित धारा 35 के तहत सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 26(1-ए) के तहत पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 40-40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत के आदेश के अनुसार दोनों सजाएं नियमानुसार लागू होंगी।
2018 में सीबीआई की छापेमारी में बरामद हुए थे कारतूस
यह मामला वर्ष 2018 के चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच के दौरान सामने आया था। मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में नाम सामने आने के बाद 17 अगस्त 2018 को सीबीआई ने बेगूसराय जिले के श्रीपुर अर्जुन टोला स्थित मंजू वर्मा के आवास पर छापेमारी की थी।
छापेमारी के दौरान घर के एक बंद कमरे में रखे बॉक्स से कुल 50 अवैध कारतूस बरामद किए गए थे। इनमें .323 बोर के 18 कारतूस, 8 एमएम बोर के 10 कारतूस, 7.62 बोर के 19 कारतूस और .303 बोर के 6 कारतूस शामिल थे।
इसके बाद सीबीआई के तत्कालीन अधिकारी ने चेरियाबरियारपुर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
सीबीआई अधिकारियों समेत सात गवाहों की हुई गवाही
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
इनमें मामले के सूचक और सीबीआई के तत्कालीन डीएसपी उमेश कुमार (धनबाद कार्यालय) सहित छापेमारी दल के अन्य अधिकारियों ने अदालत में पेश होकर हथियार और कारतूस बरामदगी से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की।
बालिका गृह कांड की जांच के दौरान सामने आया था मामला
लोक अभियोजक संतोष कुमार ने बताया कि वर्ष 2018 में मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। उस समय मंजू वर्मा जनता दल (यूनाइटेड) की विधायक थीं और बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री का पद संभाल रही थीं। जांच के दौरान सीबीआई ने बेगूसराय जिले के खांजहापुर गांव स्थित उनके पैतृक आवास पर भी छापेमारी की थी। एजेंसी ने दावा किया था कि वहां से थ्री-नॉट-थ्री रायफल समेत अन्य हथियार और कारतूस बरामद हुए थे। इसके बाद सीबीआई की शिकायत पर चेरियाबरियारपुर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
बचाव पक्ष ने रखे तर्क, अदालत ने दोषी ठहराया
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई कानूनी तर्क अदालत के समक्ष रखे, लेकिन अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपितों को दोषी करार दिया।
अदालत परिसर में रही कड़ी सुरक्षा
फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पूर्व मंत्री के पुत्र और चेरियाबरियारपुर से जदयू विधायक अभिषेक कुमार भी अपने समर्थकों के साथ अदालत परिसर में मौजूद रहे।
आठ साल पुराने मामले में आया अहम फैसला
करीब आठ वर्ष पुराने इस चर्चित आर्म्स एक्ट मामले में आया यह फैसला बेगूसराय की न्यायिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के निर्णय के साथ इस बहुचर्चित मामले में कानूनी प्रक्रिया का एक अहम चरण पूरा हो गया।