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Bihar News: राजद नेता के बिगड़े बोल, हनुमान जी और ब्राह्मण समाज पर सतीश दास की टिप्पणी से बवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,जहानाबाद
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Apr 2026 08:13 PM IST
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सार
जहानाबाद में राजद के पूर्व विधायक सतीश दास ने एक सार्वजनिक मंच से ब्राह्मण समाज और भगवान हनुमान के खिलाफ बेहद अमर्यादित और विवादास्पद टिप्पणी की है, जिससे सामाजिक और धार्मिक तनाव पैदा हो गया है। तर्क की आड़ में दी गई इस बयानबाजी से लोगों में भारी आक्रोश है।
Bihar news Jehanabadराजद के पूर्व विधायक की बिगड़ी बोल ने मचाई हलचल एक जाति विशेष पर किया हमला
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विस्तार
बिहार के जहानाबाद की राजनीतिक फिजाओं में एक बार फिर कड़वाहट घुल गई है। राजद के वरिष्ठ नेता और मखदुमपुर के पूर्व विधायक सतीश दास ने एक बार फिर ऐसा विवादास्पद बयान दिया है, जिससे एक जाति विशेष और आस्थावानों में भारी आक्रोश है। अक्सर अपने बयानों के कारण विवादों में रहने वाले सतीश दास ने इस बार धार्मिक और सामाजिक मर्यादाओं की सीमा लांघ दी है।
मंच से खोई मर्यादा, आस्था पर पहुंचाई चोट
पूरा मामला काको प्रखंड के घटकन गांव का है, जहां बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति अनावरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सतीश दास वहां मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे थे। लेकिन महापुरुष के सम्मान में रखे गए इस मंच का इस्तेमाल उन्होंने धार्मिक विद्वेष फैलाने के लिए किया। अपने संबोधन में उन्होंने तर्क और विज्ञान का हवाला देते हुए सीधे तौर पर ब्राह्मण समाज और भगवान हनुमान को निशाने पर लिया।
अंगूठा छाप पंडित की बात मानते हैं लोग- सतीश दास
सतीश दास ने लोगों की समझ पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाज एक पढ़े-लिखे नेता की बात को अनसुना कर देता है, लेकिन एक 'अंगूठा छाप' पंडित की उन बातों को आसानी से मान लेता है जो गले से नीचे नहीं उतरतीं। उन्होंने सात सूर्यों और हनुमान जी से जुड़ी पौराणिक कथाओं का मजाक उड़ाते हुए बेहद अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में काफी नाराजगी है।
ब्राह्मणों को लेकर गढ़ी नई परिभाषा
पूर्व विधायक यहीं नहीं रुके, उन्होंने ब्राह्मण समाज को लेकर एक नई और विवादास्पद परिभाषा पेश की। उन्होंने मंच से कहा, "जो व्यक्ति सामने वाले के दिमाग को सुन्न कर दे, वही ब्राह्मण है।" उन्होंने आरोप लगाया कि पंडितों की बातों पर लोग बिना दिमाग लगाए भरोसा कर लेते हैं, जबकि अपने जनप्रतिनिधियों की बातों पर शक करते हैं। उनके इस बयान को सामाजिक समरसता के लिए खतरा माना जा रहा है।
पुराना है विवादों से नाता
सतीश दास के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी उन्होंने भगवान शंकर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिसकी पूरे बिहार में कड़ी आलोचना हुई थी। जानकारों का मानना है कि उनकी इसी 'जुबानी जंग' के कारण पिछले विधानसभा चुनाव में जनता ने उनका कड़ा विरोध किया था और राजद ने भी उनकी छवि को देखते हुए उनका टिकट काट दिया था। बावजूद इसके, पूर्व विधायक अपनी कार्यशैली बदलने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।
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मंच से खोई मर्यादा, आस्था पर पहुंचाई चोट
पूरा मामला काको प्रखंड के घटकन गांव का है, जहां बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति अनावरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सतीश दास वहां मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे थे। लेकिन महापुरुष के सम्मान में रखे गए इस मंच का इस्तेमाल उन्होंने धार्मिक विद्वेष फैलाने के लिए किया। अपने संबोधन में उन्होंने तर्क और विज्ञान का हवाला देते हुए सीधे तौर पर ब्राह्मण समाज और भगवान हनुमान को निशाने पर लिया।
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अंगूठा छाप पंडित की बात मानते हैं लोग- सतीश दास
सतीश दास ने लोगों की समझ पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाज एक पढ़े-लिखे नेता की बात को अनसुना कर देता है, लेकिन एक 'अंगूठा छाप' पंडित की उन बातों को आसानी से मान लेता है जो गले से नीचे नहीं उतरतीं। उन्होंने सात सूर्यों और हनुमान जी से जुड़ी पौराणिक कथाओं का मजाक उड़ाते हुए बेहद अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में काफी नाराजगी है।
ब्राह्मणों को लेकर गढ़ी नई परिभाषा
पूर्व विधायक यहीं नहीं रुके, उन्होंने ब्राह्मण समाज को लेकर एक नई और विवादास्पद परिभाषा पेश की। उन्होंने मंच से कहा, "जो व्यक्ति सामने वाले के दिमाग को सुन्न कर दे, वही ब्राह्मण है।" उन्होंने आरोप लगाया कि पंडितों की बातों पर लोग बिना दिमाग लगाए भरोसा कर लेते हैं, जबकि अपने जनप्रतिनिधियों की बातों पर शक करते हैं। उनके इस बयान को सामाजिक समरसता के लिए खतरा माना जा रहा है।
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पुराना है विवादों से नाता
सतीश दास के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी उन्होंने भगवान शंकर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिसकी पूरे बिहार में कड़ी आलोचना हुई थी। जानकारों का मानना है कि उनकी इसी 'जुबानी जंग' के कारण पिछले विधानसभा चुनाव में जनता ने उनका कड़ा विरोध किया था और राजद ने भी उनकी छवि को देखते हुए उनका टिकट काट दिया था। बावजूद इसके, पूर्व विधायक अपनी कार्यशैली बदलने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।

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