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Bihar: ब्राह्मणी घाट से निकला चमकता सितारा: शुभम ने JEE में रचा इतिहास, मेहनत के दम पर बजाया जीत का डंका

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 01 Jun 2026 03:02 PM IST
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सार

Bihar: गया के ब्राह्मणी घाट निवासी शुभम कुमार ने जेईई मेन में 100 साल और जेईई एडवांस 2026 में शानदार प्रदर्शन कर बिहार का नाम रोशन किया है। हार्डवेयर दुकानदार के बेटे शुभम ने कोटा में दो वर्षों तक कठिन मेहनत और अनुशासित तैयारी के दम पर यह उपलब्धि हासिल की। 

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अपनी मां के साथ जेईई-मेन 2026 टाॅपर शुभम कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गयाजी के ब्राह्मणी घाट की गलियों से निकलकर एक युवा ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिस पर पूरा बिहार गर्व कर रहा है। साधारण परिवार में जन्मे शुभम कुमार ने जेईई मेन में 100 पर्सेंटाइल हासिल करने के बाद जेईई एडवांस्ड 2026 में शानदार प्रदर्शन कर देशभर में अपनी पहचान बनाई है। हार्डवेयर दुकानदार के बेटे की यह सफलता केवल एक परीक्षा में मिले अंकों की कहानी नहीं, बल्कि सपनों, संघर्ष, परिवार के त्याग और अथक मेहनत की प्रेरणादायक दास्तान है।



छोटे शहर से शुरू हुआ बड़ा सपना
गया जिले के ब्राह्मणी घाट निवासी शुभम कुमार बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गया के एक निजी विद्यालय में हुई। दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इंजीनियर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था। उसी दिन से उन्होंने अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। आज जब देशभर के लाखों छात्र JEE जैसी कठिन परीक्षा में सफलता का सपना देखते हैं, तब गया के इस छात्र ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी मंजिल बड़ी नहीं होती।
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दो साल की तपस्या ने दिलाई बड़ी सफलता
शुभम पिछले दो वर्षों से राजस्थान के कोटा में रहकर तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। प्रतिदिन 10 से 12 घंटे पढ़ाई उनकी दिनचर्या का हिस्सा थी, जबकि कई बार परीक्षा नजदीक आने पर 14 घंटे तक पढ़ाई करनी पड़ती थी। कठिन विषयों को समझने के लिए उन्होंने लगातार अभ्यास किया और शिक्षकों से मार्गदर्शन लिया। उनका मानना है कि नियमितता और अनुशासन ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
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माता-पिता के त्याग ने बनाया कामयाब
शुभम के पिता शिव कुमार गया के रमना रोड में हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां कंचन देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। शुभम कहते हैं कि उनकी सफलता के असली हकदार उनके माता-पिता हैं। उन्होंने हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कोटा जाने के दौरान परिवार को कुछ आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन माता-पिता ने कभी उन परेशानियों का असर उनकी पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया।

रिजल्ट आते ही खुशी से झूम उठा मोहल्ला
जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, ब्राह्मणी घाट मोहल्ले में खुशी की लहर दौड़ गई। शुभम के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। रिश्तेदार, पड़ोसी, शिक्षक और सामाजिक संगठनों के लोग उनके घर पहुंचकर परिवार को शुभकामनाएं देने लगे। लोगों ने मिठाइयां बांटी और इस सफलता को पूरे मोहल्ले की उपलब्धि बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुभम ने गया का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया है।

ये भी पढ़ें: 100 पर्सेंटाइल के बाद अब JEE Advanced में AIR-1; बिहार से निकला देश का सबसे तेज दिमाग

बिहार के युवाओं के लिए बने मिसाल
शुभम की सफलता उन हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो छोटे शहरों और सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी महानगर या महंगे संस्थान की मोहताज नहीं होती। कड़ी मेहनत, अनुशासन, परिवार का सहयोग और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो कोई भी छात्र अपनी मंजिल हासिल कर सकता है। गया के शुभम कुमार आज केवल एक सफल छात्र नहीं, बल्कि बिहार के युवाओं के लिए संघर्ष और सफलता का नया प्रतीक बन चुके हैं।

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