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Bihar: गयाजी का ‘मौत वाला पुल’! सरिया बाहर, पिलर जर्जर; IIT रिपोर्ट से दहशत में लोग, कभी भी हो सकता है हादसा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 22 May 2026 04:57 PM IST
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सार

Bihar: गया जिले की फल्गु नदी पर बना केनी पुल अब लोगों के लिए खतरे का कारण बन गया है। आईआईटी जांच रिपोर्ट में पुल के तीन पिलरों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त बताया गया है। बावजूद इसके रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजर रहे हैं। 

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जर्जर पुल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गयाजी जिले में फल्गु नदी पर बना केनी पुल अब लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि डर का दूसरा नाम बन चुका है। आईआईटी जांच टीम की रिपोर्ट में पुल के तीन पिलरों को जर्जर बताए जाने के बाद इलाके में भय का माहौल है। हालत यह है कि हर दिन हजारों लोग जान जोखिम में डालकर इस पुल से गुजरने को मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन अब तक सिर्फ जांच और नापी तक सीमित नजर आ रहा है।

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क्षतिग्रस्त पुल - फोटो : अमर उजाला


सरिया बाहर, सीमेंट गायब… पुल की हालत देख सहमे लोग
दरियापुर-गोला रोड स्थित यह पुल गया को पटना, राजगीर और नालंदा से जोड़ने वाला अहम संपर्क मार्ग है। लेकिन अब यही पुल खतरे की पहचान बनता जा रहा है। आईआईटी टीम की जांच में सामने आया है कि 18 पिलरों पर खड़े इस पुल के तीन पिलर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कई जगहों पर पिलरों से सरिया बाहर झांक रहा है, जबकि सीमेंट पूरी तरह टूटकर गिर चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर भारी वाहन गुजरते ही कंपन महसूस होता है। लोगों को हर पल डर बना रहता है कि कहीं पुल का कोई हिस्सा अचानक ध्वस्त न हो जाए।

हर दिन हजारों लोगों की जान दांव पर
यह पुल अतरी और बेलागंज विधानसभा क्षेत्र के बीच सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इसी रास्ते से रोजाना स्कूल बसें, यात्री वाहन, ट्रक और मालवाहक गाड़ियां गुजरती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जांच टीम ने पहले ही भारी वाहनों की आवाजाही रोकने की सलाह दी थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। लोगों का आरोप है कि पुल के दोनों छोर पर बैरियर लगाने की तैयारी भी हुई, नापी भी की गई, लेकिन व्यवस्था आज तक लागू नहीं हो सकी। ऐसे में रोज भारी वाहन पुल की जर्जर संरचना पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

तीन पुलों पर मंडरा रहा खतरा
आईआईटी जांच टीम ने गया जिले के तीन पुलों को खतरनाक श्रेणी में रखा है। इनमें बोधगया क्षेत्र का बसतपुर-सिलौंजा पुल, अतरी का केनी पुल और बेलागंज क्षेत्र में राज बिगहा से बेलदार बिगहा जाने वाला पुल शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। विक्रमशिला पुल हादसे के बाद बिहार सरकार ने राज्यभर के पुलों की जांच शुरू करवाई थी, लेकिन गया से सामने आई यह रिपोर्ट निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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जर्जर हाल में पहुंचा पुल - फोटो : अमर उजाला


'तीन पिलर डैमेज हैं, कभी भी हो सकता है हादसा'
फल्गु नदी पर बने केनी पुल के बारे में स्थानीय निवासी सुनील कुमार ने बताया कि करीब 10-15 दिन पहले अधिकारियों की टीम मशीन लेकर पुल की जांच करने पहुंची थी। जांच में पुल के तीन पिलरों को डैमेज बताया गया। टीम ने कहा था कि पुल पर बड़े वाहनों की आवाजाही रोकी जाएगी और लोहे का बैरियर लगाया जाएगा। ग्रामीण ने बताया कि चार दिन पहले भी अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और पुल के नीचे सफाई कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। इससे लोगों में डर बना हुआ है कि कहीं अचानक कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

लोगों की मांग- पहले सुरक्षा, फिर राजनीति
स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों ने सरकार से तत्काल पुल की मरम्मत, भारी वाहनों पर रोक और वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे के बाद प्रशासन के पास जवाब देने के लिए कुछ नहीं बचेगा।

ठेकेदार और इंजीनियर खा जाते हैं पैसा
सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर पुल बनाती है, लेकिन कुछ ठेकेदार और इंजीनियर निर्माण में गड़बड़ी कर पैसा खा जाते हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यह पुल करीब सात साल पहले बना था और इसी रास्ते से पनारी, गाजीपुर, श्रीपुर, धर्मपुर, ननकू बीघा और फतेहपुर समेत कई गांवों के लोग रोजाना आवागमन करते हैं।

पुल का पाया खत्म, फिर भी दौड़ रहे बड़े वाहन
जफरा गांव निवासी कंचन ठाकुर ने केनी पुल की हालत पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि पुल के तीन पिलर पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों और इंजीनियरों ने भी माना था कि पुल पर बड़े वाहनों का परिचालन खतरनाक है।

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पुल के नीचे की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

गांव के लोगों में है डर
कंचन ठाकुर के मुताबिक, भारी वाहनों को रोकने के लिए पुल पर बैरियर लगाने की बात कही गई थी और इसकी नापी भी कराई गई थी। पुल के नीचे बालू की सफाई भी कराई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालत यह है कि रोक के बावजूद रोजाना ट्रक और बड़े वाहन पुल से गुजर रहे हैं। गांव के लोगों में हमेशा डर बना रहता है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि या तो पुल की जल्द मरम्मत कराई जाए या फिर नया पुल बनवाया जाए, ताकि लोगों की जान सुरक्षित रह सके।

उद्घाटन से पहले ही जर्जर हो गया पुल
स्थानीय ग्रामीण पिंकू कुमार ने बताया कि बेनीपुर का यह पुल करीब छह साल पहले बनकर तैयार हुआ था, लेकिन आज तक इसका आधिकारिक उद्घाटन नहीं हुआ। पुल बनते ही लोगों ने आवागमन शुरू कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नदी से लगातार बालू उठाव होने के कारण पुल के तीन पिलर डैमेज हो गए हैं।

'अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई'
पिंकू कुमार के अनुसार, जांच टीम आने के बाद ही ग्रामीणों को पुल की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिली। टीम जांच कर लौट गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस पुल पर दिन-रात बड़े-बड़े ट्रक गुजरते हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण ने बताया कि यह पुल बेलागंज, टेकारी और खिजरसराय क्षेत्र को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। जीटी रोड तक पहुंचने के लिए लोग इसी रास्ते को सबसे छोटा और आसान मार्ग मानते हैं।

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