Bihar: ‘सर, 15 हजार रुपए ही था’... सिविल सर्जन का VIDEO वायरल, लिफाफे और लाइसेंस की बातचीत से हड़कंप
मधेपुरा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। वीडियो में दो युवक एक निजी नर्सिंग होम के कार्यालय में सिविल सर्जन से बातचीत करते और लिफाफे में रखी कथित नगदी देते नजर आ रहे हैं।
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बिहार के मधेपुरा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हलचल मच गई है। वायरल वीडियो में सिविल सर्जन एक निजी नर्सिंग होम के कार्यालय में दो युवकों से बातचीत करते और लिफाफे में रखी नगदी लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में बातचीत के दौरान निजी नर्सिंग होम के परमानेंट लाइसेंस के लिए कथित तौर पर रुपये देने की बात भी सामने आती है। हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मधेपुरा के डीएम ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। वहीं, सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने पूरे वीडियो और आरोपों को भ्रामक, तथ्यहीन और निराधार बताते हुए इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश करार दिया है।
वायरल वीडियो में लिफाफे में रुपये देने का दावा
वायरल वीडियो में दो युवक एक निजी नर्सिंग होम के कार्यालय में बैठे सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार के पास पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। दोनों में से एक युवक लिफाफा टेबल पर रखकर सिविल सर्जन से बातचीत करता है। इसी दौरान रुपये को लेकर बातचीत होती सुनाई देती है। वीडियो में सिविल सर्जन युवक से पूछते हैं, “कै गो है?” इस पर युवक जवाब देता है, “कम नहीं है सर।”
इसके बाद दूसरा युवक पहले युवक से कथित तौर पर कहता है कि “परमानेंट लाइसेंस के लिए सर 5 बोल रहे हैं, 2 में काम नहीं चलेगा क्या?” इस पर युवक सिविल सर्जन से कहता है कि “सर, ध्यान देंगे तो सब हो जाएगा।” सिविल सर्जन की ओर से जवाब आता है, “तोरे कहने सब हो जाएगा।” इसके बाद युवक फिर अनुरोध करता है कि थोड़ा ध्यान देने से काम हो जाएगा। इस पर सिविल सर्जन कथित तौर पर कहते हैं, “नहीं होगा।”
लिफाफा लौटाने की कोशिश करते दिखे सिविल सर्जन
वीडियो में इसके बाद सिविल सर्जन लिफाफा हाथ में लेते हैं और अपनी कुर्सी से उठकर उसे वापस करने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। इसी दौरान युवक उनसे कथित तौर पर कहता है, “सर, पांच नहीं है, ज्यादा है। आप रखिए न। हम आएंगे तो सब हो जाएगा। मात्र दो पेशेंट है। आपसे कुछ छुपा नहीं है।” युवक के लगातार अनुरोध के बाद सिविल सर्जन दोबारा अपनी कुर्सी पर बैठ जाते हैं। इसके बाद दोनों युवक वहां से बाहर निकलते दिखाई देते हैं।
दोबारा पहुंचे युवक, पीले लिफाफे में रुपये देने का दावा
वीडियो के अगले हिस्से में कुछ देर बाद दोनों युवक दोबारा कार्यालय में पहुंचते दिखाई देते हैं। इस बार एक युवक पीले रंग के लिफाफे में कुछ रुपये लेकर आता है और सिविल सर्जन को देता है। वायरल वीडियो में सिविल सर्जन दोनों लिफाफे लेकर उठते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद उनकी ओर से कथित तौर पर कुछ और राशि की मांग किए जाने की बात सामने आती है। इस पर युवक जवाब देता है, “सर, 15 हजार रुपए ही था। कार वाले से लाकर दिए हैं।”
वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम और बातचीत को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया, उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं और बातचीत का वास्तविक संदर्भ क्या है, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
DM ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई
वायरल वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। मधेपुरा के डीएम ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को जांच समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं जिला गोपनीय शाखा के प्रभारी पदाधिकारी और जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी को समिति का सदस्य बनाया गया है। जांच समिति को वायरल वीडियो में सामने आए तथ्यों और आरोपों की गहनता से जांच करने तथा जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
सिविल सर्जन बोले- साजिश के तहत बनाया गया मनगढ़ंत वीडियो
वहीं, मधेपुरा के सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने वायरल वीडियो और उसमें लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने वीडियो को भ्रामक, तथ्यहीन और निराधार बताया। सिविल सर्जन का कहना है कि उनके खिलाफ साजिश के तहत यह मनगढ़ंत वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा उनकी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से किया गया है। फिलहाल प्रशासनिक जांच शुरू हो चुकी है। अब जांच समिति वायरल वीडियो, उसमें हुई बातचीत और सामने आए आरोपों की पड़ताल करेगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है।