अवैध लॉटरी नेटवर्क का पर्दाफाश: भाजपा नेता समेत दो लोग गिरफ्तार; टिकट सिक्किम या नागालैंड भेजने का खेल जानें
Supaul News: सुपौल में ऑपरेशन क्लीन के तहत पुलिस ने अवैध लॉटरी कारोबार का भंडाफोड़ कर पान दुकानदार और भाजपा नगर उपाध्यक्ष को गिरफ्तार किया। 1050 लॉटरी टिकट, नकद, मोबाइल और कार जब्त हुई। नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
विस्तार
सुपौल जिले में ऑपरेशन क्लीन अभियान के तहत सदर थाना पुलिस ने शहर में सक्रिय अवैध लॉटरी कारोबार का खुलासा करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने छापामारी के दौरान सिक्किम और नागालैंड की कुल 1050 लॉटरी टिकट बरामद की हैं, जो अवैध रूप से बेची जा रही थीं।
गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई
सदर थानाध्यक्ष रामसेवक रावत ने बताया कि सोमवार की शाम पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर में अवैध लॉटरी का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। सूचना के सत्यापन के लिए एक पुलिसकर्मी को सादे लिबास में पटेल चौक स्थित एक पान दुकान पर भेजा गया, जहां से पान दुकानदार विकास कुमार साहनी को अवैध लॉटरी टिकट के साथ गिरफ्तार किया गया।
निशानदेही पर भाजपा नेता की गिरफ्तारी
गिरफ्तार विकास कुमार साहनी की निशानदेही पर पुलिस ने शहर के वार्ड 26 से भाजपा नेता राजेश मंडल को भी गिरफ्तार किया। राजेश मंडल भाजपा नगर उपाध्यक्ष के पद पर था। इस कार्रवाई के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र ऋषिदेव ने कहा कि पार्टी को राजेश की अवैध गतिविधियों की जानकारी नहीं थी और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नकद, मोबाइल और कार सहित लॉटरी टिकट जब्त
छापामारी के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से 10,100 रुपये नकद, दो मोबाइल फोन, एक कार संख्या बीआर 11 एजेड 5604 और 05 रुपये मूल्य की कुल 1050 लॉटरी टिकट जब्त की। इनमें 400 टिकट सिक्किम और 650 टिकट नागालैंड की हैं। जब्त कार राजेश मंडल की बताई गई है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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जिले में फैले सप्लाई नेटवर्क की जांच
सूत्रों के अनुसार, जिला मुख्यालय में करीब एक दर्जन लोग लॉटरी टिकट के वेंडर के रूप में सक्रिय हैं। 05 रुपये की लॉटरी टिकट 30 से 40 रुपये में बेची जाती थी। बताया गया है कि खगड़िया निवासी सुरेश यादव जिले में लॉटरी टिकट का मुख्य सप्लायर है, जो राजेश मंडल सहित अन्य वेंडरों को टिकट उपलब्ध कराता था। लॉटरी निकलने पर भुगतान भी इसी चैनल से होता था।
सूत्रों के मुताबिक, लॉटरी का इनाम 15 हजार रुपये का होता था। विजेता का टिकट सिक्किम या नागालैंड भेजा जाता था और कई मामलों में इनाम की राशि यूपीआई के माध्यम से वेंडर या खुदरा विक्रेता के खाते में भेजी जाती थी। कमीशन काटकर शेष राशि विजेता को दी जाती थी। सदर थानाध्यक्ष ने बताया कि अवैध लॉटरी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में छापामारी जारी है।
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