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Bihar: रात में जिस युवक का हुआ संपीडन भोज, सुबह उसका शव गांव पहुंचा; नेपाल के अस्पताल पर परिजनों ने लगाया आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
Published by: कोसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 07:21 AM IST
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सार
Bihar: युवक की मौत बीते 05 जनवरी को इलाज के दौरान नेपाल के विराटनगर स्थित न्यूरो हॉस्पिटल में हो गई। लेकिन, बिना शव के ही घर लौटे परिजनों ने पुतला जला कर श्राद्ध-कर्म कर दिया। बाद में सामाजिक संगठनों के सहयोग से शनिवार को युवक का शव उसके गांव पहुंचा।
अंत्येष्टि के बाद विलाप करते मृतक के परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुपौल जिले के किसनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत श्रीपुर सुखासन वार्ड 06 निवासी एक युवक की नेपाल के विराटनगर स्थित न्यूरो हॉस्पिटल में बीते 05 जनवरी को इलाज के दौरान मौत हो गई। शुक्रवार को ही परिजनों ने उसका संपीडन भी कर दिया। लेकिन, शनिवार को मृतक का शव उसके गांव पहुंचा। जिसके बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। परिजन घर छोड़ कर कुछ देर के लिए गायब हो गए।
बाद में ग्रामीणों के हस्तक्षेप से शव का दाह संस्कार किया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हॉस्पिटल ने राशि बकाया रहने की वजह से शव को बंधक बना लिया। इस बीच परिजन बिना अंतिम संस्कार के ही क्रिया-कर्म में जुट गए। हालांकि, शनिवार को सामाजिक संगठनों की पहल पर शव मृतक के गांव पहुंचा। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को सिरे से नकारा है।
बताया जा रहा है कि श्रीपुर सुखासन वार्ड 06 निवासी विद्यानंद शर्मा के 25 वर्षीय पुत्र प्रमोद शर्मा बीते दिनों पंजाब में मजदूरी करने गया था। जहां तबियत बिगड़ने पर वह घर लौट गया। परिजनों द्वारा उसे इलाज के लिए विराटनगर स्थित न्यूरो हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने बताया कि प्रमोद को ब्रेन ट्यूमर है। मृतक की पत्नी किरण देवी ने बताया कि डॉक्टरों ने इलाज में करीब 04 लाख रुपए खर्च बताया था, जो जमा कर दिया गया।
प्रमोद को वहां 11 दिन भर्ती रखा गया। लेकिन, 05 जनवरी को ऑपरेशन के साथ ही उसका देहांत हो गया। इसके बाद न्यूरो हॉस्पिटल प्रबंधन ने पुन: 04 लाख रुपए की डिमांड की। लेकिन गरीबी के कारण परिवार यह रुपए जमा नहीं करा सका। वही हॉस्पिटल प्रबंधन ने रुपए जमा नहीं कराने पर शव देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद परिजन बिना शव के ही वापस गांव लौटे और क्रिया-कर्म में जुट गए। वही ग्रामीणों को भी इसकी जानकारी दी गई। अंतिम संस्कार पुतला दहन कर किया गया।
सामाजिक संगठनों के सहयोग से गांव पहुंचा शव
इधर, घटना की जानकारी अररिया के फारबिसगंज की सामाजिक संस्था लाइफ सेवियर फाउंडेशन के सदस्यों को मिली। जिसके बाद संगठन के मनीष कुमार व राहुल यादव ने कोशी रक्तवीर सेवा संगठन सिमराही के सदस्य गुड्डू जीजीआर व अरमान से संपर्क साधा। रक्तवीर सेवा संगठन के अध्यक्ष लोलप ठाकुर ने बताया कि इसके बाद सामूहिक सहयोग से शनिवार को मृतक का शव एंबुलेंस के माध्यम से गांव लाया गया। जहां प्रमोद की पत्नी किरण देवी ने शव को मुखाग्नि दी।
शव को बंधक बनाना गैरकानूनी, हमने शव पहुंचाने का खर्च भी उठाया
इधर, परिजनों के आरोपों के बाबत न्यूरो हॉस्पिटल विराटनगर के प्रशासक प्रमुख राजेश भट्टराई ने बताया कि परिजनों द्वारा प्रबंधन के इनकार के बावजूद परिजनों के आग्रह पर मरीज का उपचार शुरु किया गया था। वह 22 दिनों तक यहां भर्ती रहा। तीन लाख रुपए के बिल में से परिजनों ने महज 01 लाख रुपए जमा कराए गए थे। लेकिन, देहांत के उपरांत हमने उसे भी माफ कर दिया। लेकिन परिजन शव ले जाने को तैयार नहीं हुए। इसके उपरांत हमने स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों से भी संपर्क का प्रयास किया। बाद में फारबिसगंज की सामाजिक संगठन लाइफ सेवियर फाउंडेशन के सहयोग से मृतक के घर का पता लगाया गया और अस्पताल ने अपने खर्च पर ही शव को गांव तक पहुंचाया। राजेश के अनुसार, शव को बंधक बनाना पूरी तरह गैरकानूनी है और प्रबंधन ने किसी प्रकार के नियमों की अवहेलना नहीं की है। उल्टा, परिजनों को सहयोग किया है।
संबंधित विभाग को दी जाएगी जानकारी
इधर, भारत-नेपाल सामाजिक सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि नेपाल के अस्पताल में भारत के मरीज के साथ निश्चित तौर पर आर्थिक शोषण होता है। इसमें एंबुलेंस चालक से लेकर दवा दुकानदार तक शामिल होते हैं। जबकि नेपाल का स्वास्थ्य क्षेत्र भारत के मरीजों पर ही निर्भर है। इसको लेकर संबंधित विभाग को जानकारी दी जाएगी। साथ ही कार्रवाई के लिए अनुरोध किया जाएगा।
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बाद में ग्रामीणों के हस्तक्षेप से शव का दाह संस्कार किया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हॉस्पिटल ने राशि बकाया रहने की वजह से शव को बंधक बना लिया। इस बीच परिजन बिना अंतिम संस्कार के ही क्रिया-कर्म में जुट गए। हालांकि, शनिवार को सामाजिक संगठनों की पहल पर शव मृतक के गांव पहुंचा। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को सिरे से नकारा है।
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बताया जा रहा है कि श्रीपुर सुखासन वार्ड 06 निवासी विद्यानंद शर्मा के 25 वर्षीय पुत्र प्रमोद शर्मा बीते दिनों पंजाब में मजदूरी करने गया था। जहां तबियत बिगड़ने पर वह घर लौट गया। परिजनों द्वारा उसे इलाज के लिए विराटनगर स्थित न्यूरो हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने बताया कि प्रमोद को ब्रेन ट्यूमर है। मृतक की पत्नी किरण देवी ने बताया कि डॉक्टरों ने इलाज में करीब 04 लाख रुपए खर्च बताया था, जो जमा कर दिया गया।
प्रमोद को वहां 11 दिन भर्ती रखा गया। लेकिन, 05 जनवरी को ऑपरेशन के साथ ही उसका देहांत हो गया। इसके बाद न्यूरो हॉस्पिटल प्रबंधन ने पुन: 04 लाख रुपए की डिमांड की। लेकिन गरीबी के कारण परिवार यह रुपए जमा नहीं करा सका। वही हॉस्पिटल प्रबंधन ने रुपए जमा नहीं कराने पर शव देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद परिजन बिना शव के ही वापस गांव लौटे और क्रिया-कर्म में जुट गए। वही ग्रामीणों को भी इसकी जानकारी दी गई। अंतिम संस्कार पुतला दहन कर किया गया।
सामाजिक संगठनों के सहयोग से गांव पहुंचा शव
इधर, घटना की जानकारी अररिया के फारबिसगंज की सामाजिक संस्था लाइफ सेवियर फाउंडेशन के सदस्यों को मिली। जिसके बाद संगठन के मनीष कुमार व राहुल यादव ने कोशी रक्तवीर सेवा संगठन सिमराही के सदस्य गुड्डू जीजीआर व अरमान से संपर्क साधा। रक्तवीर सेवा संगठन के अध्यक्ष लोलप ठाकुर ने बताया कि इसके बाद सामूहिक सहयोग से शनिवार को मृतक का शव एंबुलेंस के माध्यम से गांव लाया गया। जहां प्रमोद की पत्नी किरण देवी ने शव को मुखाग्नि दी।
शव को बंधक बनाना गैरकानूनी, हमने शव पहुंचाने का खर्च भी उठाया
इधर, परिजनों के आरोपों के बाबत न्यूरो हॉस्पिटल विराटनगर के प्रशासक प्रमुख राजेश भट्टराई ने बताया कि परिजनों द्वारा प्रबंधन के इनकार के बावजूद परिजनों के आग्रह पर मरीज का उपचार शुरु किया गया था। वह 22 दिनों तक यहां भर्ती रहा। तीन लाख रुपए के बिल में से परिजनों ने महज 01 लाख रुपए जमा कराए गए थे। लेकिन, देहांत के उपरांत हमने उसे भी माफ कर दिया। लेकिन परिजन शव ले जाने को तैयार नहीं हुए। इसके उपरांत हमने स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों से भी संपर्क का प्रयास किया। बाद में फारबिसगंज की सामाजिक संगठन लाइफ सेवियर फाउंडेशन के सहयोग से मृतक के घर का पता लगाया गया और अस्पताल ने अपने खर्च पर ही शव को गांव तक पहुंचाया। राजेश के अनुसार, शव को बंधक बनाना पूरी तरह गैरकानूनी है और प्रबंधन ने किसी प्रकार के नियमों की अवहेलना नहीं की है। उल्टा, परिजनों को सहयोग किया है।
संबंधित विभाग को दी जाएगी जानकारी
इधर, भारत-नेपाल सामाजिक सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि नेपाल के अस्पताल में भारत के मरीज के साथ निश्चित तौर पर आर्थिक शोषण होता है। इसमें एंबुलेंस चालक से लेकर दवा दुकानदार तक शामिल होते हैं। जबकि नेपाल का स्वास्थ्य क्षेत्र भारत के मरीजों पर ही निर्भर है। इसको लेकर संबंधित विभाग को जानकारी दी जाएगी। साथ ही कार्रवाई के लिए अनुरोध किया जाएगा।