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Bihar News : 11 टाउनशिप में जमीन जाने का फायदा या नुकसान? 55 फीसदी किसके पास रह जाएगा? हर सवाल का जवाब

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Krishan Ballabh Narayan Updated Thu, 30 Apr 2026 04:55 PM IST
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सार

Bihar : पटना सहित पूरे बिहार में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बनने की घोषणा के साथ ही जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लग गई है। किसान और जमीन मालिक भी उहापोह की स्थिति में हैं। आम जनता के मन में कई सवाल हैं, जिसका जवाब 'अमर उजाला' आपको दे रहा है।

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सैटेलाइट टाउनशिप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार सरकार ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बनाने जा रही है। इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसको लेकर सरकार किसानों की जमीन का अधिग्रहण करने वाली है। अब किसानों, जमीन मालिकों और आम जनता में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। आम जनता और भू-मालिकों के मन में कई सवाल हैं। इन सवालों के जवाब 'अमर उजाला' नगर विकास एवं आवास विभाग के द्वारा आपके सामने ला रहा है।
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सवाल : बिहार सरकार की यह नई टाउनशिप योजना क्या है?
विभाग : बिहार सरकार ने राज्य में सुनियोजित शहरीकरण के लिए बिहार टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली, 2025 के तहत 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को  विकसित करने का निर्णय लिया है। ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में अव्यवस्थित प्लॉटों को व्यवस्थित कर वहां सड़क, बिजली, सीवर आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। सभी प्लॉट एक समान होंगे। साथ ही उस टाउनशिप में पार्क, खेल का मैदान, स्कूल, अस्पताल, मंदिर आदि भी बनाए जाएंगे।
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सवाल : क्या इस योजना से किसान भूमिहीन हो जाएंगे?
विभाग :
बिल्कुल नहीं। इस संबंध में बिहार सरकार का कहना है कि भू-मालिकों को टाउनशिप के विकास में होल्डर शेयर बनाया जाएगा। उन्हें उनकी भूमि के बदले विकसित क्षेत्र में हिस्सा दिया जाएगा, जिससे वह अपनी जमीन के मालिक बने रहेंगे। इस संबंध में सरकार का कहना है कि राज्य सरकार भू-मालिकों को 55% विकसित भूमि वापस कर देगी। 

सवाल : जमीन का बंटवारा किस अनुपात में होगा? 
विभाग : टाउनशिप विकास के लिए ली गई भूमि का उपयोग निम्नलिखित तरीके से किया जाएगा। नगर विकास एवं आवास विभाग का कहना है कि 55% भूमि को विकसित कर भू-मालिकों को वापस कर दी जाएगी। 22% भूमि को सड़क और बुनियादी ढांचे के निर्माण में लगाया जाएगा। 5% भूमि में पार्क, हरियाली और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए उपयोग किए जाएंगे। 3% भूमि को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आवास के लिए लिए जाएंगे। 15% भूमि को पार्क, खेल का मैदान, स्कूल, अस्पताल, मंदिर आदि निर्माण के कार्यों के लिए सरकार अपने पास रखेगी।
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सवाल : क्या भू-मालिकों को इस योजना से कोई आर्थिक लाभ होगा?
विभाग : हाँ, बिहार सरकार भू-मालिकों को इस योजना के तहत बहुत बड़ा लाभ देगी। विकसित होने के बाद जमीन की कीमत 10 गुना तक बढ़ जाने का अनुमान है। यानी, किसान को कम जमीन वापस मिलेगी, लेकिन उसकी कीमत उसकी वर्तमान कुल जमीन से बहुत ज्यादा होगी।

सवाल : अगर कोई किसान इस स्कीम का हिस्सा नहीं बनना चाहता, तो क्या होगा?
विभाग :  इसके लिए बिहार सरकार ने तीन विकल्प रखे हैं।
बिहार सरकार ने पहला विकल्प बाजार दर पर नकद मुआवजा देने का प्रावधान रखा है। दूसरा प्रावधान जमीन के बदले विकास का अधिकार है, जिसे बाजार में बेचा जा सकता है और तीसरा विकल्प विकसित भवन में हिस्सा देने का है। इन तीनों विकल्पों की कुल कीमत मूल भूमि के बाजार मूल्य से लगभग चार गुना अधिक होगी।
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सवाल : टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक क्यों लगाई गई है?
जवाब : सरकार का मानना है कि जमीन खरीद-बिक्री में बिचौलियों का अहम रोल होता है। वह किसानों को बरगलाकर अपना काम करते हैं। अक्सर विकास की खबर मिलते ही बिचौलिए कम दामों पर किसानों से जमीन खरीद लेते हैं और बाद में भारी मुनाफा कमाते हैं। रोक रहने से किसान अपनी बेशकीमती जमीन कम दाम में नहीं बेचेंगे और योजना पूरी होने पर सीधे बढ़े हुए दामों का लाभ उठा सकेंगे।  इसलिए बिचौलियों से किसानों को बचाने के लिए सरकार ने जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई है।

सवाल : क्या यह प्रक्रिया पारदर्शी होगी?
जवाब : सरकार का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। इस संबंध में नगर विकास एवं आवास विभाग का कहना है कि ड्राफ्ट प्लान से लेकर प्लॉटों के पुनर्गठन तक हर चरण में जमीन मालिकों से संपर्क कर उनसे बातचीत की जाएगी। भू-मालिकों के सुझावों और आपत्तियों को सुना जाएगा, ताकि किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं हो।

सवाल : लैंड पूलिंग मॉडल क्या है ?
विभाग : नगर विकास एवं आवास विभाग का कहना है कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप पूरी तरह से लैंड पूलिंग के मॉडल से बनाए जाएंगे। दरअसल लैंड पूलिंग एक ऐसी विकास योजना है, जिसमें जमीन मालिक स्वेच्छा से अपनी जमीन को सरकार या विकास प्राधिकरण के पास जमा करते हैं। सरकार इस जमीन पर सड़क, बिजली, पानी, पार्क और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करती है। और फिर विकसित भूमि का एक हिस्सा लगभग 50-60 फीसदी जमीन मूल मालिकों को वापस कर दी जाती है, जिसकी कीमत पहले से कहीं अधिक होती है।

सवाल : लैंड पूलिंग मॉडल के क्या हैं फायदे?
विभाग : इस संबंध में नगर विकास एवं आवास विभाग का कहना है कि जमीन मालिकों को उच्च मूल्य: विकसित जमीन मिलने से जमीन की कीमत कई गुना बढ़ जाती है।इससे सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि चूंकि जमीन स्वेच्छा से दी जाती है, इसलिए इसमें किसी तरह का कोई विवाद नहीं होता है। 


 
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