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Bihar News: जमुई नक्सल मुक्त होने के बाद बड़ी कार्रवाई, जंगल में बना नक्सली स्मारक ध्वस्त
Tue, 21 Apr 2026 09:10 PM IST
मुंगेर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, जमुई
अमर उजाला ब्यूरो, जमुई
Published by: मुंगेर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2026 09:10 PM IST
सार
Bihar News: जमुई में बिहार-झारखंड सीमा पर सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा बनाया गया स्मारक ध्वस्त किया गया। सुरक्षा बलों ने इसे नक्सली प्रभाव की अंतिम निशानी बताया। प्रशासन क्षेत्र में शांति और विकास को मजबूत करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है।
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सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सली स्मारक को ध्वस्त किया
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
जमुई जिले को पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र से नक्सली प्रभाव और उनके प्रतीकों को समाप्त करने के लिए अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में मंगलवार को बिहार-झारखंड सीमा से सटे विशनपुर-रुझनिया के घने जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें नक्सलियों द्वारा बनाया गया एक स्मारक ध्वस्त कर दिया गया।
सुरक्षा बलों ने इस स्मारक को नक्सलियों की अंतिम निशानी के रूप में चिन्हित किया था। इसके बाद मौके पर जेसीबी मशीन बुलाकर इसे पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह स्मारक नक्सली गतिविधियों और उनके प्रभाव का प्रतीक था, जिसे खत्म करना आवश्यक था।
जानकारी के अनुसार, नक्सली संगठन अपने मारे गए सदस्यों को ‘शहीद’ का दर्जा देकर जंगलों में ऐसे स्मारक बनाते थे और समय-समय पर वहां कार्यक्रम आयोजित करते थे, जिससे उनकी विचारधारा को बढ़ावा मिलता था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे प्रतीकों का बने रहना नक्सली प्रभाव को बनाए रखने में मदद करता है।
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चरका पत्थर थाना अध्यक्ष रंजीत कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई पूर्व इनपुट के आधार पर की गई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
ये भी पढ़ें- मुख्यमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी से मिले सम्राट चौधरी, मंत्रिमंडल विस्तार पर हुई चर्चा
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर विश्वास बढ़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि अब क्षेत्र में पहले की तुलना में अधिक शांति है और विकास कार्यों की उम्मीद भी बढ़ी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को तेज किया जाएगा, ताकि स्थायी शांति और समृद्धि सुनिश्चित हो सके।
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सुरक्षा बलों ने इस स्मारक को नक्सलियों की अंतिम निशानी के रूप में चिन्हित किया था। इसके बाद मौके पर जेसीबी मशीन बुलाकर इसे पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह स्मारक नक्सली गतिविधियों और उनके प्रभाव का प्रतीक था, जिसे खत्म करना आवश्यक था।
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जानकारी के अनुसार, नक्सली संगठन अपने मारे गए सदस्यों को ‘शहीद’ का दर्जा देकर जंगलों में ऐसे स्मारक बनाते थे और समय-समय पर वहां कार्यक्रम आयोजित करते थे, जिससे उनकी विचारधारा को बढ़ावा मिलता था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे प्रतीकों का बने रहना नक्सली प्रभाव को बनाए रखने में मदद करता है।
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चरका पत्थर थाना अध्यक्ष रंजीत कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई पूर्व इनपुट के आधार पर की गई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
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इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर विश्वास बढ़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि अब क्षेत्र में पहले की तुलना में अधिक शांति है और विकास कार्यों की उम्मीद भी बढ़ी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को तेज किया जाएगा, ताकि स्थायी शांति और समृद्धि सुनिश्चित हो सके।