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Bihar: रोजगार भी, सम्मान भी! दीदियों के हाथों सिले कपड़े पहनेंगे नन्हें कदम, बिहार में बदलाव की मजबूत दस्तक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पश्चिम चंपारण
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Sat, 28 Feb 2026 06:14 PM IST
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सार
पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से महिलाओं की आत्मनिर्भरता और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक अहम पहल की शुरुआत हो रही है। 1 मार्च को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार जीविका दीदियों द्वारा तैयार सिले-सिलाए कपड़ों का वितरण कर कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।
अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से महिलाओं की आत्मनिर्भरता और बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक नई और ऐतिहासिक पहल की शुरुआत होने जा रही है। 1 मार्च को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार जीविका दीदियों द्वारा तैयार सिले-सिलाए वस्त्रों का वितरण कर इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। यह पहल न सिर्फ आंगनबाड़ी के बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने की उम्मीद जगा रही है, बल्कि हजारों जीविका दीदियों के लिए सम्मान और स्थायी रोजगार का नया रास्ता भी खोल रही है।
मुख्यमंत्री की घोषणा का नतीजा
यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उस घोषणा का परिणाम है, जो महिला संवाद कार्यक्रम के दौरान सामने आई थी। उस समय जीविका दीदियों ने घर बैठे रोजगार की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने उनकी मांग को गंभीरता से लिया और इसे मंजूरी दी। अब उसी निर्णय के तहत बड़ी संख्या में जीविका दीदियां प्रशिक्षण लेकर आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए स्कर्ट, शर्ट और पैंट तैयार कर रही हैं।
राज्यभर में बड़े पैमाने पर तैयारी
राज्य में कुल 1,14,718 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के बच्चों के लिए बड़े पैमाने पर कपड़े तैयार किए जा रहे हैं। वाल्मीकिनगर में होने वाले कार्यक्रम में सांकेतिक रूप से बच्चों के बीच वस्त्र वितरित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में जीविका दीदियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलेगी। पश्चिम चंपारण जिले में इस मौके पर करीब 5,000 आंगनबाड़ी बच्चों को नए कपड़े मिलेंगे। वहीं पूरे बिहार में लगभग 2 लाख बच्चों तक इस योजना का लाभ पहुंचाया जाएगा।
ये भी पढ़ें: बांका में अपहरण के बाद मासूम की हत्या, स्कूल के पास मिला शव
हजारों महिलाओं को मिला रोजगार
जीविका के प्रबंधक (गैर-कृषि) सोहेल राज ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों की करीब 2,000 जीविका दीदियां इस काम में लगी हुई हैं। वहीं पूरे राज्य में लगभग 60,000 महिलाएं इस योजना से जुड़कर घर बैठे रोजगार पा रही हैं। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। वाल्मीकिनगर से शुरू हो रहा यह कार्यक्रम जीविका दीदियों के लिए गर्व का क्षण है। साथ ही यह आत्मनिर्भर बिहार की दिशा में एक मजबूत संदेश भी देता है। महिलाओं को रोजगार और बच्चों को नए वस्त्र देने की यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगा रही है।
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मुख्यमंत्री की घोषणा का नतीजा
यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उस घोषणा का परिणाम है, जो महिला संवाद कार्यक्रम के दौरान सामने आई थी। उस समय जीविका दीदियों ने घर बैठे रोजगार की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने उनकी मांग को गंभीरता से लिया और इसे मंजूरी दी। अब उसी निर्णय के तहत बड़ी संख्या में जीविका दीदियां प्रशिक्षण लेकर आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए स्कर्ट, शर्ट और पैंट तैयार कर रही हैं।
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राज्यभर में बड़े पैमाने पर तैयारी
राज्य में कुल 1,14,718 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के बच्चों के लिए बड़े पैमाने पर कपड़े तैयार किए जा रहे हैं। वाल्मीकिनगर में होने वाले कार्यक्रम में सांकेतिक रूप से बच्चों के बीच वस्त्र वितरित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में जीविका दीदियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलेगी। पश्चिम चंपारण जिले में इस मौके पर करीब 5,000 आंगनबाड़ी बच्चों को नए कपड़े मिलेंगे। वहीं पूरे बिहार में लगभग 2 लाख बच्चों तक इस योजना का लाभ पहुंचाया जाएगा।
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हजारों महिलाओं को मिला रोजगार
जीविका के प्रबंधक (गैर-कृषि) सोहेल राज ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों की करीब 2,000 जीविका दीदियां इस काम में लगी हुई हैं। वहीं पूरे राज्य में लगभग 60,000 महिलाएं इस योजना से जुड़कर घर बैठे रोजगार पा रही हैं। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। वाल्मीकिनगर से शुरू हो रहा यह कार्यक्रम जीविका दीदियों के लिए गर्व का क्षण है। साथ ही यह आत्मनिर्भर बिहार की दिशा में एक मजबूत संदेश भी देता है। महिलाओं को रोजगार और बच्चों को नए वस्त्र देने की यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगा रही है।