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Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की भक्ति में लीन भक्त, पूजन से होता है दुखों का नाश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sun, 22 Mar 2026 10:29 AM IST
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सार

Navratri 2026: मुजफ्फरपुर में चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखा गया। मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ी और श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कष्टों से मुक्ति की कामना की।

chaitra navratra festival devotee gather in worship maa kushmanda devi in Muzaffarpur Bihar
चैत्र नवरात्रि चौथे दिन मां कूष्माण्डा
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विस्तार

चैत्र नवरात्रि का आज चौथा दिन है और इस दिन देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा, अनुष्ठान और दर्शन का विशेष महत्व है। देवी पुराण और हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भक्तों के सभी रोग, कष्ट और शोक समाप्त हो जाते हैं।

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सिंह की सवारी करती हैं मां
बताया जाता है कि इस दिन विधि-विधान से मां कूष्मांडा की उपासना करने से न केवल दुखों का नाश होता है, बल्कि आयु, यश, कीर्ति, बल और आरोग्यता में भी वृद्धि होती है। भगवती पुराण में मां कूष्मांडा को अष्टभुजा वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है। उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला सुशोभित रहते हैं। मां सिंह की सवारी करती हैं और उनका यह स्वरूप शक्ति, समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है।
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चैत्र नवरात्रि को लेकर भक्तों में खासा उत्साह
मुजफ्फरपुर शहर में चैत्र नवरात्रि को लेकर भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। शहर के पूर्वी छोर पर स्थित माता बंगलामुखी मंदिर में भक्तों का जनसैलाब देखा जा रहा है। श्रद्धालु माता के दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आराधना कर रहे हैं। इस दौरान भक्त माता को प्रसाद, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर रहे हैं।

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'नवदुर्गा के प्रत्येक स्वरूप का अपना अलग महत्व'
मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित ने बताया कि नवदुर्गा के प्रत्येक स्वरूप का अपना अलग महत्व है। आज मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा का विधान है। मां अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाती हैं, उन्हें दीर्घायु प्रदान करती हैं, उनके दुखों का नाश करती हैं और जीवन में सुख-शांति देती हैं।

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