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Bihar: लाइब्रेरी की पढ़ाई करने के बाद BRABU ने छात्रों को दी मछली पालन की डिग्री! परीक्षा नियंत्रक ने दी सफाई
Sun, 12 Jul 2026 10:55 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2026 10:55 PM IST
सार
मुजफ्फरपुर के बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में डिग्री वितरण में बड़ी लापरवाही सामने आई है। लाइब्रेरी साइंस के छात्रों को फिशरीज की डिग्री और बीसीए छात्र को बीबीए का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। परीक्षा नियंत्रक ने इसे मानवीय भूल बताते हुए दो कार्यदिवस में सुधार का आश्वासन दिया है।
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विश्विद्यालय ने थमाई दूसरी डिग्री
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) एक बार फिर अपनी प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सवालों के घेरे में है। विश्वविद्यालय के परीक्षा एवं डिग्री विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। इंस्टीट्यूट ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस से पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को बैचलर ऑफ इंडस्ट्रियल फिश एंड फिशरीज की डिग्री जारी कर दी गई। वहीं, बीसीए की पढ़ाई पूरी करने वाले एक छात्र को बीबीए का प्रमाणपत्र थमा दिया गया।
8 महीने इंतजार के बाद मिली गलत डिग्री
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक छात्र को निर्धारित शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन के करीब आठ महीने बाद डिग्री मिली। छात्र ने बिना किसी संदेह के इसे एक प्रतिष्ठित संस्थान में नामांकन के लिए जमा कर दिया। सत्यापन के दौरान डिग्री में गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद उसे परेशानी का सामना करना पड़ा और उसकी डिग्री पर सवाल उठ गए।
'फॉर्म सही भरा था, फिर गलती कैसे हुई?'
पीड़ित छात्रों का कहना है कि आवेदन के समय उन्होंने कोर्स, कॉलेज और अन्य सभी विवरण सही तरीके से भरे थे। इसके बावजूद डिग्री में दूसरे कोर्स का नाम छपना विश्वविद्यालय की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। छात्र अब डिग्री में सुधार के लिए लगातार विश्वविद्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
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परीक्षा नियंत्रक ने क्या कहा?
इस मामले पर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. राम कुमार ने कहा कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में डिग्रियां तैयार की जाती हैं, जिनमें मैनुअल डेटा एंट्री होती है। इस प्रक्रिया में कभी-कभी मानवीय भूल हो जाती है। उन्होंने बताया कि सामान्यतः सत्यापन के दौरान ऐसी गलतियां पकड़ ली जाती हैं। यदि किसी छात्र को गलत डिग्री जारी हुई है, तो वह उसे डिग्री सेक्शन में जमा कर दे। विश्वविद्यालय दो कार्यदिवस के भीतर संशोधित डिग्री जारी कर देगा।
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8 महीने इंतजार के बाद मिली गलत डिग्री
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक छात्र को निर्धारित शुल्क जमा करने और ऑनलाइन आवेदन के करीब आठ महीने बाद डिग्री मिली। छात्र ने बिना किसी संदेह के इसे एक प्रतिष्ठित संस्थान में नामांकन के लिए जमा कर दिया। सत्यापन के दौरान डिग्री में गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद उसे परेशानी का सामना करना पड़ा और उसकी डिग्री पर सवाल उठ गए।
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'फॉर्म सही भरा था, फिर गलती कैसे हुई?'
पीड़ित छात्रों का कहना है कि आवेदन के समय उन्होंने कोर्स, कॉलेज और अन्य सभी विवरण सही तरीके से भरे थे। इसके बावजूद डिग्री में दूसरे कोर्स का नाम छपना विश्वविद्यालय की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। छात्र अब डिग्री में सुधार के लिए लगातार विश्वविद्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
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परीक्षा नियंत्रक ने क्या कहा?
इस मामले पर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. राम कुमार ने कहा कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में डिग्रियां तैयार की जाती हैं, जिनमें मैनुअल डेटा एंट्री होती है। इस प्रक्रिया में कभी-कभी मानवीय भूल हो जाती है। उन्होंने बताया कि सामान्यतः सत्यापन के दौरान ऐसी गलतियां पकड़ ली जाती हैं। यदि किसी छात्र को गलत डिग्री जारी हुई है, तो वह उसे डिग्री सेक्शन में जमा कर दे। विश्वविद्यालय दो कार्यदिवस के भीतर संशोधित डिग्री जारी कर देगा।