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Bihar News: न कोचिंग...न ऑनलाइन क्लास,सेल्फ स्टडी के दम पर सिद्धि बन गई टॉपर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 05:24 PM IST
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सार
सीतामढ़ी जिले के पुपरी की रहने वाली सिद्धि कुमारी ने बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में आर्ट्स स्ट्रीम में 478 अंक (95.60%) प्राप्त कर पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया।
फाइल फोटो
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
बिहार: सीतामढ़ी के पुपरी की रहने वाली सिद्धि कुमारी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सिद्धि ने आर्ट्स स्ट्रीम में कुल 478 अंक 95.60% प्राप्त कर पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया है। मूल रूप से पुपरी जनकपुर रोड निवासी सिद्धि के पिता प्रशांत कुमार एक हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं, जबकि माता रचना देवी गृहिणी हैं। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली सिद्धि की इस ऐतिहासिक सफलता ने न केवल उनके माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है, बल्कि पूरे सीतामढ़ी जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। सिद्धि दो भाई-बहनों में छोटी हैं और उनका बड़ा भाई वर्तमान में स्नातक की पढ़ाई कर रहा है।
नानी के घर रहकर की पढ़ाई
सिद्धि की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और सादगी भरी जीवनशैली का बड़ा हाथ है। सिद्धि ने अपनी पढ़ाई अपने नानी घर बैरगनिया में रहकर पूरी की। उन्होंने प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल, बैरगनिया से शिक्षा प्राप्त की और परीक्षा की तैयारी के दौरान भी यहीं डटी रहीं। सिद्धि का मानना है कि सफलता के लिए बड़े शहरों में जाना या महंगे संसाधनों का होना अनिवार्य नहीं है।अगर आपके पास दृढ़ संकल्प है, तो आप कहीं से भी अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। आज उनकी उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश में रहकर भी राज्य स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किया जा सकता है।
सेल्फ स्टडी के दम पर बनीं सेकेंड टॉपर
आज के दौर में जहां छात्र ऑनलाइन क्लासेस और बड़े कोचिंग संस्थानों के पीछे भागते हैं, वहीं सिद्धि ने एक अलग मिसाल पेश की है। सिद्धि ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय 'सेल्फ स्टडी' और स्कूल के शिक्षकों को दिया है। उन्होंने बताया कि वह प्रोजेक्ट हाई स्कूल बैरगनिया के शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए विषयों को ही घर पर गहनता से दोहराती थीं। अंग्रेजी के लिए एक कोचिंग को छोड़कर उन्होंने किसी भी अन्य विषय के लिए बाहरी मदद या ऑनलाइन क्लास का सहारा नहीं लिया। प्रतिदिन घंटों तक खुद से की गई पढ़ाई और एकाग्रता ही उनकी 95.60% अंकों की नींव बनी, जिससे उन्हें आर्ट्स टॉपर की सूची में दूसरा स्थान मिला।
बधाई देने वालों का तांता लगा
रिजल्ट की घोषणा होते ही सिद्धि के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया है। पिता प्रशांत कुमार और माता रचना देवी अपनी बेटी की इस उपलब्धि से फूले नहीं समा रहे हैं। परिवार का कहना है कि सिद्धि बचपन से ही मेधावी और अनुशासित रही है। उसकी इस कामयाबी ने यह संदेश दिया है कि बेटियों को अगर सही अवसर और प्रोत्साहन मिले,तो वे आसमान छू सकती हैं। सिद्धि की इस जीत से पूरे जिले के छात्र-छात्राओं को प्रेरणा मिली है। अब सिद्धि अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर देश की सेवा करना चाहती हैं, जिसके लिए उन्होंने अभी से अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया है।
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नानी के घर रहकर की पढ़ाई
सिद्धि की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और सादगी भरी जीवनशैली का बड़ा हाथ है। सिद्धि ने अपनी पढ़ाई अपने नानी घर बैरगनिया में रहकर पूरी की। उन्होंने प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल, बैरगनिया से शिक्षा प्राप्त की और परीक्षा की तैयारी के दौरान भी यहीं डटी रहीं। सिद्धि का मानना है कि सफलता के लिए बड़े शहरों में जाना या महंगे संसाधनों का होना अनिवार्य नहीं है।अगर आपके पास दृढ़ संकल्प है, तो आप कहीं से भी अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। आज उनकी उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश में रहकर भी राज्य स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किया जा सकता है।
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सेल्फ स्टडी के दम पर बनीं सेकेंड टॉपर
आज के दौर में जहां छात्र ऑनलाइन क्लासेस और बड़े कोचिंग संस्थानों के पीछे भागते हैं, वहीं सिद्धि ने एक अलग मिसाल पेश की है। सिद्धि ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय 'सेल्फ स्टडी' और स्कूल के शिक्षकों को दिया है। उन्होंने बताया कि वह प्रोजेक्ट हाई स्कूल बैरगनिया के शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए विषयों को ही घर पर गहनता से दोहराती थीं। अंग्रेजी के लिए एक कोचिंग को छोड़कर उन्होंने किसी भी अन्य विषय के लिए बाहरी मदद या ऑनलाइन क्लास का सहारा नहीं लिया। प्रतिदिन घंटों तक खुद से की गई पढ़ाई और एकाग्रता ही उनकी 95.60% अंकों की नींव बनी, जिससे उन्हें आर्ट्स टॉपर की सूची में दूसरा स्थान मिला।
बधाई देने वालों का तांता लगा
रिजल्ट की घोषणा होते ही सिद्धि के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया है। पिता प्रशांत कुमार और माता रचना देवी अपनी बेटी की इस उपलब्धि से फूले नहीं समा रहे हैं। परिवार का कहना है कि सिद्धि बचपन से ही मेधावी और अनुशासित रही है। उसकी इस कामयाबी ने यह संदेश दिया है कि बेटियों को अगर सही अवसर और प्रोत्साहन मिले,तो वे आसमान छू सकती हैं। सिद्धि की इस जीत से पूरे जिले के छात्र-छात्राओं को प्रेरणा मिली है। अब सिद्धि अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर देश की सेवा करना चाहती हैं, जिसके लिए उन्होंने अभी से अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया है।