Bharat Band News: पटना समेत कई जिलों में ट्रेड यूनियन का हड़ताल, बैंककर्मी भी सड़क पर; वामदल ने दिया समर्थन
Trade Unions Strike: पटना, कटिहार, मधेपुरा समेत कई जिलों में हड़ताल का असर है। आंदोलन में बैंककर्मियों के शामिल होने से बैंकिंग सेवा ठप पड़ गई है। ग्राहक परेशान हैं। वहीं वामदल के कार्यकर्ता भी पटना समेत कई जगहों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
विस्तार
ट्रेड यूनियन के भारत बंद के आह्वान का असर बिहार में भी पड़ा है। राजधानी पटना समेत कुछ जिलों में वामदल के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में ट्रेन यूनियन के सदस्य सड़क पर उतरे। भाकपा माले के एमएलसी शशि यादव के नेतृत्व में ट्रेड यूनियन के सदस्यों ने बोरिंग रोड चौराहा पर प्रदर्शन किया। पर उतरे। सभी लोग चार लेबर कोड के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। माले एमएलसी शशि यादव ने कहा कि एआईसीसीटीयू समेत 10 ट्रेड यूनियन आज बिहार समेत पूरे देश में सड़कों पर उतरे हुई हैं। आज पटना में तमाम तरह के मजदूर सुबह नौ बजे से ही सड़क पर उतरे चुके हैं। कटिहार और मधेपुरा में भी हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। कटिहार में तो ट्रेड यूनियन की ओर से सड़क जाम कर दिया गया है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन जिलों में बैंकों के कर्मचारी भी सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस कारण बैंकिंग से जुड़े सभी काम ठप पड़ गए हैं।
एमएलसी शशि यादव ने क्या अल्टीमेटम दिया?
भाकपा माले की वरिष्ठ नेत्री और एमएलसी शशि यादव ने कहा कि हर तरह मजदूर आज आंदोलन कर रहे हैं। मोदी सरकार ने जो चार श्रम कोड बिल लागू किया किया है। वह मजदूरों के लिए गुलामी का दस्तावेज है। यह पूरे देश के मजदूरों को मंजूर नहीं है। इसलिए आज हम सड़क पर उतरे हैं। यह हड़ताल ऐतिहासिक होने जा रहा है। हर सेक्टर के लोग आज आंदोलन में शामिल हैं। मोदी सरकार से अपील है कि वह हमारी मांगों को पूरा करें नहीं तो इससे भी बड़ा हड़ताल हमलोग करेंगे।
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हड़ताल की वजह क्या और कौन-कौन इसमें शामिल?
गुरुवार को हो रहे देशव्यापी हड़ताल का आह्वान ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) जैसे प्रमुख संगठनों ने किया है। ये संगठन प्रस्तावित लेबर कोड (श्रम संहिताओं) का विरोध कर रहे हैं, जिन्हें वे श्रमिकों के खिलाफ और ट्रेड यूनियनों के पंजीकरण के लिए कड़ी शर्तों वाला मानते हैं। इसके अलावा, बैंक यूनियनें लंबे समय से कार्य-जीवन संतुलन और पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग कर रही हैं।