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Bihar Bill : निजी संस्थानों की फीस पर बिहार सरकार का नियंत्रण, सूदखोरों को जेल... ऐसे छह विधेयक पास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Aditya Anand
Updated Fri, 27 Feb 2026 07:29 AM IST
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सार
Bihar News : सूदखोरी से तंग लोगों के शोषण और व्यावसायिक शिक्षा देने वाले निजी संस्थानों की मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाने जैसे कुल छह विधेयकों को बिहार विधानसभा ने पारित कर दिया। जल्द यह कानून के रूप में लागू होगा।
कई वर्गों को प्रभावित करने वाले फैसले बजट सत्र के समापन के समय आए सामने।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
बिहार विधानमंडल का बजट सत्र जब खत्म होने को आया तो नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने आम लोगों को प्रभावित करने वाले कई बड़े फैसले विधानसभा से विधेयक के रूप में पारित करा लिए। 243 में से 202 विधायकों की ताकत वाली एनडीए सरकार ने जिन विधेयकों को विधानसभा से पारित करा लिया है वह आगे राज्यपाल होते हुए गजट के रास्ते कानून बन जाएगा और बहुमत के कारण विधान मंडल में कहीं उसका रास्ता भी नहीं रुकना है। इन विधेयकों के कारण बड़े जन-समूह, खासकर गरीब और मध्य वर्ग को ताकत मिलेगी। आइए, जानते हैं कि क्या-क्या विधेयक पारित हुए।
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सूदखोरों पर प्रहार, गरीब-मजबूरों को राहत
एनडीए सरकार ने बिहार में सूदखारों के शोषण को देखते हुए बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब तक यह हो रहा है कि राज्य के छोटे-छोटे गांवों तक माइक्रो फाइनेंस करने वाले छोटे-छोटे संगठनों का जाल फैल गया है, जो थोड़ी-सी आर्थिक मदद करने के बाद वसूली करते समय अमानवीयता की सारी हदें तोड़ देते हैं। निजी सूदखोरों के साथ ऐसे निजी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कारण कई आत्महत्याएं भी सामने आ चुकी हैं। कई परिवार खत्म होने की खबर हर साल आती है। अब यह 'बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं (धन उधार विनियम एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण)' विधेयक जब कानून के रूप में लागू हो जाएगा तो निजी सूदखोरों और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर लगाम कस जाएगी। जबरन वसूली की पुष्टि होने पर पांच साल तक जेल के साथ 5-10 लाख जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। त्वरित फैसले के नजरिए से सरकार विशेष न्यायालयों का भी गठन करेगी।
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निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों पर लगाम, मध्य वर्ग को राहत
राज्य सरकार ने विधानसभा में एक विधेयक 26 फरवरी को पारित कराया, जिसके कानून के रूप में लागू होते ही प्राइवेट प्रोफेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स पर सरकार का नियंत्रण बढ़ जाएगा। सरकार यहां नामांकन और बाकी फीस तय करेगी, यानी नियंत्रित रखेगी। इसमें प्रावधान किया गया कि व्यावसायिक शिक्षा देने वाले निजी संस्थान कैपिटेशन फी नहीं ले सकेंगे। उच्चतम न्यायालय के निर्देश के आधार पर यह कानून जब अंतिम तौर पर लागू होगा तो नौ सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति नामांकन और फीस पर निगरानी रखेगी। लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर, हॉस्टल, परीक्षा... आदि के नाम पर भी भारी शुल्क लेना मुश्किल होगा। यह कानून के रूप में लागू होगा तो मध्य वर्ग को सीधी राहत मिलेगी, क्योंकि अभी व्यावसायिक शिक्षा देने वाले निजी संस्थानों से इस आयवर्ग के परिवारों के छात्र परेशान रहते हैं।
उद्योगपतियों-निवेशकों को राहत देने के लिए भी कानून
बिहार विधानसभा में जिन छह विधेयकों को पारित किया गया, उनमें से एक उद्योगपतियों-निवेशकों को भी राहत देगा। उद्योग-व्यवसाय के क्षेत्र में निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए एनडीए सरकार ने यह विधेयक लाया है, जिसके कानून बनने के बाद बिहार में काम करना आसान होगा। छोटे अपराधों पर उद्योगति, निवेशक, व्यवसायी आदि अब सीधे जेल नहीं जाएंगे। 'बिहार जन विश्वास (प्रावधान संशोधन)' विधेयक जब कानून के रूप में पास हो जागा तो तकनीकी या प्रक्रियागत गलतियों के नाम पर जेल भेजने जैसी व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इसकी जगह आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
वकीलों की कल्याण निधि की राशि दोगुनी
बिहार में अभी कल्याण निधि स्टाम्प 25 रुपये का लगता है। वकालत से संबंधित इन दस्तावेजों पर अब 50 रुपये का शुल्क लगेगा। यह राशि अधिवक्ता कल्याण निधि में जाती है। राज्य में सेवारत अधिवक्ताओं की मेडिकल जरूरतों, रिटायरमेंट, मृत्यु आदि की स्थिति में इस कल्याण निधि के धन का उपयोग होता है। कानून लागू होने के साथ ही सामने आ जाएगा कि कल्याण निधि की राशि दोगुनी किए जाने से वकीलों को सीधा-सीधा लाभ कैसे मिलेगा?
सचिवालय सेवा में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी पदों पर बड़ा फैसला
बिहार विधानसभा में 26 फरवरी को महज 47 मिनट के अंदर जिन छह विधेयकों को एनडीए सरकार ने पारित करा लिया, उनमें से एक सचिवालय सेवा में नियुक्ति से जुड़ा हुआ भी है। इस विधेयक के कानून के रूप में मान्यता मिलने के बाद सचिवालय सेवा के सहायक प्रशाखा पदाधिकारी ग्रेड के 85 फीसदी पदों पर सीधी नियुक्ति हो सकेगी। प्रोबेशन की अवधि भी दो साल की जगह एक साल होगी। 15 प्रतिशत पद तो उच्च वर्गीय लिपिकों की प्रोन्नति से भरे जाएंगे, लेकिन 85 फीसदी पदों के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा के जरिए होगी। एक साल की प्रोबेशन अवधि खराब सेवा की स्थिति में एक साल और बढ़ाई जाएगी, लेकिन तब भी सुधार नहीं हुआ तो सेवा समाप्त का प्रावधान रहेगा।
मदरसों को लेकर भी विधेयक पारित, अब आएगा कानून
बिहार विधानसभा में मदरसों को लेकर भी एक विधेयक पारित किया गया। मदरसों में बर्खास्तगी की सुनवाई अब बिहार राज्य मदरसा शिख्ज्ञा बोर्ड के तहत मदरसों की प्रबंधक समिति करेगी, जिसके सदस्यों की संख्या 11 से बढ़ाकर 17 की गई है। इस प्रबंधन समिति में मदरसा के प्रधान मौलवी, नौ अनुयायी प्रतिनिधि, एक शिक्षक प्रतिनिधि, दो अभिभावक प्रतिनिधि एवं बोर्ड के नामित सदस्यों के अलावा इस समिति से सह-निर्वाचित तीन अनरू सदस्य भी होंगे।