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Bihar CM: भाजपा-जदयू में तनाव के बीच नीतीश ने सांसदों-विधायकों को बुलाया; इधर, नई सरकार का खाका आ रहा सामने

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Aditya Anand Updated Fri, 06 Mar 2026 01:57 PM IST
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सार

राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई है। जदयू और भाजपा कोटे से कितने कितने मंत्री बनेंगे? सामाजिक समीकरण का कितना ख्याल रखा जाएगा। किस पार्टी का डिप्टी सीएम और किसका सीएम होगा? किन नामों की चर्चा चल रही है? आइये जानते हैं सबकुछ...

Bihar CM: Nitish Kumar called a meeting of MLAs and MPs: Blueprint of the new government is coming out.
अमित शाह के साथ नीतीश कुमार, धर्मेंद्र प्रधान और सम्राट चौधरी - फोटो : Facebook
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विस्तार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा उम्मीदवार बनने पर सियासी घमासान जारी है। भारतीय जनता पार्टी का जनता दल यूनाईटेड के कार्यकर्ता पिछले 36 घंटे से विरोध कर रहे हैं। इस कारण जदयू और भाजपा के बीच तनाव बढ़ गया है। जदयू नेताओं का आरोप है कि भाजपा ने जनादेश का अपमान किया है। आज तो पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर कालिख तक पोत दी। इन सब के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू के विधायकों, विधान परिषद् सदस्यों और सांसदों की बैठक बुलाई है। सबको शाम पांच बजे सीएम हाउस आने का निर्देश दिया गया था। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बैठक करेंगे।

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इधर, नई सरकार का खाका भी तैयार हो गया है। सूत्रों की मानें तो रामनवमी तक सारी तस्वीर साफ हो जाएगी। पॉलिटिकल एक्सपर्ट बता रहे हैं कि सीएम नीतीश कुमार और गृह मंत्री अमित शाह के बीच मीटिंग के दौरान लगभग सारी बातें क्लियर हो चुकी है। कुछ बातों पर दोनों ओर से सहमति नहीं बन पाई है, उसके लिए बातचीत जारी है। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और गृह मंत्री अमित शाह एक ही विमान से दिल्ली गए थे। इस दौरान कुछ चीजों को अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है।
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भाजपा और जदयू के मंत्रियों की संख्या बराबर होने की चर्चा
बुधवार को भाजपा और जदयू के अलाकमान के बीच जो बातें हुई उससे एक बात छनकर सामने आई है कि दोनों दलों के मंत्रियों की संख्या समान होगी। 89 सीटें लाकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। वहीं जदयू के वरिष्ठ नेता अपने पास दो डिप्टी सीएम और गृह विभाग रखना चाहते हैं। कई वर्षों तक सीएम नीतीश कुमार ने अपने पास गृह विभाग रखा था सूत्र बता रहे हैं डिप्टी सीएम के लिए निशांत कुमार का नाम सबसे पहले नंबर पर है। इसके बाद विजय चौधरी का नाम सामने आ रहा है। विजय चौधरी सीएम नीतीश कुमार के सबसे करीबी नेताओं में से एक हैं। पार्टी में इन दोनों के नाम पर किसी को ऐतराज भी नहीं है। हालांकि, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ें, ऐसा निशांत कुमार नहीं चाह रहे थे। लेकिन, जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मना लिया। 

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चिराग, उपेंद्र और मांझी के पार्टी से कितने मंत्री बनेंगे 
2025 के विधानसभा चुनाव के बाद जो सरकार बनी उसमें 26 मंत्रियों ने शपथ लिया था। उसमें भाजपा से 14 , जदयू से 8, लोजपा (राम) से दो, हम और रालोमो से एक-एक मंत्री शामिल थे। सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद अब जो खाका तैयार किया गया है उसमें मंत्रियों की संख्या 33 तक जा सकती है। इसमें जदयू और भाजपा के 14-14 बराबर मंत्री रहेंगे। वहीं चिराग की पार्टी से तीन मंत्री बनाए जा सकते हैं जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी से पहले जैसे ही एक-एक मंत्री रहने की बात सामने आ रही है। 

विधानसभा अध्यक्ष पद किसके पास जाएगा?
विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के कुछ नेता अपने पाले में चाह रहे हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती है। भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, ऐसा आश्वासन उन्हें पहले ही दिया जा चुका है। इस सूरत में भाजपा विधानसभा अध्यक्ष पद के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देगी। 

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मुख्यमंत्री पद पर फिर चौंका सकती है भाजपा
सबसे अधिक सवाल मुख्यमंत्री कौन बनेगा? यह ही पूछे जा रहे हैं। भाजपा के नेताओं को यह भी लग रहा है कि कोई चौंकाने वाला नाम अचानक सीएम के रूप में न सामने आ जाए। नितिन नवीन को जब भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था, तब यह कहा गया कि उन्हें दिल्ली में रखकर कुछ समय तक तैयार किया जाएगा और फिर बिहार का सीएम बनाया जाएगा। अचानक मुख्यमंत्री बदलने की बात आने से पहले ही इस चर्चा पर विराम लग गया, क्योंकि नितिन को विधानसभा से इस्तीफा दिलाने की तैयारी के तहत राज्यसभा के लिए उनका नाम जारी कर दिया गया। अब भाजपा फिर कुछ नया दांव भी खेल ले तो अजूबा नहीं होगा। बिहार चुनाव हो चुका है। चुनाव अब लगभग पांच साल बाद होना है। ऐसे में प्रयोग के लिए किसी नए चेहरे को सीएम बनाने पर भी कोई अंतर नहीं पड़ना है। भाजपा ऐसा करती रही है, इसलिए खुलकर प्रदेश के नेता कुछ नहीं बोल रहे हैं। यही कारण है कि संजीव चौरसिया का भी नाम उछल रहा है। इसके अलावा सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय के नाम की चर्चा की भी खूब हो रही है। हालांकि, इन तीनों में सम्राट चौधरी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। कारण है कि कुशवाहा समाज से आते हैं, जो जदयू के सामने भाजपा को मजबूत करने में काम आएगा- यह कहा गया था। भाजपा ने चुनावों में उसका असर देखा है। इसलिए, उनकी संभावना बनी हुई भी है और नहीं भी।


 

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