Bihar: एनडीए में सब कुछ 'ऑल इज वेल', दीपक प्रकाश को लेकर सबकुछ स्पष्ट; उपेंद्र कुशवाहा को क्या आश्वासन मिला?
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे कोई पहले शख्स नहीं है जो बिना किसी सदन के सदस्य रहे, मंत्री बना दिए गए। उनसे पहले भी कुछ लोगों को मंत्री बनाया गया। दीपक प्रकाश को लेकर जो अटकलें सियासी गलियारे में चल रही थी, अब उस पर विराम लग गया। वह मंत्री बने रहेंगे या नहीं? इस सवाल का जवाब भी मिल गया। आइये जानते हैं पूरा मामला...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आज राष्ट्रीय लोक मोर्चा के लिए बड़ा दिन है। दिल्ली में आज राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर निर्वाचन हुआ है। उपेंद्र कुशवाहा ही राष्ट्रीय फिर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में रालोमो के सभी वरिष्ठ नेता विधायक और कार्यकर्ता मौजूद रहे। आज उपेंद्र कुशवाहा का कॉन्फिडेंस भी काफी हाई लग रहा था। पिछले कुछ दिनों से उपेंद्र कुशवाहा, उनके बेटे दीपक प्रकाश और उनकी पार्टी चर्चा में है। चर्चा का कारण एक ही है कि दीपक प्रकाश अब तक बिना किसी सदन के सदस्य निर्वाचित हुए मंत्री पद पर आसीन हैं। ऐसा माना जा रहा था कि विधान परिषद की 10 सीटों में से किसी एक सीट पर दीपक प्रकाश को सेट किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा नाराज होकर दिल्ली चले गए। आलाकमान से बातचीत हुई तो उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी भी दूर हो गई और अटकलों पर विराम लगभग लग गया।
दरअसल, मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक हुई इसमें सभी दलों के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। सूत्रों की माने तो इसमें उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए के शीर्ष नेतृत्व की ओर से यह मैसेज मिल गया कि दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेज दिया जाएगा। कहा जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनो में राज्यपाल को कुछ सदस्यों मानोनयन करना है। इसी में दीपक प्रकाश को एडजस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक दिन पहले इस सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि दीपक प्रकाश मंत्री हैं और आगे भी बने रहेंगे। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि वह महीना तक बिना किसी भी सदन के सदस्य रहे आप मंत्री रह सकते हैं। सम्राट चौधरी के इस बयान से स्पष्ट हो गया कि दीपक प्रकाश को लेकर भले ही कई तरह की अटकलें चल रही हो लेकिन सच्चाई यही है कि उनके मंत्री बने रहने को लेकर भाजपा के आलाकमान की ओर से मुहर लगा दी गई है।
जानिए सहयोगी दलों ने क्या कहा?
एनडीए के सहयोगी घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के विधायक दल के नेता राजू तिवारी ने भी स्पष्ट कहा कि उपेंद्र कुशवाहा बड़े नेता हैं। गठबंधन में सब कुछ ऑल इज वेल है। कहीं को कोई दिक्कत नहीं है। किसी तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। कहीं कोई नाराजगी नहीं है। सब कुछ ठीक चल रहा है। और आगे जो भी होगा वह भी अच्छा ही होगा।
Bihar Weather: बिहार के कितने जिलों में आज बारिश का अलर्ट? पटना में उमस से राहत नहीं; मानसून कहां-कहां एक्टिव?
एक प्रेस विज्ञप्ति पर हो रहा वायरल
दरअसल, एक दिन पहले एक प्रेस विज्ञप्ति सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। यह प्रेस विज्ञप्ति भारतीय जनता पार्टी बिहार प्रदेश के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के नाम से थी इसमें कहा गया था कि विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक मोर्चा 6 सीटों पर उम्मीदवार उतरेंगे और विधान परिषद की एक सीट भाजपा कोटे से दी जाएगी। हालांकि इस मामले में बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि कि मुझे इसको लेकर कोई जानकारी नहीं है। अब मैं प्रदेश अध्यक्ष भी नहीं हूं। मुझे जानकारी नहीं कि भाजपा नेतृत्व व रालोमो में क्या बात अभी हुई है।
'आगे भी गठबंधन का हिस्सा बने रहेंगे'
राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए के साथ पूरी प्रतिबद्धता के साथ जुड़े हुए हैं और आगे भी गठबंधन का हिस्सा बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, तब उनके समर्थन में सबसे पहले आवाज उठाने वालों में वह भी शामिल थे। लोग किसी तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। सब कुछ अच्छा होगा राजनीति में कभी भी जल्दबाजी में कुछ भी कहना अच्छी बात नहीं होती है इसलिए आप लोग इंतजार करें और निश्चिंत रहें। सब ठीक है।
जानिए कौन बिना किसी सदन के सदस्य बने ही मंत्री बना दिए गए
- बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी जब पहली बार बिहार की मुख्यमंत्री बनी थीं तब वह किसी भी सदन की सदस्य नहीं थी। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद जब जेल गए थे तब रातों-रात राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया गया था और 25 जुलाई 1997 को वह पहली बार बिहार की मुख्यमंत्री बनी। बाद में उन्हें विधान परिषद भेजा गया।
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी पांच महीने 28 दिन तक किसी भी सदन के सदस्य बने बिना ही मंत्री पद पर आसीन रहे थे। बाद में उन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर सदन की सदस्यता प्राप्त कर ली थी। एक दिन पहले सीएम सम्राट ने खुद इस बात की जानकारी दी।
- स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सात मई को मंत्री पद की शपथ ली थी तो वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे। हालांकि, 11 जून 2026 को वह निर्विरोध विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हो गए। वह एक महीने से अधिक समय तक बिना सदस्यता के मंत्री रहे और फिर सदन के सदस्य बन गए।
- वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख दीपक ने 7 मई 2026 को पंचायती राज मंत्री के रूप में शपथ ली। वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। अब तक वह 37 दिन मंत्री पद पर रह चुके हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, वह 6 नवंबर 2026 तक किसी एक सदन की सदस्यता हासिल करनी होगी, अन्यथा मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।
क्या कहता है संविधान का नियम?
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) कहता है, कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री या मंत्री के रूप में शपथ ले सकता है, भले ही वह उस समय विधानसभा या विधान परिषद् का सदस्य न हो। लेकिन शर्त यह है कि उसे शपथ ग्रहण की तिथि से छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है। यदि वह छह महीने की अवधि के भीतर सदस्यता प्राप्त नहीं कर पाता है, तो वह स्वतः मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार खो देता है और उसे पद छोड़ना पड़ता है।