Bihar News: 'वीआईपी शौचालय' पर तेजस्वी के आरोपों का नीतीश कुमार की पार्टी ने दिया जवाब, कहा- भ्रम फैला रहे हैं
बिहार में बंगला, सुरक्षा के बाद अब शौचालय पर सियासत हो रही है। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने 'शौचालय' पर फिजूल करने का आरोप लगाया। अब जदयू ने इस मामले पर पलटवार किया है। आइये जानते हैं पूरा मामला...
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दो दिन पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक शौचालय की तस्वीर शेयर की थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा से जोड़कर सवाल उठाया था और सरकार को घेरने की कोशिश की थी। अब इस मामले में जनता दल यूनाइटेड ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर पलटवार किया है। मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार और प्रदेश प्रवक्ता मनीष यादव ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि तेजस्वी यादव अधूरी और भ्रामक जानकारी के आधार पर राज्य सरकार की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि तेजस्वी यादव ने एक वीआईपी शौचालय के निर्माण पर 7.41 लाख रुपये खर्च होने का आरोप लगाया था, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। जद(यू) के अनुसार लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के आदेश (संख्या 01-104/2024-282, दो जून 2026) के तहत एक नहीं, बल्कि चार वीआईपी शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इन चारों शौचालयों पर कुल चार लाख 71 हजार 691 रुपये खर्च हुए, जबकि प्रति शौचालय लागत लगभग 1 लाख 17 हजार 922 रुपये रही।
तेजस्वी यादव के आरोपों को भी खारिज किया
इतना नहीं नीरज कुमार ने बिहार सरकार को आर्थिक रूप से दिवालिया बताने वाले तेजस्वी यादव के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि आकस्मिक निधि से 3,662 करोड़ रुपये की निकासी को दिवालियापन बताना वित्तीय प्रक्रियाओं की गलत व्याख्या है। उनके अनुसार आकस्मिक निधि का उपयोग वेतन, पेंशन और अन्य आवश्यक सरकारी खर्चों के लिए किया जाता है और राज्य की वित्तीय स्थिति सामान्य है। जदयू ने दावा किया कि बिहार का ऋण-जीएसडीपी अनुपात 33 से 40 प्रतिशत के बीच है, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा राज्यों के लिए निर्धारित सीमा के भीतर है। जदयू ने कहा कि पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का ऋण अनुपात बिहार से अधिक है, इसलिए बिहार को सर्वाधिक ऋणग्रस्त राज्य बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
जदयू ने तेजस्वी यादव से चार सवाल पूछे
- 7.41 लाख रुपये वाले शौचालय संबंधी ट्वीट करने से पहले क्या उन्होंने विभागीय दस्तावेजों की जांच की थी?
- महागठबंधन सरकार के दौरान 1.56 लाख रुपये लागत वाले वीआईपी शौचालय निर्माण पर उनकी चुप्पी क्यों थी?
- यदि आकस्मिक निधि का उपयोग दिवालियापन का संकेत है, तो जनता के हित में होने वाले खर्च को वे किस श्रेणी में रखते हैं?
- वित्तीय प्रक्रियाओं पर टिप्पणी करने से पहले क्या उन्होंने वित्त विभाग से तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त की थी या केवल सोशल मीडिया आधारित सूचनाओं पर भरोसा किया?
तेजस्वी यादव ने क्या आरोप लगाया था?
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर शौचालय की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था कि बिहार में चंद मिनटों के उपयोग के लिए बना रेड कार्पेट वाला सबसे वीवीआईपी शौचालय! चंद माह पूर्व प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के एक घंटे के कार्यक्रम में चंद सेकंड के उपयोग के लिए सात लाख 41 हजार की लागत से एक अस्थायी वीवीआईपी टॉयलेट का निर्माण कराया गया। आरटीआई से खुलासा हुआ है कि गरीब राज्य के सबसे वंचित और पिछड़े जिले अररिया के रानीगंज में मुख्यमंत्री ने यह कारनामा कराया। सर्वविदित है कि आम आदमी को शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार की सरकारी राशि तय है जिसमें 20 फीसदी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता है। इन सात लाख 41 हजार रुपयो से गरीबों के लिए 37 स्थायी शौचालयों का निर्माण कराया जा सकता था।
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तेजस्वी बोले- बिहार कंगाल होने के कगार पर
इतना ही नहीं सरकारी खजाना को लेकर भी तेजस्वी यादव ने आज प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए अत्यंत चिंता का विषय है कि एनडीए की दिवालिया राजनीति और दिवालिए नेतृत्व के कारण प्रदेश की बिगड़ चुकी वित्तीय स्थिति, घटता राजस्व, बढ़ता राजकोषीय घाटा, अत्यधिक कर्ज, भारी ब्याज अदायगी तथा खोखली व अदूरदर्शी नीतियों के कारण हमारा बिहार कंगाल होने के कगार पर है। खज़ाना खाली होने के कारण प्रदेश में अराजकत वित्तीय हालात है। नौसिखिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार का बजटीय प्रबंधन इतना बुरा, वित्तीय स्थिति इतनी बदतर और परिस्थितियां इतनी भयावह है कि वित्तीय वर्ष 𝟐𝟎𝟐𝟔-𝟐𝟕 के मात्र तीन महीने ही बीते है और सामान्य मासिक पेंशन दिए जाने वाले जैसे रूटीन भुगतान और कार्यों के लिए भी आकस्मिक निधि से 3662 करोड़ रुपए की निकासी करनी पड़ रही है।