Bihar: 'बिहार में जब तक NDA सरकार रहेगी दीपक प्रकाश मंत्री रहेंगे', उपेंद्र कुशवाहा किससे और कहां ऐसा बोले?
बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर सारी बातें उनके पिता उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि कोई किसी भ्रम में नहीं रहें। दीपक प्रकाश को लेकर चल रही अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। आइये जानते हैं, उन्होंने क्या कहा?
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राष्ट्रीय लोक मोर्चा कोटे से दीपक प्रकाश मंत्री बने रहेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने साफ कह दिया है कि जब तक बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार रहेगी तब तक दीपक प्रकाश मंत्री रहेंगे। उन्होंने दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन यह बात अपने कार्यकर्ताओं से कही। कुशवाहा ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि किसी तरह के भ्रम में आने की जरूरत नहीं है। आपलोग निश्चिंत रहिए बिहार में जब तक NDA सरकार रहेगी दीपक प्रकाश मंत्री रहेंगे।
नीतीश कुमार की भी तारीफ की
दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा को आगामी कार्यकाल (2026-29) के लिए पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। पार्टी के संगठन चुनाव हेतु नामित राष्ट्रीय निर्वाची पदाधिकारी प्रमोद कुमार सुमन ने उपेन्द्र कुशवाहा को प्रमाण पत्र सौप कर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर पुन निर्वाचन की घोषणा की। उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के विकास में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में अभी और व्यापक कार्य किए जाने की आवश्यकता है। पार्टी ने बिहार में युवाओं के पलायन को रोकने तथा कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।
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कुशवाहा ने सरकार से क्या मांग की?
कुशवाहा ने न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु वर्तमान कॉलेजियम व्यवस्था की समीक्षा तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर भारतीय न्यायिक सेवा (Indian Judicial Service - IJS) के गठन की मांग दोहराई। पार्टी ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित होना चाहिए। अधिवेशन में वर्ष 2026 में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। पार्टी ने मांग की कि लोकसभा एवं राज्य की विधानसभा सीटों का निर्धारण वास्तविक जनसंख्या के आधार पर किया जाए तथा बिहार जैसे राज्यों को उनका न्यायसंगत राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले। साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों को उनकी वर्तमान जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की।