Bihar News: 90 दिनों बाद बिहार क्यों आ रहे राहुल गांधी? Gen Z को एकजुट कर मोदी सरकार के खिलाफ खोलेंगे मोर्चा
विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अब बिहार की राजनीति एक्टिव होने की तैयारी में है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिहार से बड़े अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। इसके लिए अभी से बिहार प्रदेश कांग्रेस की टीम तैयारी में जुट गई है।
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिहार से बड़े आंदोलन की शुरुआत करने जा रहे हैं। वह 11 जुलाई को पटना आएंगे। फोकस Gen Z यानी छात्रों पर रहेगा। कांग्रेस अभी से ही कार्यक्रम को सफल बनाने की तैयारी में जुट गई है। पटना में एक बड़े छात्र सम्मेलन की तैयारी है। राहुल गांधी Gen Z को एकजुट कर मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि चार परीक्षाएं (नीट, सीबीएसई, एसएससी और सीयूईटी) एक करोड़ बच्चे और एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई। मोदी सरकार दावा तो विश्वगुरु बनने के करती है लेकिन देश में एक परीक्षा नहीं ठीक से नहीं करवा सकती है। राहुल ने आरोपी लगााय कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है। राहुल गांधी ने कहा कि जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं। वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।
बेरोजगारी ने युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर दिया है
कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस सम्मेलन में छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों, युवा संगठनों, शिक्षकों तथा परीक्षा घोटालों से सीधे प्रभावित लोगों को एक मंच पर लाया जाएगा। केसी वेणुगोपाल का कहना है कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर दिया है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी अब राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी।
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छात्र सम्मेलन में क्या-क्या होगा?
कांग्रेज के नेताओं की मानें तो राहुल गांधी सम्मेलन के जरिए केंद्र सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखेंगे। इनमें मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET का डिसेंट्रलाइजेशन, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ली जाने वाली एग्जाम फीस को समाप्त करना, पेपर लीक रैकेट में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में उच्चतम स्तर पर जवाबदेही तय करना शामिल है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और भर्ती परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की जरूरत है।