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Bihar: नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट को लगा झटका? घाटे के चलते पुलिस लाइनों में बंद होगी 'दीदी की रसोई'

Sat, 01 Aug 2026 02:05 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Sat, 01 Aug 2026 02:05 PM IST
सार

बिहार पुलिस मुख्यालय ने पुलिस अकादमियों और पुलिस लाइनों में संचालित 'दीदी की रसोई' सेवाओं को जीविका ने बंद करने का फैसला लिया है। जीविका के सीईओ ने जारी पत्र में लगातार घाटा, बुनियादी ढांचे की कमी, भुगतान में देरी और नियमित कार्यादेश के अभाव को इसके प्रमुख कारण बताया है।

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Blow to Nitish Kumar Dream Project Didi Ki Rasoi Services Set to Shut Down Across Bihar Police Lines
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार - फोटो : Nitish Kumar Facebook

विस्तार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले 'जीविका' से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना पर बड़ा फैसला लिया गया है। बिहार पुलिस के विभिन्न कार्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों और पुलिस लाइनों में संचालित 'दीदी की रसोई' सेवाओं को बंद करने का राज्य स्तरीय निर्णय लिया गया है। इस संबंध में जीविका के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिमांशु शर्मा द्वारा जारी पत्र में गृह विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) को इसकी जानकारी दी गई है। पत्र के बाद प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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क्यों बंद हो रही है 'दीदी की रसोई'?
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 'अन्नपूर्णा जीविका फूड प्रोडक्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' के माध्यम से बिहार पुलिस मुख्यालय, विभिन्न पुलिस अकादमियों और पुलिस लाइनों में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था। इस पहल का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को गुणवत्तापूर्ण और घर जैसा भोजन उपलब्ध कराना, साथ ही ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना था। हालांकि, आंतरिक समीक्षा और संचालन संबंधी समस्याओं के बाद जीविका ने इन सेवाओं को बंद करने का निर्णय लिया है।
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पत्र में बताए गए प्रमुख कारण
  • लगातार आर्थिक घाटा: आंतरिक समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश पुलिस केंद्रों में संचालित रसोई इकाइयां लगातार घाटे में चल रही थीं।
  • बुनियादी ढांचे की कमी: पुलिस परिसरों में रसोई संचालन के लिए आवश्यक अधोसंरचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
  • बकाया भुगतान: पुलिस विभाग की ओर से बिलों का समय पर भुगतान नहीं होने के कारण जीविका समूहों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हुई।
  • नियमित कार्यादेश का अभाव: कई केंद्रों पर स्पष्ट और नियमित कार्यादेश के बिना ही रसोई संचालन कराया जा रहा था।
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सीईओ ने कहा- अब संचालन संभव नहीं
जीविका के मुख्य कार्यपालक अधिकारी हिमांशु शर्मा ने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि मौजूदा परिस्थितियों में पुलिस केंद्रों में इन रसोई इकाइयों का संचालन आगे जारी रखना संभव नहीं है। उन्होंने गृह विभाग से अनुरोध किया है कि सेवाएं बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित जीविका समूहों के सभी लंबित बकाया भुगतान का शीघ्र निपटारा किया जाए।

महिलाओं की आजीविका पर असर
इस निर्णय का प्रभाव राज्यभर में इन रसोई इकाइयों से जुड़ी बड़ी संख्या में जीविका दीदियों पर पड़ सकता है। वहीं, पुलिस विभाग में भोजन व्यवस्था को लेकर भी नए विकल्प तलाशने की आवश्यकता होगी।
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