Bankipur Election Result : एग्जिट पोल नहीं, जमीनी एक्सपर्ट से समझें- कौन जीत रहा बांकीपुर, किसका दावा कमजोर?
Bihar News : बिहार की जिस एक सीट पर उप चुनाव हुआ, उसका परिणाम सोमवार को आएगा। 30 जुलाई को मतदान के बाद से आए सारे एग्जिट पोल प्रशांत किशोर को जिता रहे। ग्राउंड पर दशकों काम कर चुके एक्सपर्ट पत्रकार तर्क के साथ बता रहे अनुमान। जानिए।
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बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम आने में दो दिन शेष हैं। लेकिन, जीत का दावा भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज के लगभग सभी नेता कर चुके हैं। भाजपा और राजद ने तो बाकायदा प्रेस वार्ता कर अपनी जीत का दावा किया। लेकिन, परिणाम क्या होगा? इस पर पूरी तरह से अनुमान लगाना फिलहाल मुश्किल लग रहा है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो भले ही तीनों दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर लें, लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और जन सुराज के बीच ही हुआ। मतदान के दिन भी बूथ पर इनके ही कार्यकर्ता दिखे। कैडर वोट और जातीय समीकरण के हिसाब से देखें तो भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को बढ़त नजर आ रही है, क्योंकि वह कायस्थ जाति से आते हैं। इस सीट पर कायस्थ वोटर 16 फीसदी से अधिक हैं। इतना ही नहीं, वैश्य समाज के मतदाताओं का झुकाव फिर से भाजपा की ओर देखा गया। इनकी आबादी बांकीपुर में 11 फीसदी है। जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा 1995 में इस इलाके से चुनाव लड़े थे, तब भी कायस्थ और वैश्य वोटबैंक ने उनका साथ दिया था। उनके निधन के बाद नितिन नवीन आए, उन्हें भी इस समीकरण का फायदा मिला। इस समीकरण का करीब 60 फीसदी वोट इन्हें मिला।
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा बताते हैं कि भाजपा के लिए यह प्रतिष्ठा की सीट बन गई थी। इसलिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार कैंप करते रहे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जैसे एनडीए के दिग्गज नेता इस चुनाव में उतरे। भाजपा ने अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में झोंक दी। बूथ पर इनके कार्यकर्ता होने का लाभ भी इन्हें मिलता दिख रहा है। कैडर वोटर का लाभ, कायस्थ, कोइरी, कुशवाहा और वैश्य समाज के वोट की मदद से यह चुनाव में बढ़त बनाते दिख रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रशांत किशोर ने 2025 के विधानसभा चुनाव में मिली हार से सीख लेते हुए जमीन पर पकड़ बनाई। उन्हें अपने चेहरे का लाभ मिला। भाजपा के दो प्रत्याशी उतारने, नितिन नवीन के बांकीपुर छोड़ने, छात्र आंदोलन, राम मंदिर चंदा चोरी जैसे मुद्दों का लाभ उन्होंने उठाया। बुद्धिजीवी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहे। अगड़ी जातियों में ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत वोटरों का झुकाव प्रशांत किशोर की ओर दिखा। इन तीनों जातियों का वोट प्रतिशत करीब 21 फीसदी है। सब्जीबाग इलाके के मुस्लिम वोटरों के बीच भी प्रशांत किशोर ने अच्छी सेंध लगाई। अगर पांच फीसदी मुसलमानों ने इन्हें वोट दिया होगा, तो प्रशांत किशोर को बढ़त मिल सकती है।
पूरे चुनाव में राजद मजबूती से नजर नहीं आया
वहीं राजद इस चुनाव में तीसरे नंबर पर आता दिख रहा है। तेजस्वी यादव देर से चुनावी मैदान में उतरे। कांग्रेस और वामदल का भी अच्छा सहयोग नहीं मिला। वामदल के वोटर सिपारा इलाके में हैं, लेकिन इनका झुकाव प्रशांत किशोर की ओर देखने को मिला। तेजस्वी यादव किस आधार पर अपनी जीत का दावा कर रहे हैं? यह समझ से परे है। यादव समाज के मतदाताओं ने राजद को वोट जरूर दिया है, लेकिन पूरे चुनाव में राजद उतनी मजबूती से नजर नहीं आया। वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि मुख्य रूप से इस चुनाव में दो चेहरे ही दिखे—एक नितिन नवीन और दूसरे प्रशांत किशोर। लड़ाई भी इन्हीं दोनों के बीच है। फिलहाल भाजपा को जातीय समीकरण और कैडर वोट का लाभ मिलता दिख रहा है।
मतदान कम हुआ, महिलाओं में भी उदासीनता
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा बताते हैं कि इस बार पिछले चुनाव से 26 हजार कम मतदान हुआ। 2025 में 1,56,647 वोट पड़े थे, जबकि इस बार महज 1,30,234 वोट पड़े। इतना ही नहीं, महिला मतदाताओं की संख्या में गिरावट आई। पिछली बार 18 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया था, इस बार महज 14 फीसदी। इसका असर रिजल्ट पर जरूर पड़ेगा।
किस दल ने किस पर क्या आरोप लगाया?
जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने इस चुनाव में भाजपा पर अपने प्रत्याशियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमारे 20 कार्यकर्ताओं को बेवजह हिरासत में लिया गया। मतदाताओं को भड़काया गया। बूथ पर पोलिंग एजेंटों को पुलिस के जरिए परेशान किया गया, साथ ही मतदान को प्रभावित करने की भी कोशिश की गई। लोकतंत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए।
वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने आरोप लगाया कि इस चुनाव में जन सुराज और राजद के बीच साइलेंट अंडरस्टैंडिंग देखने को मिली। कई मतदान केंद्रों पर राजद और जन सुराज के बीच अच्छा तालमेल था। जन सुराज ने पूरे चुनाव में तेजस्वी यादव पर कोई टिप्पणी नहीं की। राजद की ओर से भी जन सुराज को टारगेट नहीं किया गया। इससे साफ है कि भाजपा के खिलाफ यह लोग एकजुट हुए, लेकिन जनता ने इन्हें आईना दिखा दिया।
इधर, राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि राजद को दो-दो भाजपा प्रत्याशियों से लड़ना पड़ा—एक असली और दूसरा पोसुवा। उन्होंने आरोप लगाया कि जन सुराज भाजपा की बी-टीम है। इसलिए राजद के प्रभाव वाले क्षेत्र के मतदाताओं को डराने का काम किया गया। राजद को रोकने के लिए इन दोनों दलों ने गठबंधन कर लिया था। लेकिन, इसके बावजूद राजद के मतदाता नहीं डिगे और चुपचाप लालटेन छाप को अपना वोट दिया।
2025 के विधानसभा चुनाव में क्या परिणाम आया था?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र (संख्या-182) से भारतीय जनता पार्टी के नितिन नवीन ने लगातार एक और जीत दर्ज करते हुए 98,299 वोट (62.66% वोट शेयर) हासिल किए। राष्ट्रीय जनता दल की रेखा कुमारी को 46,363 वोट (29.55% वोट शेयर) मिले और वह दूसरे स्थान पर रहीं। वहीं प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की वंदना कुमारी को 7,717 वोट (4.92% वोट शेयर) प्राप्त हुए, जबकि अन्य उम्मीदवारों और नोटा को शेष वोट मिले। नितिन नवीन ने रेखा कुमारी को 51,936 वोटों के बड़े अंतर से हराकर सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा। भाजपा प्रत्याशी नितिन नवीन और जन सुराज प्रत्याशी वंदना कुमारी के बीच वोटों का अंतर 90,582 था। वहीं वोट शेयर का अंतर 57.74 प्रतिशत अंक था।