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Bihar : नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा के बीच शराबबंदी पर उठा सवाल, इस नेत्री ने क्यों कहा ऐसा?

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Krishan Ballabh Narayan Updated Thu, 05 Mar 2026 09:51 PM IST
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सार

Bihar : नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा जाने के लिए अपना नामांकन किया। इस दौरान जदयू के कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी खुलकर सामने आई, लेकिन
इन सब बातों के बीच एक राजनीतिक नेत्री ने शराबबंदी को समाप्त करने की चर्चा तेज कर दी है। 

Former RJD party Ritu Jaiswal targeted liquor ban in bihar Nitish Kumar news Nitish Kumar files nomination
राजद की पूर्व नेत्री रितु जायसवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावनाओं की चर्चा के बीच बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है। इस मुद्दे पर पूर्व राजद नेत्री ऋतू जायसवाल सवाल उठाया है कि क्या बिहार में शराबबंदी खत्म करने की तैयारी चल रही है? उन्होंने यह बात सोशल मीडिया पर लिखा है। 

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रितु जायसवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि क्या बिहार में शराबबंदी खत्म करने की तैयारी है? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चाओं के बीच बिहार की राजनीति में एक नया सवाल उठ रहा है—क्या यह सब कहीं शराबबंदी खत्म करने की रणनीति का हिस्सा तो नहीं? पिछले कुछ दिनों से कई नेताओं के बयान सामने आए हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि शराबबंदी से बिहार को कोई खास फायदा नहीं हुआ और इससे राज्य को राजस्व का नुकसान हो रहा है।

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दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि विधानसभा चुनाव से पहले जीविका दीदियों को दी गई आर्थिक सहायता के बाद राज्य का खजाना दबाव में है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या राजस्व बढ़ाने के लिए शराबबंदी खत्म करने की जमीन तैयार की जा रही है। यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के रहते शराबबंदी खत्म करना आसान नहीं था, क्योंकि यह उनके राजनीतिक और सामाजिक सम्मान से जुड़ा फैसला रहा है। ऐसे में कुछ लोग मानते हैं कि इसी वजह से उन्हें धीरे-धीरे साइडलाइन करने की कोशिश की जा रही है।
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लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन का है। जब शराबबंदी लागू हुई थी, तब गांव–गांव की महिलाओं ने इसे राहत के रूप में महसूस किया था। घरेलू हिंसा, झगड़े और परिवारों की आर्थिक बर्बादी जैसे मामलों में कमी की उम्मीद बनी थी। आज भी जब शराबबंदी लागू है, तब अपराध की घटनाएं सामने आती रहती हैं—ऐसे में अगर खुले तौर पर शराब की बिक्री शुरू हो जाए तो हालात क्या होंगे, इसकी कल्पना करना कठिन नहीं है।

अगर विकास की बात करें तो गुजरात जैसे राज्य में आज भी शराबबंदी लागू है और वह आर्थिक रूप से मजबूत राज्यों में गिना जाता है। इसलिए सवाल यह है कि क्या किसी राज्य की तरक्की का रास्ता सिर्फ शराब से होकर गुजरता है? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी यही उम्मीद है कि बिहार को 2005 से पहले के दौर में नहीं, बल्कि विकास, रोजगार और मजबूत व्यवस्था के रास्ते पर आगे बढ़ाया जाए। बिहार को शराब नहीं, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित समाज चाहिए।
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