IIT Patna: पटना हाईकोर्ट का आदेश IIT को नहीं मिला! क्या है फाउंडेशन एकेडमी का विवाद? जानें पूरा मामला
Patna High Court : आईआईटी पटना और बिहार के हाईकोर्ट की दूरी 41-42 किलोमीटर है। इस जमाने में जब सबकुछ ऑनलाइन है तो हाईकोर्ट का आदेश देखने में भी कुछ सेकंड लगते हैं। ऐसे में आईआईटी को पटना हाईकोर्ट का आदेश पता न चला हो, यह संभव नहीं। लेकिन, मामला गरम है।
विस्तार
आईआईटी पटना चर्चा में है। इस बार पढ़ाई के कारण नहीं, परिसर में शुरुआत से चल रहे एक शैक्षणिक संस्थान को लेकर। आईआईटी के साथ 33 साल का करार था। लेकिन, पहले ही उसे तोड़कर वहां उसी शैक्षणिक संस्थान के सेटअप में केंद्रीय विद्यालय शुरू कराने को लेकर हंगामा शुरू हो गया। तनातनी ने बड़े विवाद का रूप लिया। पुलिस की दखल से बंद कराए गए शैक्षणिक संस्थान ने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने उसकी दलीलों के पक्ष में तत्काल फैसला सुनाया। लेकिन, अब आरोप है कि आईआईटी पटना हाईकोर्ट के फैसले की अवमानना कर रहा है। मामला आईआईटी और हाईकोर्ट का है, इसलिए गरमाया हुआ है। जानिए, क्या कब हुआ और आगे क्या हो रहा?
बताया जा रहा है कि विवाशवान एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी (VEWS) और आईआईटी पटना के बीच वर्ष 2016 में हुए समझौते के तहत 33 वर्षों तक परिसर में शिक्षा संचालन की अनुमति दी गई थी, जिसके आधार पर फाउंडेशन एकेडमी स्कूल की स्थापना की गई थी। वर्ष 2021 में आईआईटी पटना ने एक नोटिस जारी कर स्कूल संचालन की अनुमति केवल वर्ष 2028 तक सीमित करने की बात कही थी। उस समय संस्थान की ओर से स्कूल द्वारा दी जा रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सराहना भी की गई थी। हालांकि, पिछले एक वर्ष से स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि लगातार कक्षाएं संचालित करने में बाधाएं उत्पन्न की जाने लगीं।
स्कूल को लॉक और सील करवा दिया
बताया गया कि 16 मार्च को प्रमुख समाचार पत्रों में एक पंपलेट प्रकाशित कर 31 मार्च से स्कूल बंद करने की सूचना दी गई। इसके बाद 19 मार्च 2026 को आईआईटी पटना ने ईमेल के जरिए फाउंडेशन एकेडमी को 30 मार्च तक स्कूल बंद करने का निर्देश दिया। संस्थान का आरोप था कि स्कूल ने समझौते का उल्लंघन किया है, जिसे स्कूल प्रबंधन ने सिरे से खारिज कर दिया। 22 मार्च को एक बार फिर समाचार पत्रों में प्रकाशन के माध्यम से स्कूल बंद करने की बात कही गई। आरोप है कि 30 मार्च को आईआईटी पटना के रजिस्ट्रार प्रो. अवलेन्द्र के. ठाकुर ने प्रशासन की मदद से स्कूल परिसर में पुलिस बल तैनात कराया और अधिकारियों की टीम भेजकर स्कूल को लॉक और सील करवा दिया।
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फाउंडेशन एकेडमी ने दायर की थी याचिका
आईआईटी प्रबंधन के आवेदन पर प्रशासन की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद फाउंडेशन एकेडमी ने हाईकोर्ट का रुख किया था।फाउंडेशन एकेडमी की ओर से पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसके हाईकोर्ट ने तत्काल प्रशासन की कार्रवाई रोक का आदेश दे दिया। न्यायालय ने आदेश दिया कि स्कूल बिना किसी बाधा के संचालित होगा और एक अप्रैल 2026 से नया सत्र शुरू किया जाएगा। इधर, स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि आईआईटी प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया गया और छात्रों, अभिभावकों तथा शिक्षकों को परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इतना ही नहीं, फाउंडेशन एकेडमी के परिसर में केंद्रीय विद्यालय का बोर्ड लगाकर कक्षाएं भी शुरू कर दी गई हैं।
करोड़ों की संपत्ति का भी उपयोग किया जा रहा है
स्कूल प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया है कि उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति जैसे बेंच, डेस्क और ब्लैकबोर्ड का उपयोग किया जा रहा है, जबकि यह सामग्री पहले से सील की गई थी। बिना किसी औपचारिक समझौते या विवाद के निपटारे के इसे दूसरे संस्थान को सौंप दिया गया है। आईआईटी की इस कार्रवाई से लगभग 800 छात्र और 100 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।
'परिसर में निजी विद्यालय के परिचालन की अनुमति नहीं'
इस बारे में आईआईटी निदेशक से संपर्क का प्रयास किया गया तो वह बिहार से बाहर बताए गए। रजिस्ट्रार और जनसंपर्क अधिकारी के नंबर पर कॉल रिसीव नहीं हुआ। हालांकि, आईआईटी सूत्रों के अनुसार पटना हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी मिलने के बाद संस्थान ने केंद्र सरकार के उस फैसले की प्रति कोर्ट को समर्पित करने की तैयारी की है, जिसमें स्पष्ट है कि केंद्रीय विद्यालय शुरू होने के बाद परिसर में निजी विद्यालय के परिचालन की अनुमति नहीं है। संस्थान ने अपनी दलील में यह भी जिक्र किया है कि 2001 के उस फैसले के बाद फाउंडेशन स्कूल को पांच साल की मोहलत के साथ नोटिस दिया था।
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