Bihar: सरकारी अस्पताल में फ्रैक्चर पीड़िता को नहीं मिली व्हीलचेयर, विभाग-दर-विभाग पति पीठ पर ढोता रहा पत्नी
Rohtas News: रोहतास के सदर अस्पताल सासाराम में व्हीलचेयर न मिलने पर साहेब राम को अपनी फ्रैक्चर पीड़ित पत्नी को पीठ पर ढोना पड़ा। पहले दिन डॉक्टर नहीं मिले, दूसरे दिन सुविधा नहीं मिली। अस्पताल की व्यवस्थाओं पर फिर सवाल उठे।
विस्तार
रोहतास जिले के सदर अस्पताल सासाराम से सोमवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए। ओपीडी में अपनी पत्नी के फ्रैक्चर पैर का इलाज कराने पहुंचे एक व्यक्ति को व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूर पति अपनी भारी-भरकम पत्नी को पीठ पर लादकर एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाता रहा। उसके चेहरे पर बेबसी साफ झलक रही थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होने की बात भी उठ रही है।
पहले दिन चिकित्सक नहीं मिले, दूसरे दिन व्हीलचेयर का अभाव
धनकाढा गांव निवासी पीड़ित साहेब राम के अनुसार वे एक दिन पूर्व भी अपनी पत्नी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन चिकित्सकों की गैर मौजूदगी के कारण घंटों इंतजार करने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। इसके बाद सोमवार को जब वे दोबारा अस्पताल आए तो व्हीलचेयर की मांग करने पर भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। पहले दिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति और दूसरे दिन व्हीलचेयर की कमी के कारण उन्हें लगातार परेशानी झेलनी पड़ी।
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फ्रैक्चर के बाद चलने में असमर्थ पत्नी
साहेब राम ने बताया कि पिछले रविवार को उनकी पत्नी का पैर फ्रैक्चर हो गया था, जिसके बाद वे इलाज के लिए अस्पताल आए। पत्नी पूरी तरह चलने-फिरने में असमर्थ है। अस्पताल में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर के लिए उन्होंने काफी प्रयास किया, लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों ने ओपीडी में व्हीलचेयर नहीं होने की बात कही। लाचारी में उन्हें अपनी पत्नी को कभी एक्स-रे कक्ष तो कभी डॉक्टर के चैंबर तक पीठ पर ढोकर ले जाना पड़ा।
व्यवस्थाओं पर उठते सवाल
सदर अस्पताल में लापरवाही और संवेदनहीनता की यह पहली घटना नहीं बताई जा रही है। इससे पहले भी मरीजों को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधाएं न मिलने की तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। चिकित्सकों के देर से आने, दवाओं की कमी, दलालों की मौजूदगी और जांच के लिए मरीजों को बाहर भेजे जाने जैसी समस्याएं भी समय-समय पर चर्चा में रही हैं। इन परिस्थितियों के बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग उठती रही है।
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