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Bihar: सरकारी आवासीय विद्यालयों में खाली सीटें गिनकर अफसर भी हैरान; अब SC-ST के लिए सरकार ने खोजा नया रास्ता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Sat, 31 Jan 2026 03:56 PM IST
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सार

SC-ST Welfare: बिहार के SC-ST हॉस्टल के बच्चों के काफी सीटें खाली हैं। शिक्षकों का भी अभाव है। नीतीश सरकार ने TRE 4 के जरिए इन स्कूलों में शिक्षकों की बहाली की तैयारी में हैं। इसके अलावा कई और काम सरकार की ओर से किए जा रहे हैं। 

Many seats for students are vacant in SC-ST hostels vacant teaching positions will be filled through TRE 4.
सरकारी छात्रावासों को निरक्षण करते मंत्री लखेंद्र रोशन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नीतीश सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों खूब फोकस कर रही है। इन्हें को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसकी पूरी कोशिश कर रही है। लेकिन, सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लिए खोले गए आवासीय विद्यालय में जितने सीटें एडमिशन के लिए आवंटित की, वह भर नहीं पा रही है। इतनी बड़ इसके अनुसार, बिहार में 91 डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय हैं। इनमें कक्षा 1 से 12 तक कुल 8,673 सीटें खाली हैं। इन आवासीय विद्यालयों की कुल स्वीकृत क्षमता 44,240 है। इसमें वास्तविक आवासीय क्षमता 37,875 है। इन विद्यालयों में महज 29,202 छात्रों का ही एडमिशन हो पाया है। अगर कक्षावार देखें तो सबसे अधिक 11वीं और 12वीं में सीटें खाली हैं। सरकार की ओर से चलाए जा रहे जागरुकता अभियान के बावजूद पर्याप्त संख्या छात्र इन हॉस्टलों में रहने नहीं आ रहे। हालांकि, मंत्री लखेंद्र रौशन ने यह जरूर कहा कि अधिक से अधिक बच्चे पढ़ाई के लिए हॉस्टल में आएं, इसकी हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। 

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जानिए किस कक्षा में कितनी सीटें खाली हैं

  • कक्षा 1 में 404
  • कक्षा 2 में 317
  • कक्षा 3 में 197
  • कक्षा 4 में 161
  • कक्षा 5 में 268
  • कक्षा 6 में 459
  • कक्षा 7 में 226
  • कक्षा 8 में 287
  • कक्षा 9 में 291
  • कक्षा 10 में 297 
  • कक्षा 11 में 2710
  •  कक्षा 12 में 3,056 सीटें खाली पाई गईं।


इन स्कूलों में शिक्षकों की भी कमी
अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों के लिए खोले गए 91 आवासीय विद्यालय में शिक्षकों की भी काफी कमी है। इन स्कूलों के लिए 3456 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 1326 पदों पर ही शिक्षक काम कर रहे हैं। 2130 पद खाली हैं। मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम चल रहा है। बिहार लोक सेवा आयोग के जरिए शिक्षकों की निुयक्ति की जा रही ह। चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE 4) के तहत शिक्षकों की भर्ती के लिए बिहार लोक सेवा आयोग को अधियाचना भेज दी गई है। 

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वर्ग 10 तक के छात्रों की छात्रवृति दोगुनी कर दी गई
विभाग के सचिव संदीप कुमार आर पुडकलकट्टी ने बताया कि विभाग इनके उत्थान के लिए कई तरह के योजनाएं चला रही है जिससे इनके विकास को गति मिल रहा है। इस कड़ी में अबतक 139 छात्रावास संचालित है एवं 60 नए छात्रावासों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से कुछ जगहों पर निर्माण कार्य प्रारंभ है। इसके अलावा जिन 136 प्रखंडों में एससी-एसटी की आबादी 30 हजार से अधिक है और वहां कोई छात्रावास नहीं है, वहां 100 बेड वाले नए नए छात्रावासों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है।  प्रत्येक जिले में 100 बेड वाली सावित्री बाई फुले छात्रावास खोलने की भी योजना है। इसके लिए 18 जिलों में भूमि आवंटित की जा चुकी है, और कुछ जगहों पर कार्य शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि प्री मैट्रिक छात्रवृति योजना के तहत वर्ग 1 से लेकर 10 तक के छात्रों की छात्रवृति दोगुनी कर दी गई है। वहीं, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति योजना के तहत आईटीआई के लिए 75 सौ रुपये, डिप्लोमा/पॉलिटेक्निक एवं अन्य समकक्ष कोर्स के लिए 15 हजार रुपये, व्यावसायिक तकनीकी शिक्षण कोर्स के लिए 25 हजार रुपये बढाई गई है।
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मैट्रिक और इंटर में बेहतर रिजल्ट पर इतने रुपये मिलते हैं
मुख्यमंत्री मेधावृत्ति योजना के अंतर्गत मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। 10वीं कक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने पर 10 हजार रुपये और द्वितीय श्रेणी से पास होने पर 8 हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं 12वीं कक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण छात्राओं को 15 हजार रुपये और द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण छात्राओं को 10 हजार रुपये की राशि दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना से कुल 1 लाख 53 हजार 506 छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए हैं।

परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाता है
इसके अलावा परीक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शामिल होने वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। परीक्षा शुल्क की प्रतिपूर्ति विभाग की ओर से सीधे बोर्ड को की जाती है।

सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा पास करने पर इतनी राशि मिलती है
प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना भी लागू की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पास करने पर 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। बिहार लोक सेवा आयोग की संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा पास करने पर 50 हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे आईईएस, आईजीएस, आईएसएस, एनडीए, सीडीएस, बैंकिंग पीओ, एसएससी सीजीएल और आरआरबी जैसी परीक्षाओं में सफलता पर 30 हजार से 75 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

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