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Bihar: करोड़ों की इमारतें पर सर्जन, मानसिक रोग व आंख के डॉक्टर नहीं; अस्पताल की इस हालत का कौन है जिम्मेदार?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी Updated Fri, 30 Jan 2026 11:55 AM IST
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सार

बाढ़ अनुमंडल में करोड़ों रुपये खर्च कर बने अस्पतालों के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी के कारण पीएचसी, सीएचसी और अनुमंडलीय अस्पताल केवल रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं, जिससे मरीजों को इलाज के लिए पटना भेजा जा रहा है।

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यहां स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। - फोटो : अमर उजाला
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बाढ़ अनुमंडल में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए करीब 50 करोड़ रुपये खर्च कर पीएचसी, सीएचसी और अनुमंडलीय अस्पतालों की इमारतें तो खड़ी कर दी गईं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये सभी स्वास्थ्य संस्थान केवल रेफरल अस्पताल बनकर रह गए हैं। गंभीर ही नहीं, बल्कि सामान्य मामलों के मरीजों को भी तत्काल पटना रेफर कर दिया जाता है। इसके चलते इलाज में देरी से कई मरीजों की रास्ते में या इलाज के दौरान मौत हो रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग व्यवस्था सुधारने में नाकाम नजर आ रहा है।

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सुविधाओं का घोर अभाव
अनुमंडलीय अस्पताल बाढ़ पर करीब 10 लाख आबादी की स्वास्थ्य जिम्मेदारी है। यहां हर महीने सैकड़ों पोस्टमार्टम होते हैं, लेकिन ओपीडी में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड, दांतों का एक्स-रे, आंखों की जांच जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। इमरजेंसी में भी प्राथमिक उपचार के अलावा कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। शरीर के किसी हिस्से में हल्की चोट या फ्रैक्चर होने पर भी मरीजों को पटना रेफर कर दिया जाता है।

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करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से बने नए भवन में सुविधाओं के अभाव के कारण मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं।

प्रसव सेवाएं भी बेहाल
अस्पताल के प्रसव विभाग में सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। केवल सामान्य प्रसव के मामलों को रखा जाता है, जबकि थोड़ी भी जटिलता होने पर महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है। आरोप है कि विभाग के आसपास दलाल सक्रिय रहते हैं, जो प्रसूता के परिजनों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाते हैं, जिससे निजी संस्थानों को मोटी कमाई होती है।

डॉक्टरों की भारी कमी
उपाधीक्षक विनय कुमार चौधरी ने बताया कि अस्पताल में हड्डी रोग, मानसिक रोग और नेत्र रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। एक सर्जन थे, जिनका तबादला आरा हो गया है। हड्डी रोग विशेषज्ञ ने ज्वाइन करने के बाद से अस्पताल आना ही बंद कर दिया है, जिसकी लिखित सूचना विभाग को दी जा चुकी है। सभी विभागों में डॉक्टरों की कमी को लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है।


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विधायक निरीक्षण पर उठे सवाल
गुरुवार को बाढ़ विधायक डॉ. सियाराम सिंह ने बेलछी पीएचसी का निरीक्षण किया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान सभी व्यवस्थाएं ठीक दिखाई गईं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

'रेफरल अस्पताल नहीं, बल्कि रेफर अस्पताल’ कहना चाहिए'
वहीं, बाढ़ के वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार अंशु ने कहा कि इसे रेफरल अस्पताल नहीं, बल्कि ‘रेफर अस्पताल’ कहना चाहिए। यहां हल्के घायल मरीजों को भी सीधे पटना भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की बिल्डिंग भले ही चकाचक हो, लेकिन व्यवस्था बदहाल और बदबूदार है। मई 2024 में मुख्यमंत्री ने इस अस्पताल का उद्घाटन किया था। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से भवन और करीब 5 करोड़ रुपये की मशीनें लगाई गईं, इसके बावजूद अस्पताल खुद बीमार है।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि रात के समय प्रसव विभाग में एक भी महिला डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहती। सिजेरियन की सुविधा न होने से प्रसूताओं को पटना या निजी अस्पताल जाना पड़ता है। कागजों में दो दर्जन डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन शिफ्ट आधारित ड्यूटी के कारण कई रोगों का इलाज ओपीडी में भी संभव नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि बिना ठोस सुधार के यह अस्पताल केवल दिखावटी विकास का उदाहरण बनकर रह गया है।

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