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Bihar: बिहार के ‘गोट मैन’ प्रो. संजीव कुमार को मिलेगा ट्रूली इंडियन अवॉर्ड, इटली में मिलेगा सम्मान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Thu, 26 Mar 2026 04:40 PM IST
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सार
प्रो. संजीव कुमार को इंडो यूरोपियन एक्सिलेंस फोरम द्वारा ‘ट्रूली इंडियन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और बकरी पालन आधारित आजीविका मॉडल के जरिए किए गए उनके योगदान के लिए दिया जा रहा है।
प्रो. संजीव कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगाने वाले प्रो. संजीव कुमार को “इंडो यूरोपियन एक्सिलेंस फोरम” की ओर से प्रतिष्ठित “ट्रूली इंडियन पुरस्कार” से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और बकरी आधारित आजीविका मॉडल के जरिए किए गए उनके खास योगदान के लिए दिया जा रहा है।
इटली के मिलान में होगा सम्मान समारोह
यह पुरस्कार इस साल अक्टूबर में इटली के मिलान शहर में होने वाले एक कार्यक्रम में दिया जाएगा। फोरम अगले एक महीने में भारत और यूरोप से अलग-अलग श्रेणियों में कुल चार खास लोगों का चयन करेगा, जिसमें प्रो. संजीव कुमार को उनके प्रेरणादायक काम के आधार पर चुना गया है। इस सम्मान की घोषणा फोरम के पूर्व अध्यक्ष एमिलियानो चीएज़्ज़ी और वर्तमान अध्यक्ष प्रो. आशीष यादव ने की। इस मौके पर प्रो. आशीष यादव ने कहा कि प्रो. संजीव कुमार का बकरी आधारित आजीविका कार्यक्रम और ग्रामीण समाज के लिए उनका समर्पण सशक्तिकरण, स्थायित्व और सकारात्मक बदलाव का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने उन्हें इस सम्मान के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
बिहार के दियारा क्षेत्र से निकले, बने प्रेरणा
बिहार के भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड के सोनावर्षा जैसे दियारा क्षेत्र से निकलकर प्रो. संजीव कुमार ने वैश्विक पहचान बनाई है। आज वे लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। हर साल बाढ़ और कमी से जूझने वाले इस इलाके की मुश्किलों ने उनके अंदर समाज के लिए कुछ करने का मजबूत इरादा पैदा किया। साल 2008 में उन्होंने “द गोट ट्रस्ट” की स्थापना की और बकरी पालन को एक मजबूत और टिकाऊ आजीविका के रूप में आगे बढ़ाया। उनके प्रयासों से आज देश के कई राज्यों में लाखों परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। खासकर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का एक मजबूत आधार मिला है।
ये भी पढ़ें: साहिबगंज कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, हाई अलर्ट पर पूरा इलाका
गांव-गांव पहुंच रहीं ‘पशु सखियां’
उनकी इस पहल के तहत हजारों “पशु सखियां” गांव-गांव जाकर बकरी पालने वालों को प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी जानकारी दे रही हैं। इससे यह क्षेत्र अब एक संगठित काम के रूप में विकसित हो रहा है। प्रो. संजीव कुमार की कहानी सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, संवेदना और मजबूत इरादे की कहानी है। आज उन्हें “भारत के गोट मैन” के रूप में जाना जाता है। यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों का भी है, जिनके जीवन में उन्होंने नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है।
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इटली के मिलान में होगा सम्मान समारोह
यह पुरस्कार इस साल अक्टूबर में इटली के मिलान शहर में होने वाले एक कार्यक्रम में दिया जाएगा। फोरम अगले एक महीने में भारत और यूरोप से अलग-अलग श्रेणियों में कुल चार खास लोगों का चयन करेगा, जिसमें प्रो. संजीव कुमार को उनके प्रेरणादायक काम के आधार पर चुना गया है। इस सम्मान की घोषणा फोरम के पूर्व अध्यक्ष एमिलियानो चीएज़्ज़ी और वर्तमान अध्यक्ष प्रो. आशीष यादव ने की। इस मौके पर प्रो. आशीष यादव ने कहा कि प्रो. संजीव कुमार का बकरी आधारित आजीविका कार्यक्रम और ग्रामीण समाज के लिए उनका समर्पण सशक्तिकरण, स्थायित्व और सकारात्मक बदलाव का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने उन्हें इस सम्मान के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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बिहार के दियारा क्षेत्र से निकले, बने प्रेरणा
बिहार के भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड के सोनावर्षा जैसे दियारा क्षेत्र से निकलकर प्रो. संजीव कुमार ने वैश्विक पहचान बनाई है। आज वे लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। हर साल बाढ़ और कमी से जूझने वाले इस इलाके की मुश्किलों ने उनके अंदर समाज के लिए कुछ करने का मजबूत इरादा पैदा किया। साल 2008 में उन्होंने “द गोट ट्रस्ट” की स्थापना की और बकरी पालन को एक मजबूत और टिकाऊ आजीविका के रूप में आगे बढ़ाया। उनके प्रयासों से आज देश के कई राज्यों में लाखों परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। खासकर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का एक मजबूत आधार मिला है।
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गांव-गांव पहुंच रहीं ‘पशु सखियां’
उनकी इस पहल के तहत हजारों “पशु सखियां” गांव-गांव जाकर बकरी पालने वालों को प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी जानकारी दे रही हैं। इससे यह क्षेत्र अब एक संगठित काम के रूप में विकसित हो रहा है। प्रो. संजीव कुमार की कहानी सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, संवेदना और मजबूत इरादे की कहानी है। आज उन्हें “भारत के गोट मैन” के रूप में जाना जाता है। यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों का भी है, जिनके जीवन में उन्होंने नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है।