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Bihar News: जब सत्ता खिसकती है, तो बदल जाते हैं चेहरों के रंग; शिवानंद तिवारी ने किस नेता के लिए कह दी यह बात?
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Krishan Ballabh Narayan
Updated Mon, 01 Jun 2026 03:54 PM IST
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सार
Bihar : शिवानंद तिवारी आज बिहार की राजनीति में कहीं नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर अपने राजनीतिक अनुभावों को साझा करते हुए बिहार की राजनीति के साथ बंधे दिखते हैं। अज उन्होंने पूर्व सीएम नीतीश कुमार और आज के राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी की है।
शिवानंद तिवारी और नीतीश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार की राजनीति के दिग्गज और वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने सत्ता के बदलते मिजाज और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को लेकर एक बेहद विचारणीय टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि समय के साथ राजनीति में बहुत कुछ बदल जाता है। कभी बिहार की हर बड़ी खबर का मुख्य चेहरा रहने वाले नीतीश कुमार अब पहले की तरह मीडिया की सुर्खियों के केंद्र में नहीं हैं।
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सत्ता का प्रभाव अलग, पर कोई भी सदा के लिए नहीं
शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऐसा नहीं है कि नीतीश कुमार राजनीति से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के कारण आज भी बिहार की सरकार और सियासत पर उनका गहरा प्रभाव है। वर्तमान सरकार भी बहुत हद तक उनकी राजनीतिक विरासत और समर्थन के दम पर ही चल रही है। इसके बावजूद, सीधे तौर पर सत्ता शीर्ष पर रहने का जो प्रभाव होता है, वह कुछ अलग ही होता है।
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राजनीति की असली हकीकत क्या है?
उन्होंने प्रशासनिक उदाहरण देते हुए कहा कि कलेक्टर और कमिश्नर दोनों ही बड़े अधिकारी होते हैं, लेकिन जनता और नेताओं की भीड़ हमेशा वहीं दिखती है, जहाँ तत्काल फैसले लेने की ताकत होती है। राजनीति का भी यही सच है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति सत्ता के शीर्ष पर होता है, तो तरह-तरह के लोग उसके आसपास जमा रहते हैं। कोई काम निकलवाने आता है, कोई प्रभाव दिखाने, तो कोई सिर्फ मुख्यमंत्री के साथ एक फ्रेम में दिखने की कोशिश करता है। आज इनमें से कई चेहरे किसी दूसरे सत्ता केंद्र के पास नजर आते हैं। यही राजनीति की असली हकीकत है।
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कुछ ही घंटों में गायब हो गई थी भीड़
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए शिवानंद तिवारी ने एक ऐतिहासिक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन दिनों मैं आर-ब्लॉक में रहता था और सरदार हरिहर सिंह बिहार के मुख्यमंत्री थे। एक दिन सुबह जब मैं उनके घर के सामने से गुजरा, तो रोज की तरह वहाँ भारी भीड़, तंबू और चहल-पहल थी। लेकिन उसी रात करीब साढ़े नौ बजे जब मैं उधर से लौटा, तो पूरा इलाका सुनसान था। गेट के पास पुलिया पर सिर्फ एक कर्मचारी बैठा था। बाद में पता चला कि उसी दोपहर उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था। दिनभर की जो भीड़ थी, वह कुछ ही घंटों में गायब हो गई।
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लालू, नीतीश या सम्राट चौधरी... सत्ता किसी की स्थायी नहीं
शिवानंद तिवारी ने मौजूदा दौर के नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि सत्ता का सबसे बड़ा भ्रम तब होता है, जब किसी को लगने लगता है कि यह हमेशा रहने वाली है। चाहे वह नीतीश कुमार हों, लालू प्रसाद यादव हों, सम्राट चौधरी हों या कोई और। अगर किसी को भी यह गुमान हो जाए कि सत्ता हमेशा उनके पास रहेगी, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल है। इतिहास गवाह है कि कुर्सी कभी किसी की स्थायी नहीं रही। हर किसी को एक न एक दिन पद छोड़ना ही पड़ता है।
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कुर्सी जाती है, सिर्फ काम याद रहता है
शिवानंद तिवारी ने आगे लिखा है कि राजनीति और प्रशासन में केवल व्यक्ति का काम ही जीवित रहता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई या जनकल्याण के क्षेत्र में ऐसा काम किया है जिससे लोगों की जिंदगी आसान हुई हो, तो लोग उसे पीढ़ियों तक याद रखते हैं। उसी तरह प्रशासन में भी यही नियम लागू होता है। उन्होंने आरा के तत्कालीन डीएम मनोज श्रीवास्तव का उदाहरण देते हुए कहा कि कि जब मनोज श्रीवास्तव का तबादला हुआ था, तब जनता ने महीनों आंदोलन किया था। आज वे इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन लोग आज भी उन्हें पूरे सम्मान के साथ याद करते हैं।