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Bihar News: गुरु के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक! दारोगा राय ने गुरु के नाम पर कॉलेज कराई स्थापना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Mon, 26 Jan 2026 09:13 AM IST
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सार
राजनीति में स्वार्थ के बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय ने गुरु-शिष्य परंपरा को सजीव रखते हुए अपने गुरु के नाम पर परसा में कॉलेज की स्थापना की। यह कदम केवल कृतज्ञता नहीं, बल्कि क्षेत्र के छात्रों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान साबित हुआ।
दारोगा राय की कॉलेज स्थापना की प्रेरक कहानी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजनीति में जहां स्वार्थ और पद की चर्चा अधिक होती है, वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय दारोगा प्रसाद राय ने गुरु–शिष्य परंपरा को जीवंत रखते हुए एक ऐसी मिसाल पेश की, जो आज के नेताओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु प्रभुनाथ सिंह (पीएन सिंह) को गुरु दक्षिणा के रूप में अपने विधानसभा क्षेत्र परसा के बाजार में कॉलेज की स्थापना कर न केवल गुरु के प्रति कृतज्ञता जताई, बल्कि क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य को भी एक नई दिशा दी।
गुरु दक्षिणा के रूप में परसा में कॉलेज की स्थापना
प्रभुनाथ कॉलेज, जो वर्तमान समय में जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा की अंगीभूत इकाई है और जिसे सरकारी मान्यता प्राप्त है, की स्थापना दारोगा प्रसाद राय ने अपने गुरु के नाम पर की थी। इस संबंध में परसा प्रखंड के अंजनी गांव निवासी लाल बहादुर राय, जो दरोगा बाबू के सहयोगी रहे हैं, बताते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान दरोगा बाबू को अंग्रेजों की पिटाई सहनी पड़ी थी और छह माह तक जेल में भी रहना पड़ा था। आजादी के बाद वे गुलटेनगंज निवासी प्रभुनाथ सिंह के संपर्क में आए और कादीपुर हाईस्कूल में शिक्षक के रूप में कार्य करने लगे।
राजनीति में कदम और गुरु का मार्गदर्शन
वर्ष 1952 के विधानसभा चुनाव में प्रभुनाथ सिंह के आग्रह और नेतृत्व में ही दारोगा बाबू ने राजनीति में कदम रखा और विधायक बने। बाद में गुरु के मार्गदर्शन में वे मंत्री और फिर मुख्यमंत्री भी बने। यह गुरु–शिष्य का रिश्ता सिर्फ राजनैतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक रूप से भी मजबूत था।
जनता कॉलेज से प्रभुनाथ कॉलेज तक की यात्रा
मालूम हो कि इस कॉलेज का प्रारंभिक नाम “जनता कॉलेज” था, जिसकी स्थापना वर्ष 1958 में हुई थी। हालांकि कुछ दिनों बाद किसी कारणवश या राजनीतिक साजिश के तहत उक्त कॉलेज को दिघवारा स्थानांतरित कर दिया गया। परसा विधानसभा क्षेत्र से कॉलेज हटाए जाने से आहत दारोगा बाबू ने यह संकल्प लिया कि हर हाल में परसा में ही कॉलेज की पुनः स्थापना करेंगे। उस समय वे परसा से विधायक थे और क्षेत्र की जनता से उनका गहरा जुड़ाव था।
मुख्यमंत्री पद के बाद कॉलेज की पुनर्स्थापना का संकल्प
दारोगा प्रसाद राय ने वर्ष 1970 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह निश्चय किया कि अपने राजनीतिक गुरु के नाम पर परसा में एक ऐसा कॉलेज स्थापित करेंगे, जो विश्वविद्यालय से अंगीभूत हो और सरकारी मान्यता प्राप्त करे। इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने वर्षों तक संघर्ष किया। कॉलेज के नामकरण और मान्यता के लिए उस समय लगभग 12 हजार रूपए की आवश्यकता थी, जिसे जुटाने के लिए दारोगा बाबू ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता जाकर भिक्षाटन तक किया। वर्ष 1977 में जयप्रकाश विश्वविद्यालय से अंगीभूत कराते हुए कॉलेज का नाम ‘प्रभुनाथ कॉलेज’ रखा गया। प्रभुनाथ कॉलेज की स्थापना उसी समर्पण और कृतज्ञता की अमर गाथा है, जो परसा के बच्चों के भविष्य को आज भी संवार रही है।
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गुरु दक्षिणा के रूप में परसा में कॉलेज की स्थापना
प्रभुनाथ कॉलेज, जो वर्तमान समय में जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा की अंगीभूत इकाई है और जिसे सरकारी मान्यता प्राप्त है, की स्थापना दारोगा प्रसाद राय ने अपने गुरु के नाम पर की थी। इस संबंध में परसा प्रखंड के अंजनी गांव निवासी लाल बहादुर राय, जो दरोगा बाबू के सहयोगी रहे हैं, बताते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान दरोगा बाबू को अंग्रेजों की पिटाई सहनी पड़ी थी और छह माह तक जेल में भी रहना पड़ा था। आजादी के बाद वे गुलटेनगंज निवासी प्रभुनाथ सिंह के संपर्क में आए और कादीपुर हाईस्कूल में शिक्षक के रूप में कार्य करने लगे।
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राजनीति में कदम और गुरु का मार्गदर्शन
वर्ष 1952 के विधानसभा चुनाव में प्रभुनाथ सिंह के आग्रह और नेतृत्व में ही दारोगा बाबू ने राजनीति में कदम रखा और विधायक बने। बाद में गुरु के मार्गदर्शन में वे मंत्री और फिर मुख्यमंत्री भी बने। यह गुरु–शिष्य का रिश्ता सिर्फ राजनैतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक रूप से भी मजबूत था।
जनता कॉलेज से प्रभुनाथ कॉलेज तक की यात्रा
मालूम हो कि इस कॉलेज का प्रारंभिक नाम “जनता कॉलेज” था, जिसकी स्थापना वर्ष 1958 में हुई थी। हालांकि कुछ दिनों बाद किसी कारणवश या राजनीतिक साजिश के तहत उक्त कॉलेज को दिघवारा स्थानांतरित कर दिया गया। परसा विधानसभा क्षेत्र से कॉलेज हटाए जाने से आहत दारोगा बाबू ने यह संकल्प लिया कि हर हाल में परसा में ही कॉलेज की पुनः स्थापना करेंगे। उस समय वे परसा से विधायक थे और क्षेत्र की जनता से उनका गहरा जुड़ाव था।
मुख्यमंत्री पद के बाद कॉलेज की पुनर्स्थापना का संकल्प
दारोगा प्रसाद राय ने वर्ष 1970 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह निश्चय किया कि अपने राजनीतिक गुरु के नाम पर परसा में एक ऐसा कॉलेज स्थापित करेंगे, जो विश्वविद्यालय से अंगीभूत हो और सरकारी मान्यता प्राप्त करे। इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने वर्षों तक संघर्ष किया। कॉलेज के नामकरण और मान्यता के लिए उस समय लगभग 12 हजार रूपए की आवश्यकता थी, जिसे जुटाने के लिए दारोगा बाबू ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता जाकर भिक्षाटन तक किया। वर्ष 1977 में जयप्रकाश विश्वविद्यालय से अंगीभूत कराते हुए कॉलेज का नाम ‘प्रभुनाथ कॉलेज’ रखा गया। प्रभुनाथ कॉलेज की स्थापना उसी समर्पण और कृतज्ञता की अमर गाथा है, जो परसा के बच्चों के भविष्य को आज भी संवार रही है।