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Bihar News: आस्था, आराधना और अद्भुत आभा; वटवृक्ष तले मां भगवती के दरबार में भक्तों की भीड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
Published by: सारण ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2026 05:35 PM IST
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सार
छपरा और सारण जिले में चैत्र नवरात्र के अवसर पर भक्ति का माहौल चरम पर है। जिले के विभिन्न मंदिरों और देवी स्थानों पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती पाठ और भजन-कीर्तन में जुटे हैं। खास बात यह है कि एक प्राचीन स्थल पर विशाल वटवृक्ष के नीचे माता भगवती पिंडी रूप में विराजमान हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
वटवृक्ष के नीचे पिंडी रूप में विराजमान माता भगवती
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सारण जिला मुख्यालय स्थित छपरा शहर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चैत्र नवरात्र को लेकर इन दिनों विशेष चहल-पहल देखी जा रही है। चारों ओर भक्ति की लहर व्याप्त है और पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। जिले के विभिन्न इलाकों में स्थित देवी स्थान, महारानी स्थान और मठ-मंदिरों में मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना की जा रही है। वहीं, श्रद्धालु अपने घरों में भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं।
भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रों से गूंज रहा माहौल
सुबह से लेकर देर शाम तक पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। गांव के समीर सिंह ने बताया कि नवरात्र के अवसर पर यहां सामूहिक रूप से दुर्गा सप्तशती पाठ का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में पुरुष और महिला श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां प्राचीन काल से ही एक विशाल वटवृक्ष के नीचे माता भगवती पिंडी रूप में विराजमान हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बिंदु है।
मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता
मां दुर्गा के भक्त कालिका सिंह और राजेश सिंह के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। यही कारण है कि दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। देवी स्थान की पवित्रता और धार्मिक महत्व को बढ़ाने के लिए पिंडी स्वरूप के समीप मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पूजा के दौरान पूरे परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। दीपों की रोशनी, फूलों की सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज एक अद्भुत आध्यात्मिक माहौल का निर्माण करती है।
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आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
देवी स्थान पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में लक्ष्मी नारायण सिंह, विभा देवी, मुनेंद्र कुमार सिंह, सुनील सिंह, रमेंद्र सिंह, राजीव सिंह, समीर सिंह, नवनीत सिंह, शिक्षक पिंटू सिंह, बृजेश सिंह, अजीत सिंह, मंटू सिंह सहित दोनों गांवों के लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
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भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रों से गूंज रहा माहौल
सुबह से लेकर देर शाम तक पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। गांव के समीर सिंह ने बताया कि नवरात्र के अवसर पर यहां सामूहिक रूप से दुर्गा सप्तशती पाठ का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में पुरुष और महिला श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां प्राचीन काल से ही एक विशाल वटवृक्ष के नीचे माता भगवती पिंडी रूप में विराजमान हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बिंदु है।
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मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता
मां दुर्गा के भक्त कालिका सिंह और राजेश सिंह के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। यही कारण है कि दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। देवी स्थान की पवित्रता और धार्मिक महत्व को बढ़ाने के लिए पिंडी स्वरूप के समीप मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पूजा के दौरान पूरे परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। दीपों की रोशनी, फूलों की सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज एक अद्भुत आध्यात्मिक माहौल का निर्माण करती है।
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आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
देवी स्थान पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में लक्ष्मी नारायण सिंह, विभा देवी, मुनेंद्र कुमार सिंह, सुनील सिंह, रमेंद्र सिंह, राजीव सिंह, समीर सिंह, नवनीत सिंह, शिक्षक पिंटू सिंह, बृजेश सिंह, अजीत सिंह, मंटू सिंह सहित दोनों गांवों के लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।