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Chandigarh News: 60 हजार परिवारों की नजरें, कब आएगी नीड बेस्ड चेंज कमेटी की रिपोर्ट
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकानों में किए गए नीड बेस्ड चेंज को लेकर करीब 60 हजार परिवारों की नजरें नई कमेटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। प्रशासन ने 11 मई को सीएचबी के सीईओ डी. कार्तिकेयन की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी को मकानों में किए गए बदलावों की समीक्षा कर यह तय करना था कि किन निर्माणों को अनुमति दी जा सकती है और किन्हें नियमित किया जा सकता है। कमेटी को दो सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक अंतिम रिपोर्ट प्रशासक को नहीं सौंपी गई है।
इस बीच कमेटी ने विभिन्न सेक्टरों का दौरा कर मौके पर किए गए निर्माण और बदलावों की स्थिति देखी। साथ ही आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों से चर्चा कर सुझाव और आपत्तियां भी लीं। सेक्टर-40सी, 43ए, 43बी, 49, 50, 51, 47 और 38 वेस्ट में निरीक्षण के दौरान स्थानीय प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें कमेटी के सामने रखीं।
आरडब्ल्यूए ने रखे व्यावहारिक समाधान
कमेटी के साथ बैठक में सेक्टर-40सी, 40डी, 41ए, 43ए, 43बी, 47डी और सेक्टर-13 की आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधि शामिल हुए। क्रॉफेड के चेयरमैन हितेश पुरी, महासचिव रजत मल्होत्रा, सेक्टर-13 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष कर्नल गुरसेवक सिंह, सेक्टर-43बी अध्यक्ष राजेश राय, सेक्टर-43 अध्यक्ष विक्रम चोपड़ा और सेक्टर-38 वेस्ट अध्यक्ष राजबीर सिंह बराड़ ने सुझाव दिए। प्रतिनिधियों ने जरूरत के मुताबिक वर्षों पहले किए गए बदलावों को व्यावहारिक आधार पर नियमित करने की मांग की।
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वन टाइम सेटलमेंट की मांग सबसे अहम
आरडब्ल्यूए और निवासी संगठनों का कहना है कि मकानों की निर्धारित सीमा के भीतर किए गए ऐसे बदलाव, जिनसे सार्वजनिक जमीन, ढांचागत सुरक्षा या फायर सेफ्टी प्रभावित नहीं होती, उन्हें शुल्क लेकर नियमित किया जाना चाहिए। पहले भी गैर-सरकारी सदस्यों ने बदलावों को कंपाउंडेबल उल्लंघन, चारदीवारी के भीतर बदलाव और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण जैसी श्रेणियों में बांटने का सुझाव दिया था। वन टाइम सेटलमेंट, अतिरिक्त निर्माण पर एकमुश्त शुल्क और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के नियमितीकरण की मांग भी उठती रही है।
सुरक्षा से समझौता नहीं
कमेटी को यह भी देखना है कि राहत देते समय मकानों की ढांचागत मजबूती, फायर सेफ्टी, रोशनी और वेंटिलेशन प्रभावित न हों। सुप्रीम कोर्ट के 10 जनवरी 2023 के निर्देशों के अनुरूप एफएआर संबंधी प्रावधानों को भी ध्यान में रखना है। फरवरी 2026 में प्रशासन नीड बेस्ड चेंज नीति में कुछ राहत मंजूर कर चुका है। अब नई कमेटी की अंतिम रिपोर्ट से ही साफ होगा कि शेष बदलावों पर क्या फैसला होता है और करीब 60 हजार परिवारों को कितनी राहत मिलती है।
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इस बीच कमेटी ने विभिन्न सेक्टरों का दौरा कर मौके पर किए गए निर्माण और बदलावों की स्थिति देखी। साथ ही आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों से चर्चा कर सुझाव और आपत्तियां भी लीं। सेक्टर-40सी, 43ए, 43बी, 49, 50, 51, 47 और 38 वेस्ट में निरीक्षण के दौरान स्थानीय प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें कमेटी के सामने रखीं।
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आरडब्ल्यूए ने रखे व्यावहारिक समाधान
कमेटी के साथ बैठक में सेक्टर-40सी, 40डी, 41ए, 43ए, 43बी, 47डी और सेक्टर-13 की आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधि शामिल हुए। क्रॉफेड के चेयरमैन हितेश पुरी, महासचिव रजत मल्होत्रा, सेक्टर-13 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष कर्नल गुरसेवक सिंह, सेक्टर-43बी अध्यक्ष राजेश राय, सेक्टर-43 अध्यक्ष विक्रम चोपड़ा और सेक्टर-38 वेस्ट अध्यक्ष राजबीर सिंह बराड़ ने सुझाव दिए। प्रतिनिधियों ने जरूरत के मुताबिक वर्षों पहले किए गए बदलावों को व्यावहारिक आधार पर नियमित करने की मांग की।
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वन टाइम सेटलमेंट की मांग सबसे अहम
आरडब्ल्यूए और निवासी संगठनों का कहना है कि मकानों की निर्धारित सीमा के भीतर किए गए ऐसे बदलाव, जिनसे सार्वजनिक जमीन, ढांचागत सुरक्षा या फायर सेफ्टी प्रभावित नहीं होती, उन्हें शुल्क लेकर नियमित किया जाना चाहिए। पहले भी गैर-सरकारी सदस्यों ने बदलावों को कंपाउंडेबल उल्लंघन, चारदीवारी के भीतर बदलाव और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण जैसी श्रेणियों में बांटने का सुझाव दिया था। वन टाइम सेटलमेंट, अतिरिक्त निर्माण पर एकमुश्त शुल्क और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के नियमितीकरण की मांग भी उठती रही है।
सुरक्षा से समझौता नहीं
कमेटी को यह भी देखना है कि राहत देते समय मकानों की ढांचागत मजबूती, फायर सेफ्टी, रोशनी और वेंटिलेशन प्रभावित न हों। सुप्रीम कोर्ट के 10 जनवरी 2023 के निर्देशों के अनुरूप एफएआर संबंधी प्रावधानों को भी ध्यान में रखना है। फरवरी 2026 में प्रशासन नीड बेस्ड चेंज नीति में कुछ राहत मंजूर कर चुका है। अब नई कमेटी की अंतिम रिपोर्ट से ही साफ होगा कि शेष बदलावों पर क्या फैसला होता है और करीब 60 हजार परिवारों को कितनी राहत मिलती है।