{"_id":"6a86152b0d7d59322c0a2373","slug":"need-to-heed-the-warning-signs-of-land-subsidence-in-chandigarh-chandigarh-news-c-16-pkl1079-1100526-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: चंडीगढ़ में धंसती जमीन को लेकर चेतने की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: चंडीगढ़ में धंसती जमीन को लेकर चेतने की जरूरत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। शहर के अलग-अलग हिस्सों में सड़क, फुटपाथ, पार्किंग और अन्य स्थानों पर जमीन धंसने की घटनाओं को लेकर सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने प्रशासन से वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने कहा कि सुनियोजित और आधुनिक शहर में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं को सामान्य रखरखाव की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन के अनुसार, भूमिगत जल रिसाव जमीन धंसने का एक संभावित कारण हो सकता है। जलापूर्ति पाइपलाइनों से लगातार रिसाव होने पर मिट्टी के कण खिसकने और जमीन के नीचे रिक्त स्थान बनने की संभावना रहती है। हालांकि इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकेगी। इसके लिए नगर निगम की पेयजल पाइपलाइनों का व्यापक लीक डिटेक्शन ऑडिट कराने का सुझाव दिया गया है।
एसोसिएशन ने पूरे शहर में सॉयल इन्वेस्टिगेशन और जियोटेक्निकल सर्वे कराने की भी मांग उठाई है। विभिन्न क्षेत्रों से मिट्टी के नमूने लेकर जांच की जाए और पूरे शहर का सॉयल मैप तैयार किया जाए। इसमें कमजोर मिट्टी वाले क्षेत्रों, भूमिगत जल रिसाव, पुरानी पाइपलाइनों, सीवर और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज लाइनों तथा बार-बार जमीन धंसने वाले स्थानों को चिन्हित किया जा सकेगा।
विज्ञापन
गर्ग ने कहा कि केवल ऊपर से मिट्टी भरने या सड़क की सतही मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए प्रशासन, नगर निगम और इंजीनियरिंग व भू-तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त उच्चस्तरीय टीम गठित कर भूमिगत स्थिति की गहन जांच कराई जानी चाहिए।
विज्ञापन
एसोसिएशन के अनुसार, भूमिगत जल रिसाव जमीन धंसने का एक संभावित कारण हो सकता है। जलापूर्ति पाइपलाइनों से लगातार रिसाव होने पर मिट्टी के कण खिसकने और जमीन के नीचे रिक्त स्थान बनने की संभावना रहती है। हालांकि इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकेगी। इसके लिए नगर निगम की पेयजल पाइपलाइनों का व्यापक लीक डिटेक्शन ऑडिट कराने का सुझाव दिया गया है।
विज्ञापन
एसोसिएशन ने पूरे शहर में सॉयल इन्वेस्टिगेशन और जियोटेक्निकल सर्वे कराने की भी मांग उठाई है। विभिन्न क्षेत्रों से मिट्टी के नमूने लेकर जांच की जाए और पूरे शहर का सॉयल मैप तैयार किया जाए। इसमें कमजोर मिट्टी वाले क्षेत्रों, भूमिगत जल रिसाव, पुरानी पाइपलाइनों, सीवर और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज लाइनों तथा बार-बार जमीन धंसने वाले स्थानों को चिन्हित किया जा सकेगा।
विज्ञापन
गर्ग ने कहा कि केवल ऊपर से मिट्टी भरने या सड़क की सतही मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए प्रशासन, नगर निगम और इंजीनियरिंग व भू-तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त उच्चस्तरीय टीम गठित कर भूमिगत स्थिति की गहन जांच कराई जानी चाहिए।