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Chandigarh News: चार घरों के बुझे चिराग, रो पड़ा सेक्टर-30
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चंडीगढ़। सेक्टर-30 में शुक्रवार की सुबह तक हर घर को अपने बेटों के कांवड़ लेकर लौटने का इंतजार था। किसी मां ने उनकी पसंद का खाना बनाने की तैयारी कर रखी थी तो कोई बहन भाई के लौटने का इंतजार कर रही थी लेकिन दोपहर बाद हरिद्वार से आई एक फोन कॉल ने पूरे सेक्टर की खुशियां छीन लीं। कुछ ही मिनटों में चार नाबालिग कांवड़ियों की मौत की खबर पूरे इलाके में फैल गई और सेक्टर-30 का माहौल मातम में बदल गया। सेक्टर-30 से 17 सदस्यीय दल कांवड़ लेने गया था।
हादसे में जान गंवाने वाले भरत, शिवांशु, नीतिश और रोहित बचपन के दोस्त थे। भरत, शिवांशु, नीतिश सेक्टर-30 में आसपास रहते थे और दूसरी बार हरिद्वार कांवड़ लेने गए थे। वहीं रोहित सेक्टर-26 में रहता था। किसी ने नहीं सोचा था कि भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक की श्रद्धा की यह यात्रा उनकी आखिरी यात्रा बन जाएगी।
सबसे दर्दनाक दृश्य भरत के घर का था। 16 वर्षीय भरत ने एक साल पहले ही अपने पिता हरीश कुमार को खोया था। पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारियों के बीच मां माधवी ने बेटे को पढ़ा-लिखाकर बड़ा करने का सपना देखा था। शुक्रवार को उन्हें काफी देर तक यह नहीं बताया गया कि हादसे में उनके बेटे की भी मौत हुई है। सिर्फ इतना कहा गया कि हरिद्वार में कुछ कांवड़ियों के साथ दुर्घटना हुई है।
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इसी बीच गली में सफेद टेंट पहुंचा। टेंट को अपने घर के सामने रुकता देख माधवी सब कुछ समझ गईं। उनकी चीख से पूरा मोहल्ला गूंज उठा। वह बेसुध होकर गिर पड़ीं। पड़ोसियों ने उन्हें संभाला और दिलासा देते रहे लेकिन मां की आंखें बार-बार दरवाजे की ओर उठ रही थीं, मानो अभी बेटा मुस्कुराते हुए लौट आएगा।
शिवांशु के घर भी यही मंजर था। बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले शिवांशु के पिता पवन चादरों की फेरी लगाकर परिवार चलाते हैं। बेटे की मौत की खबर सुनते ही वह हरिद्वार के लिए रवाना हो गए। घर पर बहन कनिका भाई को खोने के सदमे में गुमसुम बैठी रही। सहेलियां और रिश्तेदार उसे संभालते रहे, लेकिन उसकी आंखें लगातार छलकती रहीं।
दसवीं का छात्र नीतिश भी परिवार की उम्मीदों का सहारा था। उसके पिता राजेश टेलर हैं। दो बहनों का इकलौता भाई अब कभी घर नहीं लौटेगा। दोनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पड़ोस की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधाती रहीं लेकिन घर में पसरा सन्नाटा हर किसी को बेचैन कर रहा था।
जैसे-जैसे हादसे की खबर फैलती गई, सेक्टर-30 की गलियां लोगों से भर गईं। रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसी तीनों परिवारों के घरों के बाहर जुट गए। किसी के पास सांत्वना के शब्द नहीं थे। हर चेहरा स्तब्ध था। जिन युवाओं के साथ मोहल्ले के बच्चे खेलते थे, जो हर साल सावन में कांवड़ यात्रा की तैयारी करते थे, उनके यूं अचानक चले जाने पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था।
देर रात तक चारों घरों के बाहर लोगों का आना-जाना लगा रहा। हर कोई एक ही बात कह रहा था जो बच्चे भोलेनाथ का जल चढ़ाने निकले थे, वे खुद अपनों की आंखों में हमेशा के लिए आंसू छोड़ गए। आज सेक्टर-30 की हर गली में सिर्फ शोक, सन्नाटा और चार बुझी हुई जिंदगियों की टीस महसूस की जा रही है।
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हादसे में जान गंवाने वाले भरत, शिवांशु, नीतिश और रोहित बचपन के दोस्त थे। भरत, शिवांशु, नीतिश सेक्टर-30 में आसपास रहते थे और दूसरी बार हरिद्वार कांवड़ लेने गए थे। वहीं रोहित सेक्टर-26 में रहता था। किसी ने नहीं सोचा था कि भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक की श्रद्धा की यह यात्रा उनकी आखिरी यात्रा बन जाएगी।
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सबसे दर्दनाक दृश्य भरत के घर का था। 16 वर्षीय भरत ने एक साल पहले ही अपने पिता हरीश कुमार को खोया था। पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारियों के बीच मां माधवी ने बेटे को पढ़ा-लिखाकर बड़ा करने का सपना देखा था। शुक्रवार को उन्हें काफी देर तक यह नहीं बताया गया कि हादसे में उनके बेटे की भी मौत हुई है। सिर्फ इतना कहा गया कि हरिद्वार में कुछ कांवड़ियों के साथ दुर्घटना हुई है।
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इसी बीच गली में सफेद टेंट पहुंचा। टेंट को अपने घर के सामने रुकता देख माधवी सब कुछ समझ गईं। उनकी चीख से पूरा मोहल्ला गूंज उठा। वह बेसुध होकर गिर पड़ीं। पड़ोसियों ने उन्हें संभाला और दिलासा देते रहे लेकिन मां की आंखें बार-बार दरवाजे की ओर उठ रही थीं, मानो अभी बेटा मुस्कुराते हुए लौट आएगा।
शिवांशु के घर भी यही मंजर था। बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले शिवांशु के पिता पवन चादरों की फेरी लगाकर परिवार चलाते हैं। बेटे की मौत की खबर सुनते ही वह हरिद्वार के लिए रवाना हो गए। घर पर बहन कनिका भाई को खोने के सदमे में गुमसुम बैठी रही। सहेलियां और रिश्तेदार उसे संभालते रहे, लेकिन उसकी आंखें लगातार छलकती रहीं।
दसवीं का छात्र नीतिश भी परिवार की उम्मीदों का सहारा था। उसके पिता राजेश टेलर हैं। दो बहनों का इकलौता भाई अब कभी घर नहीं लौटेगा। दोनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पड़ोस की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधाती रहीं लेकिन घर में पसरा सन्नाटा हर किसी को बेचैन कर रहा था।
जैसे-जैसे हादसे की खबर फैलती गई, सेक्टर-30 की गलियां लोगों से भर गईं। रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसी तीनों परिवारों के घरों के बाहर जुट गए। किसी के पास सांत्वना के शब्द नहीं थे। हर चेहरा स्तब्ध था। जिन युवाओं के साथ मोहल्ले के बच्चे खेलते थे, जो हर साल सावन में कांवड़ यात्रा की तैयारी करते थे, उनके यूं अचानक चले जाने पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था।
देर रात तक चारों घरों के बाहर लोगों का आना-जाना लगा रहा। हर कोई एक ही बात कह रहा था जो बच्चे भोलेनाथ का जल चढ़ाने निकले थे, वे खुद अपनों की आंखों में हमेशा के लिए आंसू छोड़ गए। आज सेक्टर-30 की हर गली में सिर्फ शोक, सन्नाटा और चार बुझी हुई जिंदगियों की टीस महसूस की जा रही है।