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फार्मेसी पेपर लीक मामले को नकल बताकर लोगों को गुमराह कर रही सरकार: पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन
पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन (पीएसयू) ने फार्मेसी अफसरों की भर्ती परीक्षा के तथाकथित पेपर लीक मामले को लेकर बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के मुख्य गेट के सामने पिछले तीन दिनों से चल रहे दिन-रात के धरने के दौरान शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान यूनियन ने 4 अगस्त को यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के सामने विशाल प्रदर्शन करने का ऐलान किया। साथ ही क्षेत्र की सभी संगठनों, विद्यार्थियों, युवाओं, न्याय पसंद लोगों तथा पेपर लीक मामले से प्रभावित करीब 7,000 अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। यूनियन ने स्पष्ट किया कि उनका अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी रहेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पीएसयू के प्रदेश महासचिव धीरज फाजिल्का और जिला प्रधान हरवीर कौर ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार फार्मेसी पेपर लीक जैसे गंभीर मामले को जानबूझकर नकल का मामला बताकर पेश कर रही है। उनका कहना था कि यदि यह केवल नकल का मामला होता तो यूनिवर्सिटी यूएमसी के तहत कार्रवाई करती और अधिकतम तीन साल तक परीक्षा देने पर प्रतिबंध लगाया जाता। लेकिन सरकार स्वयं आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर चुकी है, जिससे स्पष्ट है कि यह पेपर लीक का मामला है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस घटना को पेपर लीक मानने से इसलिए बच रही है क्योंकि पहले सरकार के मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि पंजाब में पेपर लीक की घटना हुई तो जिम्मेदार लोगों से इस्तीफा लिया जाएगा। अब राजनीतिक जिम्मेदारी से बचने के लिए सरकार सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है।
यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी में अनियमितताएं केवल परीक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भर्तियों, निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं में भी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति, कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के तहत ठेके मनमर्जी से दिए जाते हैं, फर्जी बिलों के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया जाता है तथा नौकरियों के बदले भारी रिश्वत ली जाती है। उनका कहना था कि इन मामलों में पहले भी कई शिकायतें और जांच हो चुकी हैं, लेकिन आज तक कोई भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। पीएसयू नेताओं ने आरोप लगाया कि जनता का पैसा भ्रष्टाचार के जरिए कुछ लोगों की जेबों में पहुंचाया जा रहा है और इसमें क्षेत्र के विधायकों की भी हिस्सेदारी है। उनका कहना था कि सरकार असली दोषियों को बचाने के लिए छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन विद्यार्थी इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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