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Nag Panchami 2020 पर बना रहा कालसर्प दोष दूर करने का उत्तम योग, करना होगा ये उपाय

Wed, 22 Jul 2020 01:57 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 22 Jul 2020 01:57 PM IST
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Shiva Yoga on Nag Panchami
फाइल फोटो
श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी त्योहार मनाया जाता है। यह कालसर्प दोष की शांति के लिए एक उत्तम योग है।


नागपंचमी पर कराएं काल सर्प दोष पूजा - नागवासुकि मंदिर, प्रयागराज - 25-जुलाई-2020
Shiva Yoga on Nag Panchami
फाइल फोटो
पंचमी तिथि शुक्रवार दोपहर 2.35 बजे से प्रारंभ होकर 25 जुलाई को 12.02 बजे तक है, इसलिए नाग पंचमी 25 जुलाई को मनाई जाएगी। शनिवार सुबह 5.27 बजे से शिव योग भी प्रारंभ हो रहा है। शनिवार के दिन शिव योग में नागपंचमी पूजा का एक अद्भुत योग बन रहा है। इसमें भगवान शिव की नागों से पूजा उत्तम और कल्याणकारी है। यह कहना है सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित श्री भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का।

नागपंचमी पर कराएं काल सर्प दोष पूजा - नागवासुकि मंदिर, प्रयागराज - 25-जुलाई-2020
Shiva Yoga on Nag Panchami
फाइल फोटो
उन्होंने कहा कि यह कालसर्प दोष की शांति के लिए एक उत्तम योग है। ज्योतिष शास्त्र में राहु को सर्प का मुख और केतु को पूंछ बताया गया है। सर्पिणी भद्रा होती है। जिस जातक की कुंडली में भद्रा और कालसर्प दोष हो, उन्हें नागपंचमी के दिन कालसर्प दोष की शांति के लिए तीन धातु के बने 108 सर्पों का पूजन कर पानी में प्रवाहित कर देना चाहिए। इससे कालसर्प दोष की शांति होती है तथा सर्प दंश से मृत्यु का भय समाप्त होता है।
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Shiva Yoga on Nag Panchami
फाइल फोटो
राहुकाल में पूजा अर्चना नहीं होती। नागपंचमी के दिन सुबह 9.05 बजे से 10.47 बजे तक राहुकाल है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.45 बजे से दोपहर 1.22 बजे और शुभकाल सुबह 7.22 से 9.05 बजे तक पूजा के लिए श्रेष्ठ है। नाग पंचमी के महत्व की जानकारी देते हुए भृगु ज्योतिष केंद्र के ही पंडित मुनीश तिवारी ने बताया कि नाग देवता भारतीय संस्कृति में देवरूप में स्वीकार किए गए हैं। पुराणों में यक्ष, किन्नर और गंधर्वों के वर्णन के साथ नागों का भी वर्णन मिलता है।
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Shiva Yoga on Nag Panchami
फाइल फोटो
भगवान विष्णु की शैया की शोभा नागराज शेषनाग बढ़ाते हैं। भगवान शिव और गणेश जी के अलंकरण में भी नागों की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए नागपंचमी के अवसर पर नागों की पूजा का विशेष विधान है। देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि नागपंचमी पर शिवालयों में धातु से बने नाग-नागिन की पूजा करने से कालसर्प दोष मिटता है।
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