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वैज्ञानिक जांच पर कबीरधाम पुलिस का फोकस: अब फिंगरप्रिंट और हाईटेक तकनीक से सुलझेंगे अपराध
Wed, 05 Aug 2026 08:44 PM IST
कबीरधाम ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
Published by: कबीरधाम ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 08:44 PM IST
सार
कबीरधाम पुलिस ने अपराधों की वैज्ञानिक जांच को मजबूत बनाने के लिए जिले के विवेचना अधिकारियों को फिंगरप्रिंट, NAFIS और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य साक्ष्य आधारित और प्रभावी विवेचना सुनिश्चित करना है।
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प्रशिक्षण में पुलिस अधिकारी मौजूद रहे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कबीरधाम पुलिस अपराधों की जांच को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में जिले के विवेचना अधिकारियों को फिंगरप्रिंट, NAFIS और अन्य वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया, ताकि अपराधों की जांच साक्ष्य आधारित और परिणामोन्मुख हो सके।
अपराध अनुसंधान में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कबीरधाम पुलिस ने जिले के सभी थाना एवं चौकी के विवेचना अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य विवेचना की गुणवत्ता में सुधार लाना और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों तक तेजी से पहुंच सुनिश्चित करना रहा।
पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार एवं अमित पटेल के मार्गदर्शन में एकता चौक स्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण में सहायक उपनिरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षकों ने भाग लिया।
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कार्यशाला में फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी धर्मेंद्र कुमार भारती ने अधिकारियों को घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट के सही उपयोग तथा वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अपराध स्थल से मिले छोटे-से-छोटे साक्ष्य भी किसी जटिल मामले को सुलझाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम), MCU और अन्य आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों के उपयोग पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों को समझाया गया कि इन प्रणालियों की मदद से अज्ञात आरोपियों की पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान और वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्यों का विश्लेषण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार ने कहा कि बदलते समय में वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य अपराध अनुसंधान की रीढ़ बन चुके हैं। यदि विवेचना अधिकारी इन तकनीकों का सही उपयोग करें तो अपराधों के खुलासे की सफलता दर बढ़ेगी और दोषियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकेंगे।
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी धर्मेंद्र कुमार भारती को उत्कृष्ट सहयोग के लिए स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। प्रशिक्षण के सफल आयोजन में एमसीयू प्रभारी एएसआई चन्द्रभूषण सिंह, प्रधान आरक्षक मनीष सोनी, NAFIS प्रभारी चेतक नाथ योगी तथा आरक्षक यशवंत तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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अपराध अनुसंधान में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कबीरधाम पुलिस ने जिले के सभी थाना एवं चौकी के विवेचना अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य विवेचना की गुणवत्ता में सुधार लाना और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों तक तेजी से पहुंच सुनिश्चित करना रहा।
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पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार एवं अमित पटेल के मार्गदर्शन में एकता चौक स्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण में सहायक उपनिरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षकों ने भाग लिया।
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कार्यशाला में फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी धर्मेंद्र कुमार भारती ने अधिकारियों को घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट के सही उपयोग तथा वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अपराध स्थल से मिले छोटे-से-छोटे साक्ष्य भी किसी जटिल मामले को सुलझाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम), MCU और अन्य आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों के उपयोग पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों को समझाया गया कि इन प्रणालियों की मदद से अज्ञात आरोपियों की पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान और वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्यों का विश्लेषण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार ने कहा कि बदलते समय में वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य अपराध अनुसंधान की रीढ़ बन चुके हैं। यदि विवेचना अधिकारी इन तकनीकों का सही उपयोग करें तो अपराधों के खुलासे की सफलता दर बढ़ेगी और दोषियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकेंगे।
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी धर्मेंद्र कुमार भारती को उत्कृष्ट सहयोग के लिए स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। प्रशिक्षण के सफल आयोजन में एमसीयू प्रभारी एएसआई चन्द्रभूषण सिंह, प्रधान आरक्षक मनीष सोनी, NAFIS प्रभारी चेतक नाथ योगी तथा आरक्षक यशवंत तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।