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ब्लास्टिंग से घरों में दरारें, पेयजल संकट: SECL गेवरा में काम से दहल रहा गांव नराईबोध, प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन
Mon, 06 Jul 2026 01:14 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2026 01:14 PM IST
सार
एसईसीएल गेवरा खदान की लगातार हैवी ब्लास्टिंग से ग्राम नराईबोध के लोग परेशान हैं। ब्लास्टिंग से घरों को नुकसान हो रहा है और पेयजल संकट गहरा गया है।
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ब्लास्टिंग से घरों में दरारें
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एसईसीएल गेवरा खदान में हो रहे भारी खनन विस्फोटों ने ग्राम नराईबोध के लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। इन विस्फोटों के कारण घरों पर पत्थर गिर रहे हैं, दीवारों में दरारें आ गई हैं और पीने के पानी के स्रोत धंस रहे हैं। प्रबंधन की उदासीनता और विस्थापन-रोजगार में देरी से नाराज ग्रामीणों ने अब महाघेराव की चेतावनी दी है।
ग्राम नराईबोध गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि दोपहर में होने वाले विस्फोट इतने भीषण होते हैं कि पूरा गांव दहल उठता है। डर के मारे लोग अपने घर छोड़कर बाहर भागते हैं। कई मकानों की दीवारों और छतों में चौड़ी दरारें आ चुकी हैं, जिससे मानसून में बड़ी दुर्घटना का खतरा है।
हाल ही में एक गरीब परिवार के घर में विस्फोट का एक बड़ा पत्थर एस्बेस्टस चादर तोड़कर सीधे कमरे में गिरा था। उस समय परिवार के लोग अंदर आराम कर रहे थे, गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। अगले ही दिन चादर ठीक करते समय फिर विस्फोट हुआ और उसी जगह दूसरा पत्थर गिरा। गांव में नलकूप और कुएं भी धंस गए हैं, जिससे पेयजल संकट गहरा गया है।
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प्रबंधन पर आक्रोश और रोजगार का मुद्दा
घटना की सूचना पर एसईसीएल गेवरा के अधिकारी पहुंचे और उन्होंने नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने टूटी हुई एस्बेस्टस चादर के बदले नई चादर देने की बात कही। इस बयान पर ग्रामीण भड़क गए और पीड़ित परिवार ने कहा कि प्रबंधन के लिए उनकी जान की कीमत एक प्लास्टिक चादर जितनी रह गई है। रोजगार को लेकर भी ग्रामीणों में आक्रोश है, क्योंकि 51 डिसमिल तक के प्रभावित किसानों को पात्रता होने के बावजूद दो परिवारों के 4 पात्र सदस्यों को नौकरी नहीं दी जा रही। अन्य खातेदारों से आवेदन पत्र भरवाए जा रहे हैं, वहीं इनकी दस्तावेज रोककर रखी गई है।
विस्थापन में देरी और महाघेराव की चेतावनी
विस्थापन और बसाहट का काम केवल कागजों तक सीमित है। अधिकारी समतलीकरण का दावा करते हैं, पर जमीन पर कोई कार्य नहीं हुआ और नापी-सर्वेक्षण भी अधूरा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ बिचौलिए एसईसीएल और पीएनसी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए गांव में सक्रिय हैं और एकजुटता तोड़ रहे हैं।
पहले हुई त्रिपक्षीय बैठकों का कोई नतीजा नहीं निकला है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समस्याओं का त्वरित समाधान न होने पर वे एसईसीएल गेवरा मुख्यालय का महाघेराव करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन और प्रशासन की होगी।
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ग्राम नराईबोध गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि दोपहर में होने वाले विस्फोट इतने भीषण होते हैं कि पूरा गांव दहल उठता है। डर के मारे लोग अपने घर छोड़कर बाहर भागते हैं। कई मकानों की दीवारों और छतों में चौड़ी दरारें आ चुकी हैं, जिससे मानसून में बड़ी दुर्घटना का खतरा है।
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हाल ही में एक गरीब परिवार के घर में विस्फोट का एक बड़ा पत्थर एस्बेस्टस चादर तोड़कर सीधे कमरे में गिरा था। उस समय परिवार के लोग अंदर आराम कर रहे थे, गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। अगले ही दिन चादर ठीक करते समय फिर विस्फोट हुआ और उसी जगह दूसरा पत्थर गिरा। गांव में नलकूप और कुएं भी धंस गए हैं, जिससे पेयजल संकट गहरा गया है।
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प्रबंधन पर आक्रोश और रोजगार का मुद्दा
घटना की सूचना पर एसईसीएल गेवरा के अधिकारी पहुंचे और उन्होंने नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने टूटी हुई एस्बेस्टस चादर के बदले नई चादर देने की बात कही। इस बयान पर ग्रामीण भड़क गए और पीड़ित परिवार ने कहा कि प्रबंधन के लिए उनकी जान की कीमत एक प्लास्टिक चादर जितनी रह गई है। रोजगार को लेकर भी ग्रामीणों में आक्रोश है, क्योंकि 51 डिसमिल तक के प्रभावित किसानों को पात्रता होने के बावजूद दो परिवारों के 4 पात्र सदस्यों को नौकरी नहीं दी जा रही। अन्य खातेदारों से आवेदन पत्र भरवाए जा रहे हैं, वहीं इनकी दस्तावेज रोककर रखी गई है।

विस्थापन में देरी और महाघेराव की चेतावनी
विस्थापन और बसाहट का काम केवल कागजों तक सीमित है। अधिकारी समतलीकरण का दावा करते हैं, पर जमीन पर कोई कार्य नहीं हुआ और नापी-सर्वेक्षण भी अधूरा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ बिचौलिए एसईसीएल और पीएनसी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए गांव में सक्रिय हैं और एकजुटता तोड़ रहे हैं।

पहले हुई त्रिपक्षीय बैठकों का कोई नतीजा नहीं निकला है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समस्याओं का त्वरित समाधान न होने पर वे एसईसीएल गेवरा मुख्यालय का महाघेराव करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन और प्रशासन की होगी।