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Korba News: जयकारों के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, सीतामढ़ी और दादर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
Thu, 16 Jul 2026 09:39 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2026 09:39 PM IST
सार
सीतामढ़ी के राम जानकी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद शाम को रथ को मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। जैसे ही रथ के पहिए चले, श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयकारे लगाए।
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भव्य रथ यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरबा में आस्था और उल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। शहर के सीतामढ़ी स्थित प्राचीन राम जानकी मंदिर से शुरू हुई यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। वहीं 125 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत दादर बस्ती में भी रथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई।
सीतामढ़ी के राम जानकी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद शाम को रथ को मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। जैसे ही रथ के पहिए चले, श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयकारे लगाए। क्षेत्र की महिलाएं, पुरुष और बच्चे पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए। रथ को खींचने के लिए भक्तों में होड़ लगी रही। रास्ते भर भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देती रही।
मार्ग में जगह-जगह लोगों ने रथ रोककर भगवान की आरती उतारी। फूल-माला चढ़ाकर आशीर्वाद लिया। कई स्थानों पर भोग-भंडारे का आयोजन किया गया। करमा और मदार की थाप पर युवा और महिलाएं नाचते-गाते चल रही थीं। कुछ स्थानों पर जस गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
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शहर से सटे दादर बस्ती में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 125 वर्षों से लगातार निकाली जा रही है। इस बार भी हजारों की संख्या में कोरबा शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग पहुंचे। पूजा-पाठ के बाद विधिपूर्वक रथ को खींचा गया। रास्ते में भंडारे और प्रसाद वितरण के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ गई। बुजुर्गों ने बताया कि यह यात्रा पीढ़ियों से क्षेत्र की एकता और आस्था का प्रतीक रही है।
रथ यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। सीतामढ़ी और दादर दोनों स्थानों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रमुख चौक-चौराहों पर बैरिकेडिंग और निगरानी की गई। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त जवानों की ड्यूटी लगाई गई। अधिकारियों ने लगातार गश्त कर स्थिति पर नजर रखी।
रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कोरबा की सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। जगन्नाथ जी के रथ के साथ निकली इस शोभायात्रा में भक्ति, संगीत और सामुदायिक एकता के दर्शन हुए। देर शाम तक चली यात्रा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
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सीतामढ़ी के राम जानकी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद शाम को रथ को मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। जैसे ही रथ के पहिए चले, श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयकारे लगाए। क्षेत्र की महिलाएं, पुरुष और बच्चे पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए। रथ को खींचने के लिए भक्तों में होड़ लगी रही। रास्ते भर भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देती रही।
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मार्ग में जगह-जगह लोगों ने रथ रोककर भगवान की आरती उतारी। फूल-माला चढ़ाकर आशीर्वाद लिया। कई स्थानों पर भोग-भंडारे का आयोजन किया गया। करमा और मदार की थाप पर युवा और महिलाएं नाचते-गाते चल रही थीं। कुछ स्थानों पर जस गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
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शहर से सटे दादर बस्ती में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 125 वर्षों से लगातार निकाली जा रही है। इस बार भी हजारों की संख्या में कोरबा शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग पहुंचे। पूजा-पाठ के बाद विधिपूर्वक रथ को खींचा गया। रास्ते में भंडारे और प्रसाद वितरण के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ गई। बुजुर्गों ने बताया कि यह यात्रा पीढ़ियों से क्षेत्र की एकता और आस्था का प्रतीक रही है।
रथ यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। सीतामढ़ी और दादर दोनों स्थानों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रमुख चौक-चौराहों पर बैरिकेडिंग और निगरानी की गई। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त जवानों की ड्यूटी लगाई गई। अधिकारियों ने लगातार गश्त कर स्थिति पर नजर रखी।
रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कोरबा की सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। जगन्नाथ जी के रथ के साथ निकली इस शोभायात्रा में भक्ति, संगीत और सामुदायिक एकता के दर्शन हुए। देर शाम तक चली यात्रा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
