उम्र केवल एक नंबर है: नई शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती, रिटायरमेंट के बाद भी शुरू कर सकते हैं नया शौक
नई शुरुआत के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। अकेलेपन और अवसाद को दूर करने के लिए संगीत जैसे पुराने शौक को फिर से अपनाना एक बेहतरीन और सकारात्मक कदम है। 'लोग क्या कहेंगे' यह सोचे बिना अपनी खुशी चुनें। शौक मानसिक शांति देते हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण स्पेन के 82 वर्षीय हुआन लोपेज हैं। आइए, विस्तार से इनके बार में समझते हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अपने छूटे हुए शौक को पूरा करने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती। पैंसठ की उम्र में संगीत के अपने पुराने शौक को फिर से जिंदा करना न केवल उचित है, बल्कि मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक दृष्टि से यह आपके लिए एक बेहतरीन निर्णय हो सकता है। नई शुरुआत करने के लिए कभी देर नहीं होती। खासकर तब, जब जीवनसाथी का साथ छूट गया हो और बच्चे अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त हो गए हों। ऐसे में पीड़ादायी अकेलेपन को दूर करने के लिए संगीत का साथ बहुत ही सकारात्मक कदम है। इससे घर के सूने कोने में पसरी खामोशी की जड़ता टूटेगी। संगीत अकेलेपन से उपजने वाले अवसाद को खत्म करता है, क्योंकि संगीत में मन लगाने से दिमाग में खुशी देने वाले हार्मोन (एंडोर्फिन) रिलीज होते हैं, जो तनाव और उदासी को कम करते हैं।
आपने वर्षों तक घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। यही वजह है कि आपके बच्चे अपने-अपने जीवन में व्यस्त हैं और आपके ऊपर बोझ नहीं बने हैं। अब यह समय आपके 'स्वयं' से फिर से जुड़ने का है। संगीत से जुड़ाव आपको एक नई पहचान और जीने का मकसद देगा। संगीत का अभ्यास शुरू करने से मानसिक व आध्यात्मिक शांति तो मिलेगी ही, आपकी याददाश्त भी तेज होगी। संगीत भावनाओं की अभिव्यक्ति का उत्तम माध्यम है, जिससे दुख और अकेलेपन की भावना कम होती है।
अब जबकि आपने अपने पुराने शौक यानी संगीत का अभ्यास करने का मन बनाया है, तो इसे आनंददायक गतिविधि के रूप में शुरू करें। चूंकि आपको किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी है, इसलिए आप जो भी गाएं या बजाएं, उसमें खुशी व आनंद की तलाश करें। इंटरनेट के मौजूदा दौर में संगीत सीखने के लिए आप यूट्यूब पर संगीत ट्यूटोरियल देख सकती हैं। कई वेबसाइट ऑनलाइन संगीत शिक्षा उपलब्ध कराती हैं, आप उनसे भी मदद ले सकती हैं।
अगर संभव हो सके, तो आसपास के बुजुर्गों के साथ किसी संगीत मंडली से भी जुड़ सकती हैं। इससे सामाजिक मेल-जोल बढ़ेगा और आपका अकेलापन दूर होगा। यदि आप कोई वाद्ययंत्र बजाना सीखना चाहती हैं, तो गिटार, कीबोर्ड जैसे किसी छोटे वाद्ययंत्र से शुरुआत कर सकती हैं। इसमें आपके बच्चे भी आपका सहयोग कर सकते हैं। इस नई पहल से आपके बच्चों को भी प्रेरणा मिल सकती है। साठ-सत्तर की उम्र में आजकल लोग तंदुरुस्त जीवन जीते हैं और जीवन की हर गतिविधि में उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हैं। अगर आपके मन में कहीं यह आशंका हो कि पति के गुजरने के बाद संगीत सीखने को लोग किस रूप में लेंगे, तो इसे मन से निकाल दीजिए।
चार लोगों की बातों पर ध्यान मत दीजिए और आपको जो अच्छा लगता है, वह काम अवश्य कीजिए। उम्र महज एक संख्या है। कई शोधों से यह स्पष्ट हो चुका है कि संगीत या कलाएं सीखना मानसिक स्वास्थ्य से बेहद फायदेमंद होता है। आप बिना किसी हिचकिचाहट के इस नई शुरुआत को अपना सकती हैं और अपने शौक को पूरा कर सकती हैं।
82 वर्ष की उम्र और अल्ट्रा मैराथन
जब दुनिया रिटायरमेंट के बाद आराम करने की सोचती है, तब स्पेन के टोलेडो शहर के एक बुजुर्ग ने अपने दौड़ने वाले जूते पहने और इतिहास रच दिया। हुआन लोपेज गार्सिया, जो पहले कार मैकेनिक थे, ने 66 वर्ष की उम्र में दौड़ना शुरू किया। उस समय वह एक मील भी मुश्किल से दौड़ पाते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
आज 82 वर्ष की उम्र में वह 80 से 84 वर्ष आयु वर्ग की 50 किलोमीटर अल्ट्रा मैराथन के विश्व रिकॉर्ड धारक हैं। जब वैज्ञानिकों ने उनके शरीर की जांच की, तो वे हैरान रह गए। उनकी शारीरिक क्षमता किसी 20 वर्ष के युवा जैसी पाई गई। सामान्यतः यह क्षमता हर दस वर्ष में लगभग 10 प्रतिशत कम हो जाती है, लेकिन उनमें प्रशिक्षण शुरू करने के बाद यह बढ़ गई। हुआन कहते हैं, ‘मैंने केवल स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए थोड़ा दौड़ना शुरू किया था। मुझे कभी नहीं लगा था कि मैं यहां तक पहुंचूंगा।’ आज भी वह हर सप्ताह लगभग 40 मील दौड़ते हैं।